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कपिंग थेरेपी क्या है, जानिए इसके प्रकार और Cupping Therapy के नुकसान

कपिंग थेरेपी एक ट्रेडिशनल थेरेपी है, जिसके माध्यम से तमाम तरह के गंभीर रोगों का उपचार किया जाता है. कपिंग थेरेपी के दो प्रकार होते हैं, इसके कई फायदे और नुकसान भी हैं.

Written By Atul Modi
Published : July 25, 2022 6:37 PM IST

कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) को हिजमा भी कहा जाता है, यह परंपरागत दवाइयों की एक फॉर्म है जिसमें एक थेरेपिस्ट एक खास तरह के कप को कुछ मिनटों के लिए व्यक्ति की स्किन पर छोड़ देते हैं, ताकि एक सेक्शन क्रिएट हो सके। इस थेरेपी को लेने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। बहुत से लोग इसे दर्द से छुटकारा पाने के लिए, इंफ्लेमेशन से राहत पाने के लिए, ब्लड फ्लो बनाए रखने के लिए और रिलैक्सेशन के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे डीप टिश्यू मसाज के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। यह कप ग्लास, बैंबू, अर्थेन वेयर और सिलिकॉन से बने होते है। यह थेरेपी इस समय बहुत ट्रेंडिंग में है लेकिन यह नई नहीं है। इसे काफी लंबे समय से प्रयोग किया जाता आ रहा है। आइए जानते हैं इस थेरेपी के प्रकार और इसके प्रयोग के बारे में।

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कपिंग थेरेपी के प्रकार - Type Of Cupping Therapy

  • ड्राई और वेट दो तरह की कप थेरेपी मौजूद होती हैं। दोनों प्रकार की थेरेपी में ही आपके थेरेपिस्ट किसी ज्वलनशील पदार्थ जैसे अल्कोहल, हर्ब्स, पेपर आदि को एक कप में रखेंगे और फिर उसमें आग लगा देंगे। जैसे ही फायर बाहर जाती है तो कप को स्किन पर ऊपर से नीचे की ओर रख देते हैं।
  • जैसे ही कप के अंदर की हवा ठंडी होती है, वैसे ही एक वैक्यूम बन जाता है। इससे आपकी स्किन उठने लगती है और ब्लड वेसल्स एक्सपैंड होने लगती हैं। यह कप एक ही जगह पर तीन मिनट के लिए रखा रहता है।
  • इस थेरेपी का एक मॉडर्न वर्जन फायर की जगह रबर पंप का प्रयोग करता है। कई बार थेरेपिस्ट सिलिकॉन कप का प्रयोग करते हैं। इस में मसाज की तरह इफेक्ट पैदा करने के लिए कप को एक जगह से दुसरी जगह पर मूव किया जाता है।
  • वेट कपिंग में कप को तीन मिनट तक के लिए एक ही जगह पर रख कर माइल्ड सक्शन पैदा की जाती है। इसके बाद थेरेपिस्ट कप को रिमूव कर देते हैं और छोटे स्कैलपेल का प्रयोग करते हैं ताकि स्किन पर छोटे छोटे कट बन सकें। इसके बाद वह छोटा सा सक्शन करते हैं ताकि खून की थोड़ी सी मात्रा को निकाला जा सके।
  • आपके पहले सेशन में तीन से पांच कप का प्रयोग किया जाएगा। आप चाहें तो एक कप का प्रयोग कर सकते हैं ताकि यह पता लग सके कि यह कैसा अनुभव रहता है। 5 से 7 कप से ज्यादा का प्रयोग करना बहुत ही कम देखा जाता है।
  • इसके बाद इंफेक्शन कम करने के लिए एंटी बायोटिक ऑइंटमेंट का प्रयोग किया जाता है। आपकी स्किन वापिस पहले की तरह 10 दिन के अंदर होगी।
  • कपिंग थैरेपी के सपोर्टर्स का मानना है कि वेट कपिंग शरीर से हानिकारक सब्सटेंस को निकालने में लाभदायक है। यह ठीक होने में भी मदद करता है।
  • कुछ लोगों को नीडल कपिंग की जरूरत होती है जिसमें पहले थेरेपिस्ट एक्यूपंक्चर नीडल को इंसर्ट करते हैं और फिर उनके ऊपर कप रख देते हैं।

क्या कपिंग थेरेपी का कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं?

कपिंग वैसे तो अधिकतर सुरक्षित ही होती है लेकिन केवल जब तक जब तक आप किसी प्रोफेशनल से यह काम करवाते हैं। आपकी स्किन पर जहां जहां कप प्रयोग किए जायेंगे वहां निम्न साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं :

  • थोड़ा बहुत डिस्कंफर्ट हो सकता है।
  • थोड़ी बहुत स्किन जल सकती है।
  • स्किन पर चोट के निशान आ सकते हैं।
  • स्किन इंफेक्शन भी देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष:  

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अगर आप कपिंग ट्राई करना चाहते हैं तो पहले मन में आने वाले सभी सवालों के बारे में डॉक्टर से पूछ लें। अगर थोड़ा डर लग रहा है तो पहले एक कप का प्रयोग करके देख लें। अगर सूट करती है तो ही आगे बढ़ सकते हैं।

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