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World Kidney Day 2021: बिना ऑपरेशन के भी निकाली जा सकती है गुर्दे की पथरी, जानिए किडनी स्‍टोन का आयुर्वेदिक उपचार

भारत में गुर्दे की पथरी या किड़नी स्टोन की समस्या के आंकड़ो की बात करें तो कुल आबादी का लगभग 15 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। किडनी स्टोन की समस्या गंभीर इसलिए भी हो जाती है, क्योंकि अधिकांश लोगों को इस समस्या की सटीक जानकारी नही होती है।

World Kidney Day 2021: बिना ऑपरेशन के भी निकाली जा सकती है गुर्दे की पथरी, जानिए किडनी स्‍टोन का आयुर्वेदिक उपचार
World Kidney Day 2021: आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट से जानिए किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी का आयुर्वेदिक उपचार

Written by Atul Modi |Updated : March 11, 2021 2:12 PM IST

गुर्दे की पथरी या किडनी स्‍टोन (Kidney Stone) की समस्या से अधिकांश लोग परेशान हैं। आयुर्वेद के अनुसार, किडनी स्टोन की समस्या कम पानी पीने तथा धूल मिट्टी के अधिक संपर्क में रहने से होती है। यदि आप बाजार में रखा हुआ खुला खाने का अधिक सेवन करते हैं तो भी यह समस्या हो सकती है। बाजार में रखे खुले भोज्य पदार्थों में धूल मिट्टी आसानी से मिल जाती है और जब उसका सेवन आप करते है तो वह सीधा आपके पेट में जाती है और पथरी की समस्या बन जाती है।

गुर्दे की पथरी या किडनी स्‍टोन का मतलब है कि जब किडनी या गुर्दे में एक बहुत ही छोटे आकार का पत्थर निर्मित हो जाता है। जिसकी वजह से किडनी में बार-बार असहनीय दर्द होने लगता है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि इस पथरी की वजह से पेशाब मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाता है जोकि बहुत ही घातक है।

किडनी स्‍टोन के प्रकार- Type Of Kidney Stone Or Gurde Ki Pathri

1. स्टूविटा की पथरी (Struvite Stones)

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2. सिस्टिन की पथरी (Cystine Stones)

3. कैल्शियम की पथरी (Calcium Stones)

4. यूरिक एसिड की पथरी (Uric Acid Stones)

किडनी स्‍टोन या गुर्दे की पथरी होने के लक्षण - Signs and Symptoms of Kidney Stones In Hindi

हमारे शरीर में गुर्दा या किडनी एक ऐसा अंग है जोकि बहुत ही महत्वपूर्ण है। किडनी हमारे शरीर के पानी के लेवल और अन्य तरल पदार्थों के स्तर को सुधार करने का कार्य करती है। किडनी के द्वारा ही शरीर के विषैले पदार्थ बाहर किये जाते हैं। गुर्दे में जब पथरी की समस्या हो जाती है तो कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जो स्टोन की समस्या के संकेत देते हैं।

  • पेशाब करते वक्त दर्द होना।
  • पेट तथा पीठ के निचले तल में दर्द।
  • रक्त युक्त पेशाब आना।
  • पेशाब में गंध आना।
  • बार-बार पेशाब करने का मन होना।
  • इन सभी के अतिरिक्त बुखार जैसी भी समस्याएं हो सकती है।

किडनी स्‍टोन या गुर्दे की पथरी होने के कारण - Causes Of Kidney Stone In Hindi

आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट डॉक्‍टर चंचल शर्मा के अनुसार, जब हमारा खानपान तथा जीवनशैली बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है तब हमारे शरीर में बहुत सारी बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है। इन्हीं बीमारियों में से एक है किडनी में स्टोन होना। कई बार तो ऐसा भी होता है कि लोग किडनी स्टोन की सर्जरी तक करवा लेते हैं मगर फिर भी यह ठीक नहीं होता है। कई बार सर्जरी करने वाले डॉक्‍टर भी यह कहते हुए पाए जाते हैं कि, 'सर्जरी के बाद दोबारा पथरी बनने की संभावना है' हालांकि, परेशान होने की आवश्‍यकता नहीं है। आयुर्वेद में इसके कारणों तथा लक्षणों के आधार पर ऐसी औषधियां मौजूद हैं जो प्राकृतिक तरीके से किडनी स्टोन को बाहर निकालने में सक्षम हैं। किडनी स्टोन के कुछ कारण इस प्रकार से हैं:

  • पथरी बनने का मुख्य कारण कम पानी का सेवन करना बताया गया है।
  • यूरीन में केमिकल की मात्रा बढ़ जाना।
  • अधिक मात्रा में जंक फूड तथा फास्ट फूड का सेवन करना।
  • शरीर में खानिज तथा मिनरल की कमी होना।
  • खराब जीवन शैली और व्यायाम की कमी इत्यादि पथरी होने के कारण हो सकते हैं।

गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक उपचार - Ayurvedic Treatment Of Kidney Stone

आयुर्वेद में किडनी स्टोन का सबसे अच्छा उपचार उपलब्ध है। डॉक्‍टर चंचल शर्मा का दावा है कि, आयुर्वेदिक उपचार ऐलौपैथी के मुकाबले बहुत ही कारगर साबित हो रहा है। आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा किडनी स्‍टोन की समस्या से निजात हमेशा के लिए मिल जाता है जबकि ऐलोपैथी में ऐसा बिल्कुल भी नही है। आयुर्वेद सीधा बीमारी की जड़ पर वार करके उसको हमेशा के लिए नष्‍ट कर देता है, जिससे बीमारी के दुबारा होने की संभावना बिल्कुल समाप्त हो जाती है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा किडनी स्टोन को ठीक करने के लिए एक प्राचीन उपचार है, जिसमें एक भी साइड इफेक्‍ट नहीं होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के द्वारा शरीर का शोधन करके उसका शुद्धिकरण कर दिया जाता है, जिससे शरीर के विषाक्‍त पदार्थ शरीर के बाहर आ जाते हैं और पथरी की समस्या से निजात मिल जाती है।

पंचकर्म विधि किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी का उपचार

पंचकर्म चिकित्सा आयुर्वेद का एक अभिन्न अंग है। पंचकर्म चिकित्सा बहुत ही त्वरित और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है जो तुरंत ही बीमारी के कारण तथा लक्षण के आधार पर उसे ठीक करने का कार्य करती है। पंचकर्म चिकित्सा में पांच प्रकार के कर्म होते है। इनमें वमन कर्म, विरेचन कर्म, नस्यम कर्म, बस्ती कर्म और रक्त मोक्षण कर्म शामिल हैं। इन्‍हें ही पंचकर्म चिकित्सा कहा जाता है। पंचकर्म चिकित्सा के इन पांच कर्मों के द्वारा ही मरीज के शरीर की प्रकृति के अनुसार ही उसको इन कर्मों के द्वारा शुद्ध किया जाता है।

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गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन की आयुर्वेदिक औषधि

  • पत्थरचट्टा
  • तुलसी के पत्ते
  • बेलपत्र
  • नीबू और ऑलिव आयल
  • सेब का सिरका इत्यादि

नोट: यह लेख आशा आयुर्वेद सेंटर की आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट डॉक्‍टर चंचल शर्मा से हुई बातचीत पर आधारित है।

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