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Receding Gums Treatment: मसूड़ों में ढीलापन का कारण हैं ये 7 बीमारियां, इन 3 आयुर्वेदिक तरीकों से कर सकते हैं उपचार

Ayurvedic Treatment For Receding Gums: मसूड़ों में ढीलापन एक आम समस्या है, जो 30 वर्ष की उम्र के बाद के लोगों में ज्यादा दिखाई देता है। इस लेख में हम आपको डॉ. अपर्णा द्वारा सुझाए गए 3 आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बता रहे हैं।

Written By Atul Modi
Published : November 23, 2021 5:27 PM IST

मसूड़ों में ढीलापन, जिसे मेडिकल टर्म में रिसीडिंग गम्स (Receding Gums) कहते हैं। यह बहुत ही आम समस्या है, खासकर यह उम्र के साथ बढ़ती है। रिसीडिंग गम्स, वह प्रक्रिया है जिसमें मसूड़े के टिश्यू जो आपके दांतों की रक्षा और सुरक्षा करते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं। जैसे ही यह आपकी मसूड़े की रेखा को पीछे खींचती है, यह आपके दांतों और उनकी जड़ों को बैक्टीरिया और चोट के संपर्क में छोड़ देती है। इस स्थिति में मसूड़े पीछे की तरफ जाने लगते हैं जिस तरह आपके बालों के साथ होता है कि आपके हेयरलाइन पीछे की तरफ जाने लगती है और नतीजतन माथा चौड़ा होने लगता है इस स्थिति में ठीक वैसे ही कुछ आपके दांतों के साथ भी होता है।

अध्ययनों की मानें तो 30 से अधिक उम्र वाली अमेरिका की आधी से अधिक आबादी किसी न किसी स्तर पर मसूड़ों में ढीलेपन या फूलने का अनुभव करती है। हालांकि, यह आपकी किशोरावस्था से ही शुरू हो सकता है। ऐसे में सिर्फ केवल शुरुआती रोकथाम ही आपको स्वाभाविक रूप से घटते मसूड़ों के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में मदद कर सकती है। यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो मसूड़ों में यह ढीलापन दांतों की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ अपर्णा पद्मानाभनी (BAMS, MD, PhD Ayurveda) बताती हैं कि कुछ आयुर्वेदिक उपचार मसूड़ों में ढीलेपन या रिसीडिंग गम्स की समस्या से राहत पाने में बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।

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आइए पहले जानते हैं रिसीडिंग गम्स के क्या कारण हैं?

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (एडीए) के अनुसार, निम्नलिखित कारणों से मसूड़ों में ढीलेपन की समस्या हो सकते हैं:

  1. मसूड़ों की बीमारी, या पेरियोडोंटाइटिस
  2. दांतों को बहुत जोर से ब्रश करना या कड़े ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करना
  3. मसूड़ों में चोट
  4. पार्शियल डेन्चर (Partial Dentures) पहनना जो ठीक से फिट न हों
  5. दांतों की प्रमुख जड़ों या मांसपेशियों में लगाव होना।
  6. धूम्रपान या किसी तंबाकू उत्पाद का उपयोग करना
  7. आनुवंशिकी

यहां है रिसीडिंग गम्स का आयुर्वेदिक उपचार

1. कुल्ला करें

इसके लिए आप 1 चम्मच आंवला पाउडर को 100 ml पानी में उबालें या फिर आप 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को 100ml पानी में उबाल लें और इससे कुल्ला करें। ऐसा दिन में तीन बार करें।

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2. इन सामग्रियों को चबाएं

चबाने के लिए नीम का तना, आम का तना, मुलेठी की जड़ का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही आम के ताजे पत्तों को भी चबाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। चबाना, थूकना और कुल्ला करना, दिन में 3 बार करें।

3. ऑयल पुलिंग

इसके लिए इरिमेदादि तेल या तिल के तेल का उपयोग करें, और दिन में दो बार 3-5 मिनट के लिए ऑयल पुलिंग करें। यदि यह प्रभावी नहीं होता है, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में निर्धारित समय के अनुसार ऑयल पुलिंग को चिकित्सीय प्रक्रिया के रूप में किया जाना चाहिए।

यह भी ध्यान रखें

अध्ययनों से पता चला है कि ये अभ्यास संयोजी ऊतक (Connective Tissue) के उपचार और विकास का समर्थन करते हैं, साथ ही प्लाक इंडेक्स (Plaque Index) में कमी, संशोधित जिंजिवल स्कोर में समर्थन करते हैं। प्लाक में मौजूद एरोबिक सूक्ष्मजीवों की कुल गिनती मसूड़ों की सूजन को प्रेरित करती है। यदि ये अभ्यास काम नहीं करते हैं, तो आपको आयुर्वेद हर्बल फॉर्मूलेशन और विशेष प्रक्रियाओं की आंतरिक रूप से आवश्यकता हो सकती है जो निश्चित रूप से आपकी मदद कर सकती हैं।

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