
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
What Are the Ayurveda Doshas Vata Kapha and Pitta: सनातन काल से भारत में आयुर्वेद को विभिन्न प्रकार की बीमारियों के इलाज में प्रयोग किया जा रहा है। आयुर्वेद केवल “बीमारी का इलाज” नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक कला कहलाता है। आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर और मन का संचालन तीन मूल शक्तियां करती हैं- वात (Vata), पित्त (Pitta) और कफ (Kapha)।
दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और आयुर्वेदिक डॉ. चचंल शर्मा बताती हैं कि आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को त्रिदोष (Tridosha) कहा जाता है। ये तीनों दोष हमारे शरीर में ऊर्जा, पाचन, गतिशीलता, इम्युनिटी, हार्मोन बैलेंस, नींद, वजन और मानसिक स्वास्थ्य तक को प्रभावित करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर पंचमहाभूत (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) से बना है। इन्हीं पंचमहाभूतों के संयोजन से त्रिदोष बनते हैं:
वात = आकाश + वायु पित्त = अग्नि + जल कफ = जल + पृथ्वी
डॉ. चचंल शर्मा बताती हैं कि आयुर्वेद में वात का अर्थ है गति (Movement)। शरीर में जो भी चीज चलती है, वह वात के कारण चलती है। वात शरीर में सांस लेना, ब्लड फ्लो, नसों का काम (Nervous system), शरीर की हर प्रकार की गति (चलना, बोलना, पलक झपकना), मल-मूत्र का निष्कासन और सोचने और फैसले लेने की क्षमता को कंट्रोल करता है।
खानपान, जीवनशैली और मानसिक तनाव के कारण शरीर में वात अधिक होता है, तो व्यक्ति में नीचे बताए गए लक्षण नजर आते हैंः

आयुर्वेदिक डॉक्टर बताते हैं कि पित्त का अर्थ है ऊष्मा/अग्नि (Heat & Transformation)। यह शरीर में पाचन और मेटाबोलिज्म का राजा भी कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, पित्त दोष मुख्य रूप से शरीर में पाचन शक्ति, भूख-प्यास, शरीर का तापमान, हार्मोनल गतिविधियां, खून की गुणवत्ता को कंट्रोल करता है।
पित्त बढ़ने पर शरीर में निम्नलिखित लक्षण नजर आते हैं।
पित्त बढ़ने पर आमतौर पर ये लक्षण दिखते हैं:

कफ का अर्थ है स्थिरता और संरचना (Stability & Structure)। यह शरीर में lubrication, strength और immunity का आधार है। शरीर में कफ का काम मुख्य रूप से शरीर की ताकत और सहनशक्ति, हड्डियों, मांसपेशियों का निर्माण, इम्यून सिस्टम (Ojas) और त्वचा की नमी को कंट्रोल करने का काम करता है।
कफ असंतुलन के लक्षण अक्सर जमाव वाले होते हैं। ये मुख्य रूप से ऐसा जमाव होता है, जिसे अक्सर लोग यूं ही नजरअंदाज करते हैं। इसमें शामिल हैः

डॉ. चंचल शर्मा का कहना है कि आयुर्वेद के अनुसार हमारी सेहत का गणित बहुत सरल है:
दोष संतुलन में = स्वास्थ्य दोष असंतुलन में = बीमारी
त्रिदोष में से एक भी अगर डिस्टर्ब होता है तो बाकी भी प्रभावित होते हैं। इससे शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। इन बीमारियों में कुछ ऐसी भी होती हैं, जिसके लिए आजीवन इलाज, दवाएं और खानपान को संतुलित करने की जरूरत होती है। यही कारण है आयुर्वेद हर व्यक्ति को अपने त्रिदोष संतुलित करने की सलाह देता है। इससे सिर्फ शारीरिक बीमारियों का खतरा नहीं, बल्कि त्वचा और बालों से जुड़ी बीमारियां भी दूर होती हैं।

दिनचर्या का सुधारे- शरीर के त्रिदोष बैलेंस रहे इसके लिए दिनचर्या में सुधार लाना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए रोजाना एक ही समय पर सोए और सुबह जल्दी उठें। सूर्यास्त के बाद किसी भी प्रकार का ठोस भोजन लेने से बचें। नियमित रूप से गुनगुना पानी पिएं। ज्यादा ठंडा या गर्म पानी पीने से बचें।
ऋतुचर्या को अपनाएं- आयुर्वेद कहता है कि ऋतुचर्या को अपनाने से त्रिदोष संतुलित होते हैं। इसका आसान भाषा में अर्थ है, मौसम के अनुसार आपका खानपान होना चाहिए। सर्दियों में जब शरीर का कफ दोष बढ़ता है, तब हल्का भोजन करना चाहिए। गर्मियों में पित्त दोष बढ़ता है, इस दौरान ठंडक देने वाला आहार खाना चाहिए। वहीं, बरसात के मौसम में वात दोष बढ़ता है। इसलिए इस समय में आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए।
डॉक्टर का कहना है कि किसी व्यक्ति के त्रिदोष बिगड़ने का मुख्य कारण है रोजमर्रा की आदतें। आइए जानते हैं कौन सी आदतों के कारण त्रिदोष बिगड़ता है।
आयुर्वेद कहता है- सेहत का मूल मंत्र है संतुलन। वात हमें चलाता है, पित्त हमें ऊर्जा देता है और कफ हमें ताकत एवं स्थिरता देता है। इसलिए इन तीनों का संतुलित रहना बेहद आवश्यक है। किसी भी कारण से आपके त्रिदोष संतुलित नहीं है, तो इस विषय पर आयुर्वेद एक्सपर्ट की सलाह लें।