
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : September 2, 2024 4:18 PM IST
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Piles Treatment At Home: आजकल के गलत खानपान और खराब जीवनशैली के कारण बवासीर की समस्या लोगों में आम हो गई है। इस बीमारी में गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की नसों में सूजन हो जाती है। इसके कारण मरीज को मल त्यागने में काफी परेशानी होती है। अगर सही समय पर बवासीर का इलाज न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर लेती है। बवासीर की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप कुछ घरेलू उपायों का सहारा ले सकते हैं। आयुर्वेद में ऐसी कई हर्ब्स हैं, जिनके प्रयोग से आप बवासीर की परेशानियों को दूर कर सकते हैं। इन्हीं हर्ब्स में पान का पत्ता भी शामिल है। जी हां, पान का पत्ता बवासीर के इलाज में काफी प्रभावी हो सकता है। आइए, जानते हैं बवासीर में कैसे फायदेमंद है पान का पत्ता और कैसे करें इसका इस्तेमाल?
आयुर्वेद एक्सपर्ट रितु चड्ढा के मुताबिक, पान का पत्ता औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल शरीर के कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए यह आपके पाचन को दुरुस्त रखता है। साथ ही, यह मल को नरम बनता है, जिससे मल त्यागने में आसानी होती है। इसके अलावा, यह बवासीर में होने वाली सूजन को भी कम कर सकता है। इतना ही नहीं, यह पेट को ठंडक प्रदान करता है और कब्ज की परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है।
बवासीर के लक्षणों को कम करने के लिए आप पान के पत्तों का पानी पी सकते हैं। इसे बनाने के लिए आप एक पैन में एक गिलास पानी लें। इसमें 2-3 पान के पत्ते डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छान लें। इसके बाद इसका सेवन करें। इससे बवासीर की परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पान के पत्तों का पेस्ट प्रभावित हिस्से पर लगाने से सूजन को कम किया जा सकता है। इसके लिए 3-4 पान के पत्तों को पीस लें। अब इस पेस्ट को अपने मलद्वार पर लगाएं और कुछ देर के लिए छोड़ दें। इसे आप दिन में दो बार या फिर 1 बार लगा सकते हैं। लगातार कुछ दिनों तक इसका प्रयोग करने से आपकी परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।