Migraine Pain Unani Treatment: माइग्रेन के दर्द से रहते हैं अक्सर परेशान तो इन यूनानी तरीकों से मिल सकती है राहत, जानें सिरदर्द से आराम के उपाय

यूनानी चिकित्सा से जुड़ी पुस्तकों में शकिका (Shaqiqa) या माइग्रेन   (migraine) के दर्द से बचने और इससे राहत पाने के कई उपाय सुझाए गए हैं। इन उपायों के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति को उन स्थितियों से बचना चाहिए जो माइग्रेन के दर्द को ट्रिगर करती हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 5, 2022 7:12 PM IST

Migraine Pain Unani Treatment: माइग्रेन का दर्द एक प्रकार का सिरदर्द है जिसमें, सिर में दोनों तरफ या एक तरफ तेज दर्द महसूस होता है। माइग्रेन को अधकपारी भी कहा जाता है क्योंकि, इसमें सिर के एक तरफ तेज दर्द के साथ थ्रोबिंग (throbbing pain) या धकधक जैसा महसूस होता है। माइग्रेन की समस्या शरीर में प्रकृति दोष के असंतुलन की वजह से होती है। यह एक पुरानी बीमारी है जिसके बारे में पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों में भी कई नुस्खे और इलाज सुझाए गए हैं। प्राचीन यूनानी चिकित्सा पद्धति में माइग्रेन के दर्द और इसके उपचार के बारे में विस्तार से लिखा गया है। इस लेख में आप पढ़ेंगे यूनानी पद्धति से माइग्रेन के दर्द की पहचान करने, माइग्रेन की पीड़ा से बचने और इसके उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। (Migraine Pain Unani Treatment In Hindi)

यूनानी चिकित्सा पद्धति में माइग्रेन का इलाज कैसे होता है?

यूनानी चिकित्सा पद्धति में माइग्रेन के दर्द को लम्बे समय तक महसूस होने वाले सिरदर्द की मदद से पहचाना जाता है। यह दर्द  कई बार 2-3 घंटों के लिए रहता है तो वहीं कई बार इसकी परेशानी 18-20 घंटों तक बनी रह सकती है। माइग्रेन के दर्द (Migraine pain) में सिर की नसों में तेज दर्द महसूस होता है और जब दर्द वाले हिस्से या नसों को दबाया जाता है तो दर्द से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। लेकिन, वहीं कुछ लोगों को माइग्रेन में सिरदर्द के साथ-साथ उल्टी और चक्कर आने की समस्या भी होती है। ऐसे में इस समस्या से राहत के लिए (ways to get rid of pain of Migraine) विशेष और सही इलाज की ज़रूरत होती है।आइए जानें माइग्रेन के दर्द से आराम पानेके यूनानी तरीकों के बारे में। (Unani Treatment For Migraine Treatment In Hindi.)

माइग्रेन से बचने के उपाय क्या हैं?

यूनानी चिकित्सा से जुड़ी पुस्तकों में शकिका (Shaqiqa) या माइग्रेन   (migraine) के दर्द से बचने और इससे राहत पाने के कई उपाय सुझाए गए हैं। इन उपायों के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति को उन स्थितियों से बचना चाहिए जो माइग्रेन के दर्द को ट्रिगर करती हैं।

किन स्थितियों में ट्रिगर होता है माइग्रेन ( Migraine Triggers)

माइग्रेन की समस्या को बढ़ाने वाले कई कारण हैं जिनमें कुछ कारण भावनात्मक तो कुछ शारीरिक स्वास्थ्य से भी जुड़े हुए हैं वहीं, हार्मोन्स में असंतुलन, खान-पान से जुड़ी कुछ आदतें और कुछ दवाओं के साइड-इफेक्ट्स के तौर पर भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है।

हार्मोन्स का असंतुलन

महिलाओं कों पीरियड्स के समयहार्मोन्स में बदलाव की स्थिति से गुजरना पड़ता है। जिसके चलते उन्हें माइग्रेन की समस्या (menstrual-related migraines) हो सकती है। आमतौर पर यह दर्द पीरियड्स शुरू होने से 2 दिन पहले या पीरियड्स के 3 दिनों बाद महसूस होता है। वहीं कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के बाद माइग्रेन में सुधार होते देखा गया है। वहीं,कई महिलाओं में यह स्थिति बहुत गम्भीर होते भी देखी गयी है।

भावनात्मक ट्रिगर्स

  • एंग्जायटी या बेचैनी ( Anxiety)
  • डिप्रेशन ( Depression)
  • तनाव (Stress) और चिंता (Tension)
  • किसी तरह का सदमा या आघात
  • बहुत अधिक उत्तेजना

शारीरिक समस्याएं ( Physical triggers)

