IVF नहीं, आयुर्वेद ने दी मातृत्व की सौगात, दिल को छू लेने वाली है प्रतिमा की प्रेग्नेंसी जर्नी की कहानी

प्रतिमा और उनके पति पेरेंट्स बनने की चाह लेकर कई बार डॉक्टर के पास गए। डॉक्टरों ने बताया कि प्रतिमा का AMH काफी लो है और उनकी एग क्वालिटी भी प्रेग्नेंसी कंसीव करने के लिए उपयुक्त नहीं है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : November 10, 2025 5:22 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma

मां बनना और अपने आंगन में बच्चे की किलकारी का गूंजना हर लड़की का सपना होता है। लड़कियों के लिए मां बनना सिर्फ एक एहसास नहीं है, जिसे शब्दों में बयां किया जा सके। लेकिन जब यही सपना अधूरा रह जाए, तो जिंदगी जैसे थम-सी जाती है। प्रतिमा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी - एक लंबा संघर्ष, टूटे हुए सपने, और फिर आयुर्वेद की राह से मिली नई उम्मीद। दिल्ली की रहने वाली प्रतिमा की शादी को काफी समय हो चुका था। शादी के बाद कुछ समय तक तो सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन जब बच्चे की बात आई, तो बार-बार नाकाम कोशिशों ने उनके चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे छीन ली।

प्रतिमा और उनके पति पेरेंट्स बनने की चाह लेकर कई बार डॉक्टर के पास गए। डॉक्टरों ने बताया कि प्रतिमा का AMH काफी लो है और उनकी एग क्वालिटी भी प्रेग्नेंसी कंसीव करने के लिए उपयुक्त नहीं है। इतना ही नहीं प्रेग्नेंसी कंसीव करने के लिए प्रतिमा के पति की रिपोर्ट्स में भी कुछ दिक्कतें थीं। जिसकी वजह से उन्हें नेचुरल तरीके से प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी आ रही थी।

सोशल मीडिया पोस्ट से मिली उम्मीद

कई सारे डॉक्टर और इलाज के बाद प्रतिमा मानसिक और शारीरिक तौर पर थक चुकी थीं। फिर एक दिन सोशल मीडिया पर प्रतिमा की नजर एक पोस्ट पर पड़ी- "आयुर्वेदिक उपचार से संतान प्राप्ति संभव है।" शुरू में उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन फिर उन्होंने सोचा, इतनी कोशिशें कर लीं, एक बार यह भी सही।

आयु्र्वेदिक इलाज से मिली उम्मीद

सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिमा दिल्ली के आशा आयुर्वेदा के क्लीनिक पहुंची और डॉ. चंचल शर्मा से इलाज शुरू करवाया। प्रतिमा की परेशानी को देखते हुए डॉ. चंचल शर्मा ने जीवनशैली, खानपानऔर नींद का गहराई से विश्लेषण किया। हमारे साथ खास बातचीत के दौरान डॉ. चंचल शर्मा ने बताया कि जब प्रतिमा उनके पास इलाज के लिए आई थीं, तब उनका AMH काफी कम था। सिर्फ प्रतिमा ही नहीं उनके पति की सेहत के साथ भी समस्याएं थीं।

आयुर्वेद से इलाज के बाद बनी मां

डॉक्टर ने प्रतिमा के लिए खास पंचकर्म थेरेपी, योग, खानपान और जीवनशैली के लिए प्लानिंग तैयार की। सुबह उठते ही गुनगुना पानी और त्रिफला चूर्ण, फिर हल्का योग और खानपान में बदलाव करने की सलाह दी गई। साथ ही उन्हें कहा गया कि टीवी या मोबाइल पर देर रात तक न बैठें और मानसिक तनाव से दूर रहें। प्रतिमा ने पूरे समर्पण से इस दिनचर्या को अपनाया।

तीन महीनों में उन्होंने अपने अंदर बदलाव महसूस किया - शरीर हल्का लगने लगा, चेहरे पर चमक लौट आई, और सबसे बड़ी बात, उनका मन फिर से सकारात्मक हो गया।

उम्मीद की किरण

आयुर्वेद से इलाज के बाद सिर्फ 3 से 4 महीने में प्रतिमा को अपने शरीर में बदलाव नजर आए और फिर एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि उनके पीरियड्स काफी लेट हो चुके हैं। मन में डर रखते हुए प्रतिमा ने प्रेग्नेंसी टेस्ट किया। और उस दिन की खुशी शब्दों में नहीं कही जा सकती। टेस्ट पॉजिटिव था।

वह दौड़ती हुई अमित के पास गईं, और दोनों की आंखों से सिर्फ खुशी के आंसू बह निकले। 3 सालों की जद्दोजहद, टूटे सपनों और दर्द के बाद आखिरकार उनकी गोद भरने वाली है। प्रतिमा आज 3 महीने प्रेग्नेंट हैं और जल्द ही अपने घर में खुशियां आने का इंतजार कर रही हैं।

आज प्रतिमा अपनी बेटी के साथ हर महिला के लिए प्रेरणा बन गई हैं। वह कहती हैं- IVF या आधुनिक इलाज गलत नहीं हैं, लेकिन हर शरीर की अपनी प्राकृतिक शक्ति होती है। अगर आप उसे संतुलित करें, तो प्रकृति खुद अपना रास्ता दिखाती है। वह अब उन महिलाओं की मदद करती हैं, जो इन्फर्टिलिटी से जूझ रही हैं, और बताती हैं कि कैसे आयुर्वेद सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।

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