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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 7:28 PM IST
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अनुवादक – Shabnam Khan
एक वक्त के बाद सबके चेहरे पर उम्र के निशान दिखने लग जाते हैं। इससे पहले कि हम चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों और झाइयों से बचने की बात शुरु करें, पहले हमें ये समझने की जरूरत है कि ये सब होता क्य़ों है? कलकत्ता के बी बोनी की सीनियर ब्यूटी एक्सपर्ट तन्मय घोष ने इसके बारे में जानकारी दी।
स्किन पर क्यों पड़ता है बढ़ती उम्र का असर
गुरुत्वाकर्षण, धूप, भीतर से उम्र बढ़ना और रोजमर्रा का तनाव आपकी स्किन पर बुरा असर डालता है। स्किन पर इन सबकी वजह से सन डैमेज, एज स्पॉट, दाग-धब्बे और झाइयां हो जाती हैं। स्किन के ढीले होने और लटक जानें से झुर्रियां पड़ जाती हैं। स्किन के नीचे चेहरे को सपोर्ट करने वाला स्ट्रक्चर (मसल्स, लिगामेंट्स आदि) ढीला पड़ जाता है जिससे चेहरा पिचका-पिचका भी लगने लगता है।
इससे चेहरे पर उम्र के कई तरह के निशान दिखने लगते हैं, जैसे जबड़े और ठोड़ी के पास हड्डियां निकलना, चिन के नीचे फैट दिखना, पलकें गिरना या चेहरे के दूसरे हिस्सों का बदलना।
कैसे रोकें उम्र के इन निशानों को
उम्र का असर स्किन पर न पड़े इसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि आपका लाइफस्टाइल हेल्दी हो। खासतौर से आपकी डाइट। आपकी डाइट में एंटीऑक्सीडेंट जरूर होने चाहिए। आप एक्सरसाइज़ करें। स्मोकिंग न करें और स्किन का ख्याल रखें। इसके अलावा कुछ नॉन-सर्जिकल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिये भी आप अपने चेहरे को वापस पहले जैसा बना सकते हैं। कम उम्र के मरीज़ों के लिए नॉन-सर्जिकल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट अच्छे रहते हैं जबकि ज्यादा उम्र वालों के लिए सर्जरी जरूरी हो जाती है क्योंकि उनकी स्किन पर उम्र का असर ज्यादा दिखने लगता है। स्किन की क्वालिटी, टेक्टचर और लुक बेहतर होने से कम उम्र और ज्यादा उम्र दोनों तरह के मरीजों को कई फायदे होते हैं। नीचे दिये गए नॉन-सर्जिकल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट विकल्पों में से किसी को आप चुन सकते हैं:
इसके अलावा बोटोक्स और इंजेक्टेबल फिलर जैसे कुछ दूसरे नॉन-सर्जिकल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट भी हैं जो चेहरे को फायदा पहुंचा सकते हैं। बोटोक्स स्माइल लाइन कम करता है। रीस्टाइलेन, जूवेडर्म, रेडीसे और आर्टेफिल जैसे फिलर पिचके हुए एरिया का भराव करता है। जैसे कि आंखों के आसपास, होंठ आदि। स्किन टाइट करने के लिए थर्मेज, टाइटन जैसे स्किन टाइटनिंग प्रोसीजर भी हैं। हालांकि इनमें मरीज को संतुष्टि कम ही मिल पाती है।
सर्जिकल ऑप्शन में फेस लिफ्ट, फोरहेड लिफ्ट, आई लिफ्ट, मिडफेस लिफ्ट और नेक लिफ्ट होते हैं। ये अमूमन नॉन-सर्जिकल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के साथ मिलाकर किये जाते हैं। अगर आप इस तरह के ट्रीटमेंट को अपनाना चाहते हैं तो स्पेशलिस्ट के पास ही जाएं, जो आपकी जरूरत के हिसाब से आपका ट्रीटमेंट कर सके।
चित्र स्रोत - Shutterstock