
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : September 22, 2025 8:16 PM IST
नाड़ी परीक्षा (Nadi Pariksha/Pulse Diagnosis) आयुर्वेद की प्राचीन विधियों में से एक है। आयुर्वेद के ग्रंथ जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, और शारंगधर संहिता में भी नाड़ी परीक्षा का वर्णन मिलता है। नाड़ी परीक्षा एक ऐसी आयुर्वेदिक पद्धति है, जो व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य की जानकारी देती है। आयुर्वेदिक पद्धति को बढ़ावा देने और आयुर्वेद के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल 23 सितंबर को वर्ल्ड आयुर्वेदा डे (World Ayurveda Day 2025) मनाया जाता है। वर्ल्ड आयुर्वेदा डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं, आयुर्वेद की सबसे प्राचीन पद्धति नाड़ी परीक्षा यानि की नाड़ी को देखकर कौन सी बीमारियों का पता चलता है?
महर्षि आयुर्वेदिक अस्पताल के डायरेक्टर लक्ष्मण श्रीवास्तव के अनुसार, नाड़ी के जरिए शरीर के वात, पित्त और कफ दोषों की जानकारी मिलती है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट जब किसी व्यक्ति की नाड़ी को छूकर देखते हैं, तो उनके शरीर के अंदर क्या चल रहा है इसकी जानकारी उन्हें मिलती है।
1. वात‑जाल (Vata sambandhi रोग)
नाड़ी को छूने के बाद सबसे पहले वात से जुड़ी परेशानी का पता चलता है। शरीर में वात दोष बढ़ने से जोड़ों का दर्द, गठिया (Arthritis), स्नायु‑तन्तुओं (nerves) की समस्याएं जैसे झुनझुनी, कमजोरी, तंत्रिका दर्द और पाचन से जुड़ी परेशानियों का पता चलता है।
2. पित्त संबंधी बीमारियां
नाड़ी परीक्षण के जरिए पित्त से जुड़ी बीमारियों का भी पता चलता है। शरीर में पित्त दोष बढ़ने से अम्लता, गैस, जलन, पेट दर्द, त्वचा पर दाग‑धब्बे, लालिमा, खुजली और हार्मोन संतुलन से जुड़ी परेशानियां होती हैं।
3. कफ दोष से जुड़ी बीमारी
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि नाड़ी प्रक्रिया से पता चलता है कि शरीर का कफ दोष संतुलित है या नहीं। कफ दोष असंतुलित होने पर सर्दी‑खांसी, अस्थमा, ब्रोन्काइटिस, बलगम बनना और शरीर में भारीपन की समस्या होती है।
1. हार्ट से जुड़ी बीमारी (Cardiac Problems)
अगर किसी व्यक्ति की नाड़ी की गति बहुत ज्यादा धीमी या तेज है, तो ये दिल की धड़कन में गड़बड़ी या एरिद्मिया (Arrhythmia) का लक्षण है। ये व्यक्ति की हार्ट से जुड़ी बीमारी का संकेत देती है।
2. हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
तेज, कठोर और उछलती हुई नाड़ी अक्सर हाई ब्लड प्रेशर का संकेत देती है। अगर दबाव डालने पर भी नाड़ी बहुत सशक्त महसूस हो, तो यह हाइपरटेंशन का पहला लक्षण होती है। इस स्थिति में आयुर्वेदाचार्य हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए जड़ी-बूटी का सेवन करने की सलाह देते हैं।
3. बुखार और इंफेक्शन (Fever and Infections)
आमतौर पर सामान्य तापमान पर नाड़ी की गति 70–80 प्रति मिनट होती है। बुखार होने पर नाड़ी की गति तेज हो जाती है। अगर नाड़ी की गति अक्सर तेज रहती है, तो ये वायरल इंफेक्शन और बुखार का संकेत देती है।
4. थायरॉइड की समस्या (Thyroid Disorders)
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि हाइपरथायरॉइड में नाड़ी तेज और असामान्य रूप से चलती है। हाइपोथायरॉइड में नाड़ी बहुत धीमी और कमजोर रहती है।
5. मधुमेह (Diabetes)
डायबिटीज रोगियों में नाड़ी अक्सर धीमी और भारी लगती है। अगर लंबे समय तक डायबिटीज कंट्रोल न हो तो नाड़ी की लय भी असमान्य हो सकती है।
6. पाचन से जुड़ी परेशानी (Digestive Disorders)
जब किसी व्यक्ति के शरीर में कफ दोष बढ़ जाता है तो नाड़ी भारी हो जाती है। वहीं, पित्त बढ़ने पर नाड़ी गर्म और तेज होती है। इससे पाचन से जुड़ी परेशानियों की जानकारी मिलती है।
7. प्रेग्नेंसी (Pregnancy)
प्राचीन आयुर्वेदाचार्य केवल नाड़ी देखकर ही महिलाओं में प्रेग्नेंसी का पता लगाते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं की नाड़ी छूने पर 2 धडकनें महसूस होती हैं। जबकि सामान्य स्थिति में सिर्फ एक ही धड़कन का पता चलता है।
आयुर्वेद के अनुसार, आमतौर पर सुबह खाली पेट ही नाड़ी देखी जाती है। खाना खाने या नहाने के तुरंत बाद अगर नाड़ी की जांच की जाए, तो इसके गुण और गति बदल जाते हैं। पुरुषों में अधिकतर दायां हाथ और महिलाओं में बायां हाथ देखकर नाड़ी प्रक्रिया को किया जाता है।