बालों को नैचुरली ब्लैक करने के साथ स्कैल्प की बीमारियों को खत्म कर देते हैं ये 2 आयुर्वेदिक नुस्खे, एक्सपर्ट से जानिए फायदे

How to Make Hair Black Naturally Without Dye: बालों को प्राकृतिक रूप से रंग प्रदान करने और स्कैल्प की समस्याओं से छुटकारा पाने के यहां 2 आयुर्वेदिक तरीके सुझाए गए हैं.

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Written By: Atul Modi | Published : November 20, 2021 1:15 PM IST

हेयर डाई और हेयर कलर एक अरब डॉलर का उद्योग है और अक्सर कई लोगों को उन रंगों से एलर्जी होती है। वहीं, कुछ लोगों को ठीक न होने वाले अल्सर हो जाते हैं जो महीनों तक परेशान करतें हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अपर्णा पद्मानाभन (BAMS, MD, PHD Ayurveda) बताती हैं कि, उनकी 50 वर्ष की उम्र की एक महिला पेशेंट कई वर्षों से हेयर डाई का उपयोग कर रही थी, नतीजतन उनके स्कैल्प पर एक गैर-उपचारात्मक अल्सर विकसित हो गया जो बार-बार एंटीबायोटिक दवाओं और स्टेरॉयड क्रीम के प्रयोग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। लेकिन अच्छी बात यह है कि डॉ. अपर्णा बताती है कि आयुर्वेद में बालों को डाई करने के लिए कई नैचुरली उपाय मौजूद हैं। इस लेख में हम आपको डॉ. अपर्णा के बालों को कलर करने के लिए सुझाए कुछ ऐसे नेचुरल तरीकों के बारे में बता रहें है जो बिना किसी नुकसान के आपको बालों को एक प्राकृतिक रंग प्रदान करने के साथ ही, आपको बालों और स्कैल्प के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मदद करेंगे।

हेयर डाई आपके बालों और स्कैल्प को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?

बालों को रंगने वाले उत्पादों में कई ऐसे तत्व होते हैं जो त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं और एलर्जी का कारण बन सकते हैं। हेयर डाई के संपर्क में आने से होने वाले एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस के अधिकांश मामले राफेनिलेनेडियम (PDP) नामक एक घटक के कारण होते हैं। PDP एक रसायन है जो अस्थायी टैटू वाली स्याही, प्रिंटर की स्याही और गैसोलीन में भी पाया जाता है। बॉक्सिंग हेयर डाई में, PDP आमतौर पर ऑक्सीडाइज़र के साथ अपनी बोतल में आता है। जब दोनों को एक साथ मिलाया जाता है, तो पीपीडी आंशिक रूप से ऑक्सीकृत हो जाता है। यह तब होता है जब इसके प्रति संवेदनशील लोगों में एलर्जी की प्रतिक्रिया होने की संभावना होती है।

यहां है बालों को कलर करने का नैचुरल तरीका - Here is The Natural Way to Color Hair

1. मेंहदी (Mehndi / Henna)

मेंहदी बालों को रंगने का एक हजारों साल पुराना टेस्टेड नुस्खा है। मेंहदी मडायंतिका (लॉसोनिया इनर्मिस लिन) से बनी एक डाई है जो कि एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है; जिसका उपयोग बुखार, डायसुरिया (Dysuria), पीलिया, अल्सर, रक्तस्राव विकारों और त्वचा रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। मेंहदी का उपयोग त्वचा, बालों और नाखूनों के साथ-साथ रेशम, ऊन और चमड़े सहित कपड़ों को रंगने के लिए भी किया जाता है।

सूखे या हरे पत्तों के इस पाउडर का एक पेस्ट बनाया जाता है और पारंपरिक रूप से हर महीने एक या महीने में दो बार स्कैल्प और बालों पर लगाया जाता है, जो भूरे बालों, अनिद्रा और खुजली वाली खोपड़ी से राहत पाने में मदद करता है। यह बालों को एक सुंदर भूरा रंग प्रदान करता है।

2. नीलिनी (Neelini)

नीलिनी को इंडिगो या इंडिगोफेरा टिनक्टोरिया भी कहा जाता है। इसका उपयोग बुखार, लीवर और स्प्लीन डिसऑर्डर (Spleen Disorders), गठिया, गाउट और भूरे बालों के विकास के उपचार के लिए किया जाता है।

यह एक प्राकृतिक हेयर डाई है जो बालों को नेचुरली काला कर देती है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देने और बालों के सफेद होने से बचाने वाले तेलों में एक मुख्य और टेस्टेड घटक है।

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