नेत्र बस्ती के फायदे: आंखों की हर समस्या का समाधान करती है ये आयुर्वेदिक थेरेपी, पढ़ें एक्सपर्ट की सलाह
Netra Basti Benefits: आंखों की समस्या को दूर करने में नेत्र बस्ती चिकित्सा कैसे है लाभकारी, इसके बारे में यहां हम आपको विस्तार से जानकारी दे रहे हैं.
आंखें हमारे शरीर का सबसे प्रमुख अंग है, यदि हम स्वस्थ आंखों के मालिक हैं, तो हम इस सुन्दर संसार को देख सकते हैं और उसका सुख ले सकते हैं। यदि हमारी आंखें ही स्वस्थ नही हैं तो फिर हम बहुत सारे सुखों से वंचित रह जाते हैं। आयुर्वेद में आंखों को स्वस्थ रखने की एक प्राचीन पद्धति है, जो आंखों की रोशनी में वृद्धि करती है और आंखों को संक्रमित होने से रोकती है। इस आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का नाम है नेत्र बस्ती चिकित्सा। नेत्र बस्ती चिकित्सा (नेत्र तर्पण) आंखों से संबंधित स्वास्थ्य परेशानियों जैसे- आंखों में धुंधलापन, आंखों के निचले हिस्से में सूजन, आंखों में जलन या फिर आंख का रेटिना किसी कारण से प्रभावित हो तो ऐसे में नेत्र बस्ती चिकित्सा सबसे कारगर चिकित्सा साबित होती है।
नेत्र बस्ती चिकित्सा क्या है?
बस्ती कर्म आयुर्वेद चिकिस्ता पद्धति के अंतर्गत आने वाली पंचकर्म का एक हिस्सा है। पंचकर्म में पांच प्रकार की चिकित्सा पद्धति शामिल होती है। जिसमें से बस्ती कर्म पंचकर्म का अहम भाग है। बस्ती कर्म के बहुत सारे उपकर्म भी होते है, जिसमें से नेत्र बस्ती पंचकर्म चिकित्सा का एक उपकर्म है। जो आंखों की देखभाल एवं बेहतरी के लिए विशेष रुप से लाभकारी सिद्ध होता है।
आयुर्वेद में नेत्र बस्ती कैसे की जाती है?
आखों की बीमारियों को रोकने एवं आंखों की रोशनी को अच्छा करने के लिए नेत्र तर्पण (नेत्र बस्ती) एक प्रमुख उपकर्म है। नेत्र बस्ती को किसी प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सक की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। नेत्र तर्पण के अंतर्गत औषधि घी को आंखों में विशेष चिकित्सा उपकारण के द्वारा डाला जाता है। आयुर्वेदिक औषधि घी को डालते समय आंखें खुली होनी चाहिए, जिससे यह सीधा आंखों में पहुंच कर आंखों को आराम दे सके। घी न अधिक गर्म होना चाहिए और न अधिक ठंडा होना चाहिए। औषधि घी डालने के बाद आयुर्वेदिक चिकित्सक आपको आंखें बंद करने और खोलने के लिए बोल सकते हैं।
मरीज की आंखों की बीमारी के अनुसार ही कौन सा औषधि घी आंखों में डालना है यह आपका आयुर्वेदिक चिकित्सक ही निर्धारित करेगा। और कितने समय तक इस औषधि घी को आंखों में डालकर रखना है, यह भी आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक ही बताएगा। वैसे तो सामान्यतः नेत्र तर्पण या नेत्र बस्ती वात दोष को दूर करने के लिए किया जाता है।
नेत्र बस्ती चिकित्सा के अंत में मरीज को नाक से आयुर्वेदिक औषधियों का धुंआ लेने के लिए कहा जाता है, जिससे यदि आपके सिर में किसी प्रकार का भारीपान महसूस होता है, तो वह दूर हो जाता है।
नेत्र बस्ती के बाद कौन-कौन सी सावधानियां रखनी चाहिए?
यदि आपने नेत्र बस्ती ली है, तो आपको निम्नलिखित बातों का पालन करना चाहिए, ताकि नेत्र बस्ती चिकित्सा का पूरा-पूरा लाभ आपको मिल सके।
- नेत्र बस्ती लेने के बाद मरीज को तेज धूप में नहीं निकलना चाहिए।
- मरीज को एक दम पूरा सीधा होकर आकाश की ओर पूरी दृष्टि के साथ नही देखना चाहिए।
- यदि बहुत ही आवश्यक हो तो घर के बाहर जाते समय चश्मे का प्रयोग करें।
- धूल और मिट्टी में जाने से खुद को रोके।
- आंखों को गर्म पानी से नही धोना चाहिए और अधिक तापमान में जाने से खुद को रोकना चाहिए।
आंखों की कौन-कौन सी समस्यों में नेत्र बस्ती चिकित्सा लाभकारी है?
आयुर्वेद की नेत्र बस्ती चिकित्सा आंखों के लिए रामबाण की तरह काम करती है। यह आंखों की निम्नलिखित बीमारियों में बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है।
- आंख की पलकों के बाल यदि गिरने लगे तो ऐसे में नेत्र बस्ती ले सकतें है।
- आंखों में जाले से बनने लगते तब भी नेत्र बस्ती को अपना सकते हैं।
- आंखों में किसी भी प्रकार का संक्रमण जैसे मौसम के बदलाव के कारण आंखें संक्रमित हो जाती है। तो ऐसे में नेत्र बस्ती की मदद ले सकते हैं।
- मोतियाबिंद की समस्या में भी नेत्र बस्ती लाभकारी है।
- यदि आंखों में किसी प्रकार का दोष जैसे निकट दृष्टि दोष या फिर दूर दृष्टि दोष की समस्या है, तो ऐसी समस्या में नेत्र बस्ती आपको आराम पहुंचा सकती है।
- इसके अतिरिक्त यदि आंखों में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नही है, तो आंखों की देखभाल और भविष्य में आंखों की सुरक्षा के लिए भी आप नेत्र बस्ती को ले सकते हैं।
नोट: यह लेख आशा आयुर्वेद केंद्र, राजौरी गार्डेन, नई दिल्ली की आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर चंचल शर्मा से हुई बातचीत पर आधारित है।