
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
breastfeeding week
आयुर्वेद में स्तनपान का महत्व सिर्फ बच्चे के लिए नहीं बल्कि मां के लिए भी बहुत है। मेडिकल साइंस भी भी कहावत है कि ब्रेस्टफीडिंग बच्चे के लिए उसके जीवन का सबसे पहला वैक्सीनेशन होता है, क्योंकि उसमें कई अच्छी चीजें और सुरक्षा देने वाले तत्व होते हैं। खास बात यह है कि मां का दूध बच्चे को ठीक उस समय पर वे सारी चीजें प्रदान करता है, जिस समय बच्चे के शरीर को वे चाहिए होती हैं। हर साल अगस्त महीने के पहले हफ्ते को वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस बारे में सही जानकारी व अवेयरनेस फैलाना होता है। हालांकि, इस सप्ताह का उद्देश्य बायोलॉजी के बारे में नहीं बल्कि यह इसके पीछे छिपे ज्यादा मुश्किल और उलझे हुए सवाल के बारे में है। इस लेख का उद्देश्य भी यही जानकारी देना है कि किस स्तनपान मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस बार वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2026 की थीम है Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works, जिसका मतलब है कि स्वस्थ जीवन की शुरुआत के लिए स्तनपान को अपनाएं और बढ़ावा देना। सरल शब्दों में कहें तो इसका मतलब ब्रेस्टफीडिंग को प्राथमिकता देना है। वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक की शुरुआत सन 1992 में 'वर्ल्ड अलायंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन' ने 'वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन' और UNICEF ने मिलकर की थी। हर साल इसके लिए अलग-अलग थीम चुने जाते हैं, ताकि मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्तनपान को प्रोत्साहित किया जा सके।
बच्चे के लिए स्तनपान क्यों जरूरी है इस बारे में ज्यादातर लोगों को पूरी जानकारी नहीं होती है। दरअसल ब्रेस्ट मिल्क कोई बच्चे के लिए कोई सामान्य पोषक पूरक नहीं है, बल्कि इसके पीछे के तथ्य हमारी समझ से कहीं ज्यादा अनोखे हैं। बहुत ही क लोग जानते हैं कि यह कोई एक फॉर्मूला मिल्क नहीं बल्कि हर बार दूध पिलाने के दौरान इसमें मौजूद पोषक तत्वों का कंपोजिशन बच्चे की जरूरत के अनुसार बदलता रहता है। खासकर कोलोस्ट्रम में एंटीबॉडी भरपूर मात्रा में होती हैं, जो सीधे माँ की अपनी इम्यून हिस्ट्री से आती हैं और बच्चे को एक तरह से विरासत में मिली सुरक्षा है में मिलती है।
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शुरुआती महीनों में सिर्फ मां का दूध ही बच्चे को दस्त व संक्रमण जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करता है। क्योंकि इस समय बच्चे के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता न के बराबर होती है और मां के दूध से बच्चे को विरासत में मिली इम्यूनिटी ही बच्चे को इन बीमारियों से बचाव करने में मदद करती है।
आयुर्वेद माता है कि स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिए जरूरी नहीं है बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद जरूरी है। जन्म के समय से ही यह बच्चों के लिए सबसे अच्छा आहार रहा है। शुरुआती महीनों में उनका विकास मां के दूध पर निर्भर करता है और इससे मां-बच्चे के बीच का रिश्ता भी मजबूत होता है। बच्चे के जन्म के मात्र 1 घंटे बाद ही उसे मां के दूध की जरूरत पड़ती है और उसके बाद कम से कम 6 महीने तक उसके जीवन का पालन पोषण सिर्फ मां के दूध पर ही निर्भर रहता है।
हालांकि, स्तनपान सिर्फ 6 महीने तक नहीं बल्कि इसके बाद भी उम्र के हिसाब से बच्चे को अन्य खानपान देना शुरू कर दिया जाता है और साथ ही में लगभग दो साल तक स्तनपान भी जारी रखा जाता है। स्तनपान न मिलने पर ऐसे बच्चों को बीमारी कुपोषण और यहां तक कि मौत का भी खतरा हो सकता है।
आशा आयुर्वेदा विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अुसार आयुर्वेद मां के दूध को बच्चे के लिए अमृत के समान मानता है और शिशुओं के लिए सबसे अच्छा आहार बताया है। यह रस धातु से बनता है जो शरीर को पोषण देने वाला मुख्य ऊतक है। मां के खान-पान, जीवनशैली, भावनात्मक स्थिति और शरीर के दोषों का इस पर असर पड़ता है। इसलिए मां के लिए बहुत जरूरी है कि वे अपना खानपान, मूड और जीवनशैली को अच्छा बनाए रखें ताकि शरीर में दूध का उत्पादन सही होता रहे और बच्चे को पर्याप्त पोषण मिलता रहे।
डिसक्लेमर: मां का दूध बच्चे के जीवन का सबसे पहला पोषण होता है और इसलिए बच्चे का समय-समय पर सही स्तनपान कराना बेहद जरूरी होता है। स्तनपान या फिर मां व बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी के लिए हमेशा किसी हेल्थ एक्सपर्ट्स से संपर्क करें। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और और इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।