आयुर्वेद की किस थेरेपी से हो सकता है इनफर्टिलिटी का इलाज? एक्सपर्ट्स से जानिए

Ayurveda panchakarma therapy: आजकल स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं इतनी ज्यादा बढ़ने लगी हैं, जिसके कारण गर्भधारण में भी कई समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में आयुर्वेद पंचकर्म थेरेपी काफी काम आ सकती है।

आयुर्वेद की किस थेरेपी से हो सकता है इनफर्टिलिटी का इलाज? एक्सपर्ट्स से जानिए

Written by Mukesh Sharma |Published : May 18, 2025 4:52 PM IST

Panchakarma treatment for pregnancy: कई शादीशुदा जोड़े गर्भधारण का प्रयास करते रहते हैं लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिलती है। इसलिए लोग परेशान होकर आईवीएफ जैसी चीजों का सहारा लेते हैं, आईवीएफ की सफलता दर बहुत कम है। ऐसे समय में आप आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी से इलाज करा सकती हैं। निःसंतानता एक ऐसी स्थिति है जिसमे 35 वर्ष से कम उम्र का कोई कपल एक साल तक असुरक्षित यौन संबंध बनाकर गर्भधारण का प्रयास करता है लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिलती है। आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा ने बताया कि ज्यादातर लोगों को यह बात नहीं मालूम होती है कि निःसंतानता के लिए आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म थेरेपी इतने कारगर है कि इसमें 90 प्रतिशत लोगों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

(और पढ़ें - 2 बार मिसकैरिज होने के बाद आयुर्वेद की मदद से हुआ गर्भधारण)

क्या है पंचकर्म चिकित्सा

पंचकर्म आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। यह शरीर के अंदर मौजूद तीनों दोषों को संतुलित रखने का कार्य करते हैं। इसमें पांच क्रियाएं शामिल हैं जो इस प्रकार हैं:

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1. वमन (Vamana): शरीर में बढे हुए कफ को बाहर निकालने के लिए वमन प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान आपको ऐसी चीजों का सेवन कराया जाता है जिससे आपको उल्टी हो जाए और शरीर के अंदर के अतिरिक्त विषाक्त पदार्थ बाहर आ जाएँ।

2. विरेचन (Virechana): विरेचन प्रक्रिया का इस्तेमाल शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ और अतिरिक्त पित्त को बाहर निकालने के लिए किया जाता है। इससे आपका पाचन तंत्र बिलकुल साफ़ हो जाता है और पित्ताशय भी ठीक रहता है।

3. बस्ती (Basti): बस्ती प्रक्रिया पंचकर्म की सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है जिसके माध्यम से शरीर के अंदर मौजूद अतिरिक्त वात दोष को संतुलित किया जाता है। इसका इस्तेमाल कई तरह के विकारों से निजात पाने में किया जाता है जिसमें महत्वपूर्ण है निःसंतानता, पीसीओडी आदि। इससे शरीर में चिकनाई आती है और उसको सही पोषण मिलता है।

4. नास्य (Nasya): इस प्रक्रिया के दौरान मरीज के नाक के अंदर औषधीय तेल डाला जाता है जिससे वात और कफ दोष संतुलित होते हैं और नासिका मार्ग साफ़ हो जाता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से गर्दन और नाक के क्षेत्र को सही रखने के लिए किया जाता है।

5. रक्तमोक्षण (Raktamochana): पंचकर्म की इस प्रक्रिया का इस्तेमाल शरीर की अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें आपके शरीर से गंदे खून को बाहर निकाला जाता है जिससे शरीर की शुद्धि होती है।

इनफर्टिलिटी के लिए पंचकर्म चिकित्सा

डॉ चंचल शर्मा के अनुसार जिन महिलाओं को निःसंतानता की समस्या है उनके लिए पंचकर्म चिकित्सा बेहद कारगर है। इसकी मदद से ट्यूबल ब्लॉकेज, एंडोमेट्रिओसिस, पीसीओएस, अंडे की गुणवत्ता, हयड्रोसलपिंक्स आदि का उपचार किया जाता है जिसके बाद महिला प्राकृतिक रूप से माँ बन सकती हैं। जिन महिलाओं की प्रजनन क्षमता कम हो गयी है उनके लिए बस्ती कर्म बेहद महत्वपूर्ण है। इससे गर्भाशय की स्थिति मजबूत होती है और प्रजनन सम्बन्धी विचारों से भी राहत मिलता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि केवल पंचकर्म ही आयुर्वेदिक चिकित्सा का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके साथ आहार परिवर्तन, व्यवस्थित जीवन शैली और आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन भी जरूरी है।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।