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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:58 AM IST
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अनुवादक – Shabnam Khan
गर्मियों और तेज़ धूप के दिनों में घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी जाती है। अपनी स्किन का ख्याल करने वाले लोग सनस्क्रीन लगाकर बाहर निकलते हैं। लेकिन ज़रा सोचिये, आपने सनस्क्रीन लगाई भी, लेकिन फिर भी आपको टैनिंग हो गई। इसका क्या कारण हो सकता है? कहीं ऐसा तो नहीं आपकी सनस्क्रीन अब असर ही न दिखा रही हो? बैंगलोर की कॉन्ट्रा क्लिनिक की फाउंडर और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर चेताली दीक्षित ने कुछ ऐसी बातें बताई जिनका ध्यान हर सनस्क्रीन लगाने वाले को रखना चाहिए।
सनस्क्रीन की कंसीस्टेंसी बदलना – सनस्क्रीन को काफी वक्त इस्तेमाल करने के बाद ऐसा मुमकिन है कि उसका लिक्विड और क्रीम अलग-अलग दिखने लगें। ऐसा इसमे मिली सामग्री अलग-अलग होने पर होता है। साथ ही, इसका रंग भी बदल सकता है। ये सफेद से पीली हो सकती है।
टेक्सचर बदलना – अगर आपको अपनी क्रीम में छोटे-छोटे दाने या बुलबुले दिखाई दे रहे हैं तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि इसकी जरूरी सामग्री खराब होने लगी है या उसका असर खत्म होने लगा है। टाइटेनियम ऑक्साइड और ज़िंक ऑक्साइड जैसी सामग्री के कारण ऐसा हो सकता है। ऐसा होने पर अपना प्रॉडक्ट बदल लें।
एक्सपायरी डेट चेक करें – आमतौर पर सनस्क्रीन की एक्सपायरी डेट तीन साल की होती है, लेकिन अगर आप लंबे वक्त से उसे इस्तेमाल कर रही हों तो अब उसे अलग कर दें। पुरानी क्रीम का कवर उतर जाता है, और उसके साथ ही एक्सपायरी डेट या मैनुफैक्चरिंग डेट गायब हो जाती है। इसलिए जब सनस्क्रीन खरीदें, उसके कैप पर परमानेंट मार्कर से डेट लिख लें।
लगाने के बाद स्किन पर जलन – जब सनस्क्रीन में केमिकल फार्मूला बिगड़ जाता है तो ये स्किन के संपर्क में आते ही जलन और एलर्जी पैदा कर सकता है। इसके इस्तेमाल के बाद आपकी स्किन पर लालिमा हो सकती है। ऐसे में अपनी इस सनस्क्रीन को अलग कर दें।
चित्र स्रोत - Shutterstock