नियमित जलनेति करने से ठीक हो जाती है मिर्गी और माइग्रेन जैसी गंभीर समस्याएं, जानिए क्या होती है ये योगिक टेक्नीक

ऐसी कई तकनीकें हैं, जिनकी मदद से शरीर को रोगों से मुक्त करने का दावा किया जाता है. जिसमें से एक तकनीक है जल नेति. जो सांस संबंधित बीमारी को दूर करने में मदद करती है.

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Written By: Atul Modi | Updated : July 19, 2022 8:12 PM IST

जलनेति एक तरह की योग क्रिया है. इसके जरिये नैजल ट्रैक की सफाई के लिए नाक के एक होल से नमक के पानी को अंदर प्रवेश कराया जाता है. और दूसरे होल से पानी को बाहर निकाला जाता है. भारत में पुराने समय से ही योग व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है. और उसी समय से योग की कई क्रियाओं का कई बिमारियों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता रहा है. उन्हीं क्रियाओं में से एक जल नेति योग क्रिया भी है. इससे सांस से जुड़े रोगों को रोकने और दूर करने में मदद मिलती है. इस योग क्रिया से नाक और सांस से जुड़ी बिमारियों और संक्रमण को भी दूर किया जा सकता है.

जलनेति के फायदे - Jalneti Benefits in Hindi

  • जलनेति नाक के रास्ते साइनस और बलगम को हटाने में मदद करता है.
  • सर्दी, साइनसाटिस और एलर्जी से राहत मिलती है.
  • निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी सांस की बीमारी से राहत मिलती है.
  • जल नेति की मदद से कान, आंख और गले से संबंधित परेशानियों को दूर किया जा सकता है.
  • मिर्गी, माइग्रेन जैसी समस्या से भी राहत मिलती है.
  • गुस्सा, चिंता और तनाव भी दूर होता है.

जलनेति करने का सही तरीका

  • बर्तन में नमक का पानी भरे और पीछे की तरफ खड़े हो जाएं.
  • आगे की तरफ झुककर आँखों को बंद करें.
  • सिर को आगे की तरफ झुककर ठुड्डी को ऊपर उठाएं.
  • मुंह से सांस लेते हुए नाक में नौजल डालें.
  • बर्तन का झुकाएं, ताकि पानी नाक में चला जाए.
  • जब आधा पानी दूसरी नाक से गुजरे तो नोजल से पानी निकाल दें.
  • बाएँ नथुने से तेजी से सांस लें और छोड़ें, और ये प्रक्रिया दोहराएं.
  • इस प्रक्रिया को दाएं और बाएं तरफ दोनों ओर से इसे बारी बारी से दोहराएं.

जलनेति क्रिया से जुड़े कई स्वास्थ्य लाभ हैं. इसे करते वक्त सावधानी जरूर बरतें.

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