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Written By: Anshumala | Published : July 10, 2018 2:18 PM IST
मेनोपॉज और एजिंग का असर न सिर्फ स्किन पर दिखता है बल्कि बाल भी प्रभावित होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ बाल सफेद होने के साथ-साथ पतले भी होने लगते हैं। 40 से 50 वर्ष के आसपास महिलाओं को मेनोपॉज का भी सामना करना पड़ता है, जिसका फिजिकल अपीयरेंस पर भी असर पड़ता है। ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन कहती हैं कि बढ़ती उम्र और मेनोपॉज का नकारात्मक प्रभाव त्वचा, बालों और फिगर पर भी होता है। इससे अधिकतर महिलाएं यह सोच बैठती हैं कि वे अब पहले की तरह अट्रैक्टिव नहीं रहीं। दरअसल, एजिंग नेचुरल प्रॉसेस है। समय के साथ शरीर बूढ़ा होने लगता है, जिससे 'साइन ऑफ एजिंग" झलकने लगती है। इससे डील करके आप बहुत हद तक हेयर लॉस से बच सकती हैं।
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बाल क्यों होते हैं पतले
मेनोपॉजल या बढ़ती उम्र में बालों का पतला होना बहुत ही कॉमन है। ऐसा एस्ट्रोजेन लेवल के कम होने से होता है। बाल अलग-अलग व्यक्तित्व विशेषता और वंशानुगत आधार पर भी सफेद होते हैं। सफेद हुए बालों को दोबारा काला सिर्फ कलरिंग के जरिए ही किया जा सकता। बालों को काला करने के लिए हेयर कलर व डाई कॉमन प्रैक्टिस है, लेकिन इसमें मौजूद केमिकल्स से बाल डैमेज, ड्राई और ब्रिटल होने के साथ हेयर लॉस भी होता है।
ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन बता रही हैं मेनोपॉज के बाद बालों की देखभाल करने के उपाय
1 यदि आप कलर इस्तेमाल करती हैं, तो हेयर कंडीशनर का प्रयोग शैम्पू के बाद जरूर करें। बालों को और अधिक डैमेज न हो, उसके लिए माइल्ड शैम्पू का प्रयोग करें। सप्ताह में एक या दो बार हॉट ऑयल अप्लाई करें।
2 यदि कुछ ही ग्रे हेयर हैं, तो आगे बालों को डैमेज होने से बचाने के लिए स्ट्रीकिंग या फ्रॉस्टिंग करें। बालों को नेचुरल लुक प्रदान करने वाले ही हेयर कलर लगाएं। जेट ब्लैक हेयर कलर से बचें, क्योंकि यह अननेचुरल दिखने के साथ ओल्डर लुक देता है। सॉफ्टर कलर जैसे डार्क ब्राउन नेचुरल व अट्रैक्टिव लुक देता है। यदि बालों को कलर या डाइ करना ही है, तो रुटीन हेयर केयर की जरूरत होती है।
3 मेहंदी सबसे पॉपुलर नेचुरल हेयर कलरेंट है, साथ ही यह प्राकृतिक कंडीशनर का भी काम करती है। काली मेहंदी जैसी कोई प्राकृतिक सामग्री नहीं होती है, क्योंकि मेहंदी का प्राकृतिक रंग रेडिश ब्राउन होता है इसलिए काली मेहंदी के नाम पर बिकने वाले प्रोडक्ट में हार्मफुल परमानेंट डाई होते हैं। मेहंदी बालों को मजबूती प्रदान करती है। इसमें आप चाहें तो कत्था या कॉफी मिलाएं ताकि रिचर ब्राउन कलर मिल सके। चाहें तो ड्राई आंवला पाउडर खुद से तैयार कर मेहंदी में डालकर लगाएं। इससे बाल सफेद होने से बचेंगे। ग्रे हेयर से बचने के लिए आप चाहें तो एक गिलास में पानी में आंवले का जूस मिलाकर पिएं।
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4 यदि आप हिना पेस्ट में आंवला मिलाना चाहती हैं, तो ड्राई आंवला 2 से 3 कप पानी में रातभर भिगो कर रख दें। सुबह पानी निकाल कर आंवले को ग्राइंड कर लें। हिना पाउडर में आंवला, 4 छोटा चम्मच नींबू का रस और कॉफी, 2 कच्चे अंडे, 2 चम्मच ऑयल और बचा हुआ आंवला पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। दो घंटे इस मिक्स्चर को रखने के बाद बालों में लगाएं। दो घंटे छोड़ दें और फिर पानी से बालों को धो लें।
5 हेयर ऑयल में भी आंवला मिला सकती हैं। लोहे की कड़ाही में ड्राई आंवला रोस्ट करें और पाउडर बना लें। इसमें 200 एमएल तिल या नारियल का तेल मिलाएं। जार में अच्छी तरह से बंद कर 10 से 15 दिन के लिए धूप में रख दें। छान कर इस्तेमाल में लाएं।
6 यदि आपकी उम्र 35 से 40 वर्ष है, तो ऑयल ग्लैंड्स की एक्टिविटी में कमी आने से बाल सफेद हो सकते हैं इसलिए प्रतिदिन ऑयल अप्लाई करें। न तो जोर-जोर से मसाज करें और न ही बालों को रगड़ें।
7 क्लिनिकल स्कैल्प ट्रीटमेंट से भी मदद मिलती है। वास्तव में इस ट्रीटमेंट का प्रयोग हेयर लॉस चेक करने के लिए होता है। उत्तेजना, चिंता, तनाव भी मेनोपॉजल अवस्था के दौरान हेयर लॉस बढ़ाता है, इसलिए जितना हो सके इससे बचें। शॉर्ट हेयरकट रखें। इससे आपको नया फील होने के साथ यंगर लुक मिलेगा। बेहतर डायट भी हेल्दी हेयर के लिए बहुत जरूरी है। प्रतिदिन स्प्राउट, ताजे फल, सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोयाबीन, दही भोजन में शामिल करें। स्प्राउट्स में अमीनो एसिड होता है, जो बालों के लिए फायदेमंद होता है।
चित्रस्रोत:Shutterstock