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Medically Verified By: Dr. Himanshu Singh
tridosha balance (AI generated image)
वात, पित्त और कफ ये तीन दोष आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर और स्वास्थ्य से बेहद करीब से जुड़े होते हैं, जिन्हें त्रिदोष कहा जाता है। आयुर्वेद कहता है कि इनका सही संतुलन होना बहुत जरूरी है और अगर किसी कारण से उनका संतुलन बिगड़ जाता है तो स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है। इनमें से हर दोष का संतुलन बिगड़ने से स्वास्त्य से जुड़ी अलग-अलग समस्याएं होने लगती हैं। आयुर्वेद व पंचकर्म विशेषज्ञ डॉक्टर हिमांशु सिंह ने बताया कि जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर कुछ संकेतों के माध्यम से अपनी स्थिति व्यक्त कर सकता है। इन संकेतों को समझकर आहार और जीवनशैली में उचित बदलाव करना स्वास्थ्य-संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इस लेख में हम इसी बारे में कुछ खास जानकारियां लेने वाले हैं।
वात दोष हमारे शरीर के तीनों दोषों में से एक है, जिसका संबंध शरीर की गति, संचार और तंत्रिकाओं से होता है। जब किसी कारण से वात दोष का संतुलन बिगड़ता है, तो उससे कुछ समस्याएं पैदा होने लगती हैं जैसे
वात दोष के असंतुलन से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए इसे नियमित रखना बेहद जरूरी है। इसे संतुलित रखने के लिए नियमित दिनचर्या को सही बनाए रखना जरूरी है जैसे -
इसके अलावा अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी ज्यादा समस्याएं हो रही हैं, तो उसके लिए समय रहते किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर से दिखाया जा सकता है। आयुर्वेद के चिकित्सक आपके स्वास्थ्य की जांच करेंगे और आपके शरीर की जरूरत के अनुसार आपको औषधियां देंगे।
आयुर्वेद के अनुसार अगर आप बीमार पड़ने से बचना चाहते हैं, तो पित्त दोष संतुलन होना जरूरी है। पित्त दोष का संबंध मुख्य रूप से पाचन क्रिया, चयापचय (मेटाबॉलिज्म) क्रिया और शरीर के तापमान से होता है। इसलिए जब किसी व्यक्ति का पित्त दोष प्रभावित होता है तो उसे ज्यादा गर्मी लगती है, बार-बार एसिडिटी, ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा पसीना आना, त्वचा में लालिमा और ज्यादा गुस्सा आना आदि लक्षण देखे जा सकते हैं।
पित्त दोष असंतुलन से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए इसको मैनेज करना बेहद जरूरी है। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है -
शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए कफ दोष को संतुलित रखना भी बेहद जरूरी है। आयुर्वेद मानता है कि अगर किसी कारण से शरीर में कफ दोष असंतुलित हो जाता है, तो इससे स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है जिनमें निम्न शामिल है -
जरूरत से ज्यादा कफ होना आमतौर पर स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है और इन समस्याओं से बचने के लिए कफ दोष का संतुलित रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए -
स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या या लक्षण कई अलग-अलग कारणों से विकसित हो सकते हैं और इसलिए केवल गैस, जलन, सुस्ती या किसी अन्य एक लक्षण के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सा दोष निश्चित रूप से बढ़ा हुआ है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में प्रकृति, विकृति, आहार, दिनचर्या, ऋतु, आयु और अन्य लक्षणों का समग्र मूल्यांकन किया जाता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप दोषों के असंतुलन के बारे में जरूरी जानकारी रखें।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है, जिसमें यह बताया गया है कि आयुर्वेद के अनुसार कई बार बार-बार होने वाला कोई लक्षण शरीर के अंदर किसी दोष के असंतुलित होने के कारण भी हो सकता है। इस लेख में दी गई कोई भी जानकारी किसी भी समस्या के इलाज के लिए नहीं है और Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।