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Written By: Atul Modi | Published : January 4, 2024 3:17 PM IST
डायबिटीज एक ऐसा रोग है जो कई अन्य रोगों को जन्म देता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप इस गंभीर रोग के निदान पर ध्यान दें। आप अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखकर डायबिटीज पर काफी हद तक काबू पा सकते हैं। इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है आयुर्वेद। आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी बूटियां हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के बहुत ही आसानी से डायबिटीज को कंट्रोल करने में मददगार हैं। खास बात ये है कि इनका सेवन करना बहुत ही आसान है। अपनी दिनचर्या में इन्हें शामिल करने से न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई अन्य रोगों को दूर किया जा सकता है। ये जड़ी-बूटियां न्यूरोपैथी, रेटिनोपैथी, नेफ्रोपैथी, दिल के दौरे जैसी कई गंभीर जटिलताओं को रोकने में सक्षम हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. दीक्सा भावसार सावलिया ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इन 3 जादुई जड़ी-बूटियों के बारे में बताया है।
सदापुषा को सदाबहार भी कहा जाता है। इस खूबसूरत पौधे को आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। सही तरीके से इसका सेवन करने से मधुमेह रोग जड़ से खत्म हो सकता है। सदाबहार से इंसुलिन उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। जिसकी मदद से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है। इसी के साथ यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी मजबूत करता है। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। सदापुषा की जड़ों का चूर्ण आपको आसानी से बाजार में मिल जाता है। रोज सुबह इस आधा चम्मच चूर्ण का सेवन आप गुनगुने पानी से करें। आपको कुछ ही समय में इसका असर दिख सकता है।
मेषश्रृंगी को आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण जड़ी बूटी माना गया है। इसे गुड़मार के नाम से भी जाना जाता है। मेषश्रृंगी के नियमित सेवन से शरीर में इंसुलिन का स्राव बढ़ता है। साथ ही यह अग्न्याशय की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है, जिससे स्वस्थ ग्लूकोज के उपयोग के लिए जिम्मेदार एंजाइमों की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और शर्करा के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। यह मांसपेशियों और लीवर में ट्राइग्लिसराइड के संचय को रोकने में भी मददगार है। इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है। यह पीसीओएस को भी नियंत्रित करता है।
विदारीकंद अपने एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुणों के कारण डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने का काम करता है। साथ ही अग्न्याशय कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को भी रोकता है, जिससे इंसुलिन स्राव और संवेदनशीलता में वृद्धि होती है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और हृदय संबंधी कई रोगों को भी सुधारता है। इस जड़ी-बूटी से कई रोगियों को इंसुलिन और यहां तक कि मेटफॉर्मिन की खुराक कम करने में मदद मिली है।
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