समय से पहले बाल हो रहे हैं सफेद? आज़माएं त्रिफला चूर्ण!

बालों को काला करने के लिए हेयर कलर का इस्तेमाल करने से पहले इस चूर्ण को ट्राई करें।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 7:20 PM IST

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अनुवादक: Mousumi Dutta

बाल का झड़ना हो या सफेद होना कुछ हद तक लाइफस्टाइल के इफेक्ट के कारण होता है। अगर आप रात को पूरी नींद नहीं लेते हैं, जंक फूड्स ही ज्यादा खाते है या धूप में ज्यादा देर तक रहते हैं तो इसके प्रभाव के कारण शरीर के हार्मोन में प्रॉबल्म होता है जिसका असर आपके बालों पर पड़ता है। इसलिए अपने बाल को झड़ने और सफेद होने से बचाने के लिए सबसे पहले हेल्दी लाइफस्टाइल पर ध्यान देने की ज़रूरत होती है। इन्हीं सब कारणो से आजकल 30 या उससे भी कम उम्र में लोगों के बाल सफेद होने लगे हैं। अगर आप सफेद बालों के कारण दूसरों के सामने शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं और हेयर कलर इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो इसके इस्तेमाल के पहले त्रिफला चूर्ण को ट्राई करें।

कैसे त्रिफला चूर्ण काम करता है

त्रिफला चूर्ण मूल रूप से हरद, आंवला और बहेड़ा को चुर्ण करके बनाया जाता है। इस चूर्ण में विटामिन सी और पावरफूल एन्टीऑक्सिडेंट होता है जो फ्री रैडिकल्स को निकालकर बालों के विकास में मदद करता है। बालों के सफेद होने के पीछे मिनरल की कमी और हार्मोनल प्रॉबल्म होता है। इसमें जो आयरन और पोटाशियम नाम का जो मिनरल होता है वह बालों के विकास में मदद करने के साथ-साथ बालों के झड़ने और सफेद होने से बचाते हैं। त्रिफला चूर्ण शरीर को डिटॉक्सफाई करके सिर और बालों के जड़ो में रक्त का प्रवाह बेहतर करने के साथ-साथ बालों का झड़ना कम करता है।

कैसे करें इसका इस्तेमाल

• एक छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण पाउडर में एक बड़ा चम्मच नारियल का तेल या बादाम का तेल डालकर दो-तीन मिनट तक उबालें। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पाउडर अच्छी तरह से मिक्स हो जाना चाहिए।

• तीन मिनट तक उबलने के बाद थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें।

• अब गुनगुना गर्म तेल स्कैल्प और बालों पर लगाकर हल्के से मसाज़ करें।

इस तेल का इस्तेमाल हफ़्ते में दो बार करें, इससे आपको ज्यादा लाभ मिलेगा। इस चूर्ण से रूसी, खुजली और एलोपेसिया के समस्या में लाभ मिलता है।

चित्र स्रोत: Shutterstock

संदर्भ: 

Dweck, A. C. (2002). Natural ingredients for colouring and styling. International journal of cosmetic science, 24(5), 287-302.

Gaud K. Sharangadhara – samhita – Sharangadharacharya virachita (14th Cen. A.D.) Lucknow: Tejjkumar; 1967. p. 419. Chapter 2(9):161,162.


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