क्या आप सही सनस्क्रीन इस्तेमाल कर रहे हैं? जानिए इससे जुड़े कॉमन मिथक
How to know the right sunscreen : क्या आप सही तरीके से सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं? शायद आप किसी तरह की गलती को नहीं कर रहे? आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ मिथ और फैक्ट्स-
Myth About Sunscreen : आज के समय में सनस्क्रीन का उपयोग करना अधिकांश लोगों की स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बन गया है, लेकिन क्या आप यह सुनिश्चित करते हैं कि जो सनस्क्रीन आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह आपकी त्वचा के लिए सही है? और क्या आप इसे सही तरीके से लगा रहे हैं? बहुत से लोग इसके बारे में भ्रमित रहते हैं, जिससे उन्हें त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानें कुछ जरूरी बातें और मिथक, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
SPF और ब्रॉड स्पेक्ट्रम
सनस्क्रीन का चयन करते समय सबसे पहले उसके SPF यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर पर ध्यान देना चाहिए। यदि आप ज़्यादातर समय घर या ऑफिस में रहते हैं, तो SPF 30 वाला सनस्क्रीन आपके लिए पर्याप्त है। लेकिन अगर आप बाहर धूप में रहते हैं या यात्रा करते हैं, तो SPF 50 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन आवश्यक होगा। इसके साथ ही, यह भी ज़रूरी है कि सनस्क्रीन ब्रॉड स्पेक्ट्रम’ हो ताकि वह UVA और UVB दोनों किरणों से आपकी त्वचा की सुरक्षा कर सके।
आपकी स्किन टाइप के अनुसार चुनें सनस्क्रीन
सनस्क्रीन का चुनाव करते समय आपकी स्किन टाइप को ध्यान में रखना ज़रूरी है। अगर आपकी त्वचा ऑयली है, तो जेल-बेस्ड या वॉटर-बेस्ड सनस्क्रीन बेहतर रहेगा क्योंकि यह हल्का होता है और पिंपल्स नहीं करता। वहीं, अगर आपकी स्किन ड्राय है, तो क्रीमी या मॉइस्चराइजिंग बेस वाला सनस्क्रीन आपकी त्वचा को नमी देगा और सुरक्षात्मक भी रहेगा।
सिर्फ एक बार लगाने से नहीं होगा असर
यह एक आम गलती है कि लोग सनस्क्रीन सुबह एक बार लगाकर पूरे दिन बाहर रहते हैं। असल में, हर 3 से 4 घंटे में दोबारा सनस्क्रीन लगाना ज़रूरी होता है, खासकर जब आप पसीना बहा रहे हों, तैराकी कर रहे हों या बहुत समय धूप में बिता रहे हों। तभी यह आपकी त्वचा को प्रभावी रूप से सुरक्षित रख सकता है।
आम मिथक और उनकी सच्चाई
कई बार लोग कुछ आम गलत धारणाओं की वजह से सनस्क्रीन का इस्तेमाल नहीं करते या गलत तरीका अपनाते हैं। जैसे कि:
“धूप नहीं है तो सनस्क्रीन की जरूरत नहीं”: यह सोच गलत है। सूरज की UV किरणें बादलों और सर्द मौसम में भी आपकी त्वचा तक पहुंच सकती हैं।
“गहरे रंग की त्वचा को सनस्क्रीन की जरूरत नहीं”: सभी स्किन टोन को UV किरणों से नुकसान पहुंच सकता है। चाहे दाग-धब्बे हों, झाइयां हों या समय से पहले एजिंग—सनस्क्रीन सभी के लिए जरूरी है।
“मेकअप में SPF है, तो अलग से लगाने की जरूरत नहीं”: मेकअप में मौजूद SPF पर्याप्त नहीं होता। सबसे पहले सनस्क्रीन लगाएं और उसके बाद मेकअप करें।
“सनस्क्रीन से पिंपल्स हो जाते हैं”: इसका मतलब है कि वो सनस्क्रीन आपकी स्किन टाइप के लिए उपयुक्त नहीं है। सही फॉर्मूलेशन चुनना जरूरी है, और इसके लिए त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
सनस्क्रीन सिर्फ गर्मियों के लिए नहीं है:
यह भी एक आम सोच है कि सनस्क्रीन सिर्फ गर्मियों में लगाया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि सूरज की UV किरणें सालभर सक्रिय रहती हैं और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए सनस्क्रीन को सालभर, हर मौसम में अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
By Dr.Bhawuk Dhir, Consultant Dermatology, PSRI Hospital Delhi