  • नींद की कमी (sleep deprivation)
  • गलत तरीके से बैठने के कारण होने वाला दर्द
  • गर्दन और कंधे में दर्द (Shoulder and neck pain)
  • नाइट शिफ्ट
  • लो ब्लड शुगर लेवल ( Low blood sugar)
  • कठिन एक्सरसाइज ( Strenuous exercise)

खान-पान से जुड़ी गलतियां( Dietary triggers)

  • कम मात्रा में पानी पीने से शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन (Dehydration)
  • समय पर भोजन ना करना
  • बहुत अधिक चाय या कॉफी का सेवन (Caffeine Intake)
  • शराब पीने की आदत (Alcohol Consumption)
  • कुछ लोगों को डेयरी प्रॉडक्ट्स, चॉकलेट (chocolate) और खट्टे फलों ( citrus fruit) के सेवन के बाद सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।

इन स्थितियों में भी बढ़ सकता है  माइग्रेन Environmental triggers

  • तेज रोशनी (Bright lights)
  • बहुत अधिक समय तक टीवी या कम्यूटर देखना
  • सिगरेट पीने की आदत ( Smoking )
  • तेज संगीत या शोर ( Loud noises)
  • मौसम में बदलाव जैसे अचानक से बहुत अधिक ठंड या गर्मी बढ़ना
  • तीव्र गंध

यूनानी पद्धति से माइग्रेन का इलाज कैसे किया जाता है?

माइग्रेन की तकलीफ से आराम दिलाने के लिए यूनानी चिकित्सा पद्धति में 3 नियमों पर ध्यान दिया जाता है।  जिसमें,

  1. सबसे पहले दर्द के कारण का पता लगाया जाता है
  2. दर्द की गम्भीरता को समझने की ज़रूरत पड़ती है।
  3. दर्द से राहत दिलाने के तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं।

माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति के इलाज से पहले करना चाहिए ये 2 काम

  • मरीज को ठंडे और आरामदायक कमरे में रखें।
  • मरीज को ठंडा पानी पिलाएं और ठंडी पट्टियां लगायी जाती हैं।

रेजिमेंटल थेरेपी या इलाज  बिल तदबीर(Ilaj bil Tadbeer)

रेजिमेंटल थेरेपी (Regimental Therapy) में शरीर में अटके टॉक्सिंस या नुकसानदायक पदार्थों को साफ करने के प्रयास किए जाते हैं। इससे, शरीर के रोग-प्रतिरोधक तंत्र में सुधार होता है और इस तरीके से शरीर को बीमारियों से मुक्त रखने के प्रयास किए जाते हैं। इसे साधारण शब्दों में " बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन ” का एक तरीका माना जा सकता है। रेजिमेंटल थेरेपी में माइग्रेन जैसी बीमारियों में कारगर पायी गयी है। इस प्रकार की थेरेपी में ये स्टेज होते हैं- बीमारियों के साथ, जिनके लिए वे प्रभावी मानी जाती हैं, संक्षेप में नीचे वर्णित हैं:

फ़स्द (Fasd) - इसे वेनेसेक्टिओ या ब्लडलेटिंग (Bloodletting) कहा जाता है। यह दामवी माइग्रेन में अधिक प्रभावी पाया गया है।

इशाल (Ishaal) - यूनानी चिकित्सा पद्धति में आंतों की सफाई पर जोर दिया जाता है। इस तरीके के इस्तेमाल के लिखित नियम हैं जिनका पालन इलाज करने वाले और कराने वाले लोगों को करना पड़ता है। इस पद्धति से मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया प्रभावित होती है। यह बलगम वाले और एसिडिक माइग्रेन की समस्या में कारगर है।

नातूल (Natool) -इस पद्धति में पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर पानी और तेल की एक निश्चित मात्रा का प्रवाह कराया जाता है।

डाइट थेरेपी (इलाज बिल गिज़ा)

  • माइग्रेन के इलाज के लिए इस तरह की डाइट के सेवन की सलाह (Dietary Recommendations) दी जाती है-
  • आधा उबला हुआ अंडा (Half boiled egg) खाएं।
  • आसानी से पचने वाले फूड्स (Easily digestible diet) का सेवन करें।
  • जौ के पानी (Barley water) का सेवन करें।

इन बातों का भी रखें ध्यान

  • इन सबके अलावा यूनानी पद्धति से तैयार की गयी कई दवाओं का सेवन भी माइग्रेन के इलाज के लिए किया जाता है। अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार और उनके मार्गदर्शन में ही किसी भी दवा का सेवन करें।
  • दवाओं के साथ-साथ मरीजों को यूनानी चिकित्सा के सिद्धांतों के आधार पर कड़े अनुशासन का पालन करना पड़ता है। इसीलिए, कभी भी खुद से किसी भी दवा का सेवन ना करें।
  • अपने इलाज के दौरान अपने चिकित्सक के सम्पर्क में रहें और उनके परामर्श के अनुसार ही दवाओं का सेवन करें।

(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई बीमारी और उसके उपार से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)

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