PCOD और ट्यूबल ब्लॉकेज के बावजूद टीना बनीं मां, आंखों में आंसू दिला देगी इनकी कहानी

आज की लाइफस्टाइल में प्रेग्नेंसी कंसीव करना कई कारणों से असंभव हो गया है। कुछ ऐसी ही परेशानी से जूझ रही थीं टीना। आइए जानते हैं इनकी कहानी।

PCOD और ट्यूबल ब्लॉकेज के बावजूद टीना बनीं मां, आंखों में आंसू दिला देगी इनकी कहानी
VerifiedVERIFIED By: Dr. Chanchal Sharma

Written by Ashu Kumar Das |Published : October 29, 2025 3:07 PM IST

मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे बड़ा सुख होता है। लेकिन जब किसी महिला को डॉक्टर कहते हैं कि “अब आपके मां बनने की संभावना बहुत कम है,” तो यह सुनना दिल तोड़ देने वाला होता है। ऐसी ही कहानी है टीना की। टीना एक हाउसवाइफ हैं और काफी लंबे समय से मां बनने का सपना देख रही थीं। लेकिन ट्यूबल ब्लॉकेज (Tubal Blockage) और पीसीओडी (PCOD) जैसी परेशानियां उनकी राह में पहाड़ की तरह खड़ी थी।

बच्चे की आंस में निकले आंख से आंसू

दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी टीना की शादी 27 साल की उम्र में हुई थी। शादी के शुरुआती दो साल हंसी-खुशी बीते, लेकिन जब बच्चे की बात आई, तो मुश्किलें शुरू हो गईं। हर महीने अंजू और उसके पति को निराशा हाथ लगती। टेस्ट करवाने के बाद डॉक्टर ने बताया कि टीना के दोनों फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हैं और साथ ही आपको पीसीओडी भी है। यह सुनकर अंजू की आंखों में आंसू आ गए। उसे लगा जैसे किसी ने उसकी पूरी दुनिया छीन ली हो।

क्या है ट्यूबवेल ब्लॉकेज और पीसीओडी?

दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और फर्टिलिटी डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, जब महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब वो रास्ता होती हैं जिनसे अंडाणु (egg) गर्भाशय तक पहुंचता है। अगर ये रास्ता किसी कारण से ब्लॉक (Kya hota hai Tuble Blockage) हो जाए, तो महिलाओं के लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं को ट्यूबवेल ब्लॉकेज की परेशानी एंडोमेट्रियोसिस और पहले हुए गर्भपात की वजह से हो सकती है। वहीं, पीसीओडी की बात करें तो ये एक हार्मोनल डिसऑर्डर है जिसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जिससे अंडाणु बनना और निकलना मुश्किल हो जाती है। डॉ. चंचल शर्मा बताती हैं कि पीसीओडी और ट्यूबवेल ब्लॉकेज दोनों ही स्थितियों में महिलाओं को प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी होती है।

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हार्मोनल इंजेक्शन और दवाओं का लिया सहारा

हमारे साथ अपनी कहानी शेयर करते हुए टीना बताती हैं कि मां बनने के लिए उन्होंने कई डॉक्टरों से अपना इलाज करवाया। उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन दिए गए, दवाइयां बदली गईं, लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। एक दिन टीना को डॉक्टर ने कहा कि उनके पास मां बनने का एक ही रास्ता है आईवीएफ। पर IVF का खर्च लाखों में था। टीना और उसके पति आईवीएफ पर पैसे खर्च करने की स्थिति में नहीं थे। इलाज, दवाओं के साथ हर गुजरते महीने के साथ टीना का आत्मविश्वास टूटता गया। उसे लगने लगा कि शायद वह कभी मां नहीं बन पाएगी।

आयुर्वेद की मदद से बनीं मां

एक दिन टीना की एक सहेली ने कहा, क्यों न एक बार आयुर्वेदिक इलाज ट्राई करो? मैंने सुना है इससे ट्यूबल ब्लॉकेज और पीसीओडी दोनों ठीक हो सकते हैं। शुरुआत में टीना को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उसने कई महिलाओं की कहानियां सुनीं जिन्होंने आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के जरिए प्रेग्नेंसी कंसीव की, तो उसके मन में उम्मीद की नई किरण जागी। टीना और उनके पति ने डॉ. चंचल शर्मा से कंसलटेंट किया।

आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से मां बनीं टीना

डॉ. चंचल शर्मा बताती हैं कि जब टीना उनके पास आईं तब वह परेशान थीं। इसके बाद उन्होंने पंचकर्म, खानपान में बदलाव करने और जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह दी। उन्हें नियमित रूप से 30 मिनट वॉक करने की सलाह दी गई। सोने का समय निश्चित किया गया ताकि टीना देर रात तक न जागे और सुबह भी समय से उठ जाए। बाहर का खाना खाने से मना कर दिया गया और स्ट्रेस कम करने के लिए योग व प्राणायाम करने की सलाह दी गई। कुछ महीनों के आयुर्वेदिक इलाज  के बाद उनकी ट्यूब खुल गई और उन्होंने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण किया और 9 महीने बाद एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया।

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टीना कहती हैं कि आयुर्वेद से इलाज के बाद मां बनने पर मैंने जाना है कि सब कुछ संभव है। टीना की कहानी बताती है कि आयुर्वेद सिर्फ इलाज नहीं, जीवन जीने की पद्धति है। यह शरीर, मन और आत्मा तीनों का संतुलन बनाकर प्रेग्नेंसी कंसीव करने की संभावना को बढ़ाती है। अगर आपको भी टीना की तरह किन्हीं कारणों से प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी आ रही है, तो घबराए नहीं बल्कि उम्मीद को बनाकर रखें।