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ऑपरेशन से डर लगता है? तो ये आयुर्वेदिक इलाज को अपना लो- बवासीर भूल जाओगे

आयुर्वेद में बवासीर का इलाज कई प्रकार से कियाा जाता है। इस समस्या के इलाज में सबसे पहले मरीज की जीवनशैली और खानपान को सुधारने पर जोर दिया जाता है।

Written By Ashu Kumar Das | Updated : February 26, 2026 7:23 PM IST

बवासीर (पाइल्स) आज के समय की एक आम लेकिन अत्यंत पीड़ादायक समस्या है। गलत खान-पान, कब्ज, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और पाचन तंत्र की कमजोरी इसके प्रमुख कारण हैं। आयुर्वेद में बवासीर को “अर्श” कहा गया है और इसे जड़ से ठीक करने के लिए प्राकृतिक उपचार, आहार सुधार और जीवनशैली में बदलाव करने पर जोर दिया जाता है।

फरीदाबाद के सेक्टर- 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के सीनियर आयुर्वेद कंसल्टेंट डॉ. चेतन शर्मा (Dr. Chetan Sharma, Senior Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Sector 8) के अनुसार, आयुर्वेद में बवासीर का इलाज कई प्रकार से कियाा जाता है। इस समस्या के इलाज में सबसे पहले मरीज की जीवनशैली और खानपान को सुधारने पर जोर दिया जाता है।

बवासीर क्या है?

बवासीर गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की सूजी हुई नसें होती हैं। जब इन नसों पर दबाव बढ़ता है, तो दर्द, खुजली और ब्लीडिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मुख्य रूप से 2 प्रकार का होता है, इसमें शामिल हैः

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  • खूनी बवासीर- मल त्याग के समय मल के साथ खून भी बाहर आना।
  • बादी बवासीर- बवासीर के इस प्रकार में मल द्वार में सूजन, दर्द और खुजली की परेशानी होती है।

बवासीर के प्रमुख लक्षण

  • मल त्याग के समय दर्द या जलन
  • गुदा के आसपास सूजन या गांठ
  • मल के दौरान खून आना
  • मल द्वारा पर खुजली और जलन
  • बैठने में परेशानी महसूस होना
  • बैठने के बाद जलन और दर्द रहना

बवासीर होने के कारण

  1. अग्नि (पाचन शक्ति) की कमजोरी- डॉ. चेतन शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार सभी रोगों की जड़ कमजोर पाचन शक्ति होती है। जब किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति कमजोर होती है, तो खाना सही तरीके से पकता नहीं है आंतों में मल जमा होने लगता है। इसके कारण कब्ज की परेशानी होती है। लंबे समय तक रहने वाली कब्ज को बवासीर का प्रमुख कारण माना जाता है।
  2. वात दोष का बढ़ना- आयुर्वेद में बवासीर की बीमारी को वात दोष से जोड़कर देखा जाता है। वात दोष बढ़ने से आंतों में सूखापन और कठोर मल बनने लगता है। जो लोग देर रात को खाना खाते हैं, लंबे समय तक व्रत रखते हैं उनमें वात दोष की परेशानी देखी जाती है। इससे मल त्याग मुश्किल हो जाता है और बवासीर जैसी समस्या जन्म लेती हैं।
  3. पुरानी कब्ज (विबंध)- कब्ज होने पर व्यक्ति मल त्याग के समय जोर लगाता है, जिससे गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है और सूजन हो जाती है। पुरानी कब्ज के कारण बवासीर होना आम बात है। आयुर्वेदिक डॉक्टर बताते हैं कि पुरानी कब्ज की समस्या उन लोगों में देखी जाती है, जो रोजाना 3 लीटर पानी नहीं पीते हैं और फिजिकल एक्टिविटी भी ना के बराबर करते हैं।
  4. पित्त दोष का असंतुलन- पित्त बढ़ने से शरीर में गर्मी और सूजन बढ़ती है। ज्यादा मसालेदार खाना, शराब पीने वाले लोगों का पित्त अक्सर बढ़ा हुआ होता है। पित्त दोष का असंतुलन होने पर खूनी बवासीर की संभावना बढ़ती है।
  5. कफ दोष का असंतुलन - कफ दोष बढ़ने से शरीर में भारीपन और सुस्ती आती है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। जिससे कब्ज और फिर बवासीर होता है।
  6. बैठकर काम करना- आजकल की डेस्क जॉब में लोग 10 से 11 घंटे एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना गुदा क्षेत्र में ब्लड फ्लो धीमा पड़ जाता है। इसके कारण बवासीर की समस्या हो सकती है।
  7. मोटापा- आयुर्वेदिक डॉक्टर का कहना है कि अधिक वजन होने से पेट और गुदा क्षेत्र पर दबाव बढ़ता है, जिससे नसें सूज सकती हैं। नसों में आने वाली सूजन का इलाज समय रहते न किया जाए तो यह बवासीर हो सकता है।
  8. प्रेग्नेंसी- कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान भी बवासीर होने का खतरा रहता है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर का बढ़ा हुआ वजन, हार्मोनल बदलावों के कारण मल द्वार पर अतिरिक्त दवाब पड़ता है, जिससे मल त्याग की प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है और बवासीर होने का खतरा रहता है।

