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प्रेगनेंसी में घी खाना नहीं है खतरे से खाली, बढ़ सकती हैं समस्याएं, जानें घी खाने के अन्य साइड-इफेक्ट्स

फायदेमंद होने के बाद भी कुछ स्थितियों में घी का सेवन हेल्थ के लिए नुकसानदाक साबित हो सकता है।

प्रेगनेंसी में घी खाना नहीं है खतरे से खाली, बढ़ सकती हैं समस्याएं, जानें घी खाने के अन्य साइड-इफेक्ट्स

Written by Sadhna Tiwari |Updated : November 4, 2022 3:01 PM IST

Side effects of Ghee: हेल्दी फैट्स से भरपूर देसी घी स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन माना जाता है। अपने पोषक तत्वों और प्रभावों की वजह से घी को सुपरफूड (Superfood) भी कहा जाता है। रोजाना घी खाने से लोगों को हेल्दी वेट मेंटेंन (Foods to maintain healthy weight) करने में मदद होती है। इसके साथ ही स्किन भी हेल्दी रहती है। वहीं, कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने के लिहाज से भी घी का सेवन बहुत लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद (Ayurveda) में घी को एक गुणकारी औषधी बताया गया है। वहीं, कई बीमारियों के इलाज के लिए भी देसी घी (Desi Ghee) के साथ उस बीमारी की दवाइयां और नुस्खे मिक्स किए जाते हैं और मरीज को खिलाए जाते हैं। लेकिन, इतना फायदेमंद होने के बाद भी कुछ स्थितियों में घी का सेवन हेल्थ के लिए नुकसानदाक साबित हो सकता है। इस लेख में आप पढ़ेंगे कुछ ऐसी ही बीमारियों और हेल्थ कंडीशन्स के बारे में जिनमें देसी घी का सेवन सावधानी से करने की सलाह दी जाती है या घी से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी जाती है।( Conditions in which one should avoid Ghee in diet in Hindi)

गर्भावस्था में क्यों नहीं खाना चाहिए घी ? (why Ghee is bad for pregnant women)

प्रेगनेंसी में महिलाओं को किसी भी चीज का सेवन बहुत सावधानी के साथ करना चाहिए क्योंकि, इससे उनके स्वास्थ्य और होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रेगनेंसी में महिलाओं को घी (consuming Ghee in pregnancy) नहीं खाना चाहिए। दरअसल, घी का अधिक सेवन करने से मोटापा (obesity) बढ़ सकता है। प्रेगनेंसी में वजन बढ़ने से गर्भवती महिला को प्रेगेनेंसी के दौरान और डिलिवरी के समय भी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इसीलिए, उन्हें घी खाने से बचना चाहिए।

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जिनका डाइजेशन हो खराब उन्हें नहीं खाना चाहिए घी

पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियां काफी कॉमन हैं और लोगों को कभी-कभार ये समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन, कुछ लोगों का डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) काफी कमजोर या सेंसिटिव होता है और ऐसे लोगों को अपने खान-पान पर खास ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है। आयुर्वेद में कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों को घी खाने से मना किया जाता है। क्योंकि, देसी घी से पेट में बनने वाली गैस, इनडाइजेशन और एसिडिटी जैसी समस्याएं गम्भीर हो सकती हैं। इसीलिए, जब भी आपको ये समस्याएं महसूस हों तब घी का सेवन कम कर दें।

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जब कमजोर हो लीवर

लीवर से जुड़ी बीमारियों (Liver diseases) में भी देसी घी खाने से नुकसान पहुंच सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कमजोर लीवर वाले लोग जब देसी घी का सेवन करते हैं तो इससे उनके लीवर को नुकसान पहुंचता है और लीवर को ठीक तरीके से काम करने में भी दिक्कत आती है। इससे, घी को पचा पाना लीवर के लिए मुश्किल हो सकता है जो कई तरह की कॉम्प्लिकेशन्स बढ़ा सकते हैं। इसीलिए, हेपेटाइटिस (Hepatitis) टायफाइड (Typhoid) या लीवर सिरोसिस जैसी बीमारियों से ठीक होने वाले मरीजों को कुछ समय तक घी का सेवन ना करने की सलाह दी जाती है। (Conditions when one should not consume desi ghee)