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आयुष (Ayush)

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आयुष (AYUSH) कई चिकित्सा प्रणालियों का परिवर्णी शब्द, जो आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल है। इन सभी चिकित्सा प्रणालियों के अंग्रेजी शब्द के पहले अक्षरों को एक दूसरे के साथ, जोड़ते हुए ‘आयुष’ शब्द बनाया गया है। ये सभी चिकित्सा प्रणालियां तत्वज्ञान पर आधारित हैं और एक स्वस्थ जीवन जीने के तरीके का प्रतिनिधित्व करती हैं। आयुष मंत्रालय को 9 नवंबर 2014 में शुरू किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य हमारे ज्ञान को पुनर्जीवित करना था। आयुष स्वास्थ्य देखभाल की अलग-अलग प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों को एक साथ जोड़ने वाला एक विभाग है। इससे पहले भारत में 1995 में शुरू की गई इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एंड होम्योपैथी (ISM&H) को ये प्रणालियां विकसित करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसके बाद 2003 इसका नाम बदल कर डिपार्टमेंट ऑफ आयुर्वेद, योग एंड नेचुरोपैथी, यूनानी सिद्ध और होम्योपैथी रख दिया गया। इस दौरान आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी पर रिसर्च और शिक्षा पर जोर दिया गया था। आयुष मंत्रालय का मुख्य कार्य इन सभी चिकित्सा पद्धतियों को संवर्धन और विकास प्रणाली के माध्यम से आम व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना और इनसे संबंधी शिक्षा व रिसर्च आदि पर नजर रखना है।

आयुष की चिकित्सा पद्धतियां

आयुष की शुरुआत आमतौर पर प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों का प्रबंधन और संचालन करने के लिए किया जाता है। इसमें आमतौर पर 7 प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां आती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  1. आयुर्वेद - आयुर्वेद को दुनिया की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से एक के रूप में जाना जाता है और इसके बारे में कहा जाता है कि इसे भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग 3000 सालों से उपयोग में लाई जा रही है।
  2. योग - यह एक चिकित्सा प्रणाली नहीं बल्कि एक अभ्यास व अनुशासन प्रणाली है, जिसका प्रभाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसका जन्म प्राचीन भारत में हुआ और आज दुनियाभर में इसका अभ्यास किया जाता है।
  3. नेचुरोपैथी - यह भी एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल आज भी दुनिया के कई हिस्सों में किया जाता है। नेचुरोपैथी की जड़े 16वीं से 17वी शताब्दी में जर्मनी व यूरोप में देखी गई हैं। नेचुरोपैथी शरीर की सेल्फ हिलिंग (खुद स्वस्थ होना) तकनीक पर आधारित है।
  4. यूनानी - यह उन चिकित्सा प्रणालियों में है, जिनता प्राचीन समय से लेकर वर्तमान में भी उतना ही प्रभाव है। यूनानी चिकित्सा इस सिद्धांत पर आधारित है कि अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी जैसे प्रमुख तत्व किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  5. सिद्ध - इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली का जन्म भी भारत में ही हुआ और इसके कई नियम आयुर्वेद से मेल खाते हैं। सिद्ध चिकित्सा के अभ्यासकर्ताओं के अनुसार सिद्ध चिकित्सा आयुर्वेद से भी ज्यादा प्राचीन है और आज भी दक्षिण भारत में सिद्ध चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  6. होम्योपैथी - होम्योपैथी आयुर्वेद व सिद्ध जितनी प्राचीन नहीं है और इसलिए इसकी दवाओं में पौधों के साथ-साथ कई प्रकार के सिंथेटिक पदार्थों और रसायनों का उपयोग किया जाता है।
  7. सोवा-रिग्पा - यह भी सबसे प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से एक है और इस बारे में सटीक जानकारी बहुत ही कम हैं। इसे पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा के नाम से भी जाना जाता है और आज भी तिब्बत, भारत, नेपाल चीन और कई आसपास के देशों में इस पद्धति का अभ्यास किया जाता है।

आयुष और विज्ञान

हालांकि, आयुष के आलोचकों का मुख्य तर्क आयुष में वैज्ञानिक और साक्ष्य प्रमाणों की कमी है। इसी वजह से कई वैज्ञानिक व अन्य मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम से जुड़े विभाग होम्योपैथी समेत कई प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों को स्यूडोसाइंस (असली विज्ञान न होना) मानते हैं और इसके नकल के रूप में खारिज करते हैं। वहीं आयुष से मिलने वाले सकारात्मक रिजल्ट को एक प्लेसिबो इफेक्ट भी माना जाता है। उदाहरण के तौर पर डायबिटीज रोग के लिए आयुष द्वारा दी जाने वाली दवाएं जैसे बीजीआर-34 और आईएमई-9 दोनों से गंभीर साइड इफेट्स देखे गए हैं। इनमें व्यक्ति का ब्लड ग्लूकोज लेवल कई बार गंभीर रूप से भी बढ़ जाता है। वहीं इस दवा की मासिक लागत भी मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम की दवा मेटफोर्मिन से ज्यादा आंकी गई है।

एलोपैथी से अलग

वैसे तो सभी चिकित्सा पद्धियों की अपनी अलग प्रणाली होती है और इनका उपचार करने का तरीका व दवा के रूप में इस्तेमाल की गई सामग्री भी अलग-अलग होती है। लेकिन देखा गया है कि कई प्राचीन चिकित्सा पद्धियों की कुछ तकनीक व प्रणालियां आपस में काफी मेल खाती हैं। लेकिन इन सभी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों से एलोपैथी पूरी तरह से अलग है। एलोपैथी को मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम भी कहा जाता है और यह सबसे नई चिकित्सा पद्धति होने के साथ-साथ सबसे एडवांस भी है। एलोपैथी मेडिसिन सिस्टम अन्य सभी चिकित्सा प्रणालियों की तुलना में ज्यादा रिसर्च और बेहतर ट्रीटमेंट तकनीक पर आधारित है। एलोपैथी के अंतर्गत तैयार की जाने वाली दवाएं अलग-अलग स्तरों पर रिसर्च और टेस्टिंग पर आधारित होती हैं। वहीं दवा की खुराक भी निर्धारित होती है, जबकि कई बार प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों को खुराक कम ज्यादा हो जाती है और साइड इफेक्ट्स होने का खतरा बढ़ जाता है।

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