आयुर्वेद के अनुसार बवासीर के प्रकार

  1. वातज अर्श- दर्द और सूखापन अधिक
  2. पित्तज अर्श- जलन और रक्तस्राव
  3. कफज अर्श- सूजन और भारीपन
  4. त्रिदोषज अर्श- तीनों दोषों का असंतुलन

बवासीर के स्टेज क्या हैं?

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज

डॉ. चेतन शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद में किसी भी बीमारी या समस्या का इलाज दोषों के आधार पर होता है। बवासीर का इलाज शरीर के दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करके किया जाता है।

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1. कब्ज दूर करना सबसे पहला कदम

बवासीर का मूल कारण अक्सर कब्ज होता है। आयुर्वेद मानता है कि जिन लोगों में कब्ज की परेशानी कम होती है तो बवासीर की परेशानी भी खुद-ब - खुद कम होने लगती है। कब्ज कम करने के लिए सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं। खाने में फाइबर की अतिरिक्त मात्रा को शामिल करें। सुबह हैवी और रात को हल्का भोजन ही रहें।

कब्ज दूर करने वाले आयुर्वेदिक हर्बस

  1. त्रिफला चूर्ण- त्रिफला आंतों को साफ करता है और मल त्याग को आसान बनाता है। रात को सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण लेने से पेट सही तरीके से साफ होता है और कब्ज की समस्या दूर होती है।
  2. इसबगोल की भूसी- इसबगोल की भूसी मल को नरम बनाती है। आयुर्वेद के अनुसार, इसबगोल की भूसी में हाई फाइबर होता है जो मल को मुलायम बनाता है। रात को सोने से पहले 1- 2 चम्मच इसबगोल गुनगुने पानी या दूध के साथ लेने से सुबह पेट सही तरीके से साफ करने में मदद मिलती है।
  3. गोंद कतीरा- गोंद कतीरा की तासीर ठंडी होती है। रात को पानी में भिगोया हुआ गोंद कतीरा सुबह खाली पेट खाया जाए तो इससे बवासीर की परेशानी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

2. आहार में सुधार

जैसा कि हम पहले भी बात कर चुके हैं कि बवासीर का मुख्य कारण है कब्ज। कब्ज की परेशानी को आहार में बदलाव करने ही सुधारा जा सकता है। डॉक्टर कहते हैं बवासीर का इलाज करने में आयुर्वेद आहार में बदलाव करने की सलाह देता है। ज्यादा मसालेदार, तला और जंक फूड कम खाना चाहिए। बवासीर की वजह से मलद्वार पर अगर जलन, खुजली की परेशानी हो रही है, तो इससे राहत पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। पानी के अलावा बवासीर के मरीजों को छाछ, फल और प्राकृतिक रेशेदार चीजों को खाने में शामिल करना चाहिए।

3. सिट्ज बाथ

सिट्ज बाथ बवासीर (पाइल्स) में राहत देने का एक सरल और प्रभावी घरेलू उपाय है। इसमें गुनगुने पानी से भरे टब या बड़े बर्तन में 10-15 मिनट तक बैठा जाता है, जिससे गुदा क्षेत्र की सूजन, दर्द, खुजली और जलन कम होती है। यह रक्त प्रवाह को बेहतर बनाकर घाव भरने में मदद करता है और मल त्याग के बाद होने वाली असुविधा को कम करता है। चाहें तो पानी में थोड़ा सा नमक या फिटकरी मिला सकते हैं। दिन में 2- 3 बार सिट्ज बाथ लेने से बवासीर के लक्षणों में आराम मिलता है और सफाई बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

बवासीर की गांठ