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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डायबिटीज के लिए एक पौधे और इससे बनी जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल को कारगर बताया है। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डायबिटीज में चिरायता के उपयोग को कारगर बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया में ऐसे 21000 पौधों को औषधि के रूप में माना है, जिसका इस्तेमाल अलग-अलग बीमारियों में इलाज के दौरान किया जा सकता है। इन्हीं पौधों में चिरायता (chirata for diabetes) भी है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) की मानें तो, चिरायता शुगर की बीमारी में काफी कारगर है और ये शुगर कंट्रोल करने में मददगार है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (world health organization) की मानें तो,चिरायता की पत्तियां, छाल, जड़ और तना सबका सेवन शुगर कंट्रोल करने में मददगार है। इन चीजों के सेवन से शुगर स्पाइक कंट्रोल किया जा सकता है। दरअसल, इनके अर्क में बायो एक्टिव कंपाउंड होते हैं, जो कि हाइपोग्लाइसेमिक असर छोड़ता है और इससे ब्लड में शुगर स्पाइक नहीं बढ़ता है। इस तरह शुगर कंट्रोल करने मेंये काफी कारगर है। इसके अलावा इसके बायो एक्टिव कपांउड पेनक्रिएटिक सेल्स से इंसुलिन के प्रोडक्शन को एक्टिवेट करते हैं और शुगर पाचने में मदद करते हैं। इस तरह ये शुगर में फायदेमंद है।
चिरायता की चाय पीने से ये आपके फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करेगा। इसके अलावा ये आपके पेनक्रियाज के काम काज को तेज करता है, जिससे शुगर पचने में आसानी होती है। तो, सुबह अपनी रेगुलर चाय की जगह इस चाय को पिएं या फिर इसका काढ़ा बना कर पिएं।
चिरायता का पाउडर बना कर गर्म पानी के साथ इसका सेवन करें। ये काफी कारगर तरीके से काम करता है। इस तरह चिरायता का सेवन करने से पेनक्रियाज के सेल्स तेजी से काम करने लगते हैं और शुगर मेटाबोलिज्म को तेज करते हैं। इस तरह ये ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है।
सुबह खाली पेट चिरायता का पानी कई प्रकार से काम करता है। दरअसल, चिरायता शरीर के मेटाबोलिक रेट को तेज करता है और खाना पचाने में मदद करता है। इससे खाना अपने आप पच जाता है जिससे शुगर नहीं बढ़ता, कब्ज की समस्या नहीं होती और आप कई समस्याओं से बचे रह सकते हैं।
तो, डायबिटीज में चिरायता का सेवन करें और अपना शुगर कंट्रोल रखें। साथ ही ये स्किन और लिवर की समस्याओं में भी कारगर है।