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दुनियाभर में 836 मिलियन से ज्यादा लोग हैं वॉर्म इंफेक्शन के खतरे में, आयुर्वेद में है डीवॉर्मिंग का रामबाण इलाज

कुछ सावधानियों के साथ ही आयुर्वेद की मदद से डिवर्मिंग में मदद मिल सकती है। आयुर्वेद में ऐसे कई उपचार हैं, जिनसे शरीर से इन कीड़ों को खत्म करके बाहर निकाला जा सकता है।

दुनियाभर में 836 मिलियन से ज्यादा लोग हैं वॉर्म इंफेक्शन के खतरे में, आयुर्वेद में है डीवॉर्मिंग का रामबाण इलाज

Written by Atul Modi |Updated : April 27, 2024 7:41 AM IST

वॉर्म इंफेक्शन बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा है। दुनियाभर में करीब 836 मिलियन मासूम बच्चों को पैरासाइट वॉर्म इंफेक्शन का खतरा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 1 से 14 साल के करीब 241 मिलियन बच्चों की आंतों में कीड़े यानी सॉयल ट्रांसमिटेड हेलमिंथ होने का खतरा है। ऐसे में डीवॉर्मिंग की ओर ध्यान देना बेहद जरूरी है। कुछ सावधानियों के साथ ही आयुर्वेद की मदद से डिवर्मिंग में मदद मिल सकती है। आयुर्वेद में ऐसे कई उपचार हैं, जिनसे शरीर से इन कीड़ों को खत्म करके बाहर निकाला जा सकता है। खास बात ये है कि ये जड़ी-बूटियां बहुत ही आसानी से हमारे घर में ही उपलब्ध हो जाती हैं और उनका उपयोग भी बेहद आसान है।

ये जड़ी-बूटियों करेंगी डिवर्मिंग का काम

रसोई में उपलब्ध ये जड़ी-बूटियां डिवर्मिंग में आपकी मददगार हो सकती हैं।

1. लहसुन: लहसुन में एंटी-पैरासिटिक गुण होते हैं जो कृमि यानी वॉर्म को मारने में मदद करते हैं। लहसुन को कच्चा खाया जा सकता है या भोजन में भी लहसुन डालकर खाया जा सकता है। इसके कई हेल्थ बेनिफिट हैं।

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2. अदरक: अदरक भी डीवॉर्मिंग के लिए एक प्रभावी उपाय है। इसे कच्चा खाया जा सकता है, अदरक की चाय बनाकर भी पी सकते हैं। इसी के साथ अदरक को भोजन में मिलाया जा सकता है।

3. हल्दी: हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो वॉर्म इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। इसे दूध में मिलाकर पी सकते हैं या भोजन में मिलाया जा सकता है। सुबह खाली पेट हल्दी का पानी पीने से भी फायदा होता है।

4. अनारदाना: अनारदाना में डीवॉर्मिंग के गुण होते हैं जो वॉर्म को मारने में मदद करते हैं। इसके लिए आप अनारदाने को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।

5. करौंदा: करौंदे को आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना जाता है। करौंदे के रस में डीवॉर्मिंग के गुण पाए जाते हैं। आप ताजे करौंदों को पीसकर उसका रस निकालें और इसे दिन में दो बार एक-एक चम्मच पिएं। इससे आपको फायदा मिलेगा।

6. त्रिफला: त्रिफला को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना गया है। इसमें एंटी-पैरासिटिक, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं जो वार्म इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। इसे पानी में उबालकर चाय बनाकर पी सकते हैं। आप एक टीस्पून त्रिफला पाउडर को पानी के साथ खा भी सकते हैं।

7. नीम: नीम की पत्तियां पेट के ​कीड़ों से राहत पाने का प्रभावी उपाय हैं। इन पत्तियों को पानी में उबालकर चाय बनाकर पी सकते हैं। आप नीम की पत्तियों का पाउडर बनाकर खा भी सकते हैं।

8. लौंग: लौंग हर भारतीय रसोई का महत्वपूर्ण मसाला है। इसे आयुर्वेद में भी औषधि का दर्जा प्राप्त है। लौंग में एंटी-पैरासिटिक और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो वॉर्म इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। इन्हें चबाकर खा सकते हैं या पानी में उबालकर चाय बनाकर पी सकते हैं।

9. पुदीना: पुदीने की पत्तियां न सिर्फ पेट को ठंडक देती हैं, बल्कि ये वॉर्म इंफेक्शन से भी मुक्ति दिलाने का काम करती हैं। मिंट टी पीकर आप वॉर्म की परेशानी दूर कर सकते हैं। आजकल पुदीने की पत्तियों का अर्क भी आसानी से मिलता है, आप उसका भी उपयोग कर सकते हैं।

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10. नमक का पानी : नमक हर घर में आसानी से मिल जाता है। खाने का स्वाद बढ़ाने वाला नमक वॉर्म इंफेक्शन से भी राहत दिलाता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी में चौथाई चम्मच मिलाकर इसे पिएं, इससे कीड़े अपने आप बाहर निकल जाते हैं। दिन में दो से तीन बार आप इस पानी का सेवन करें।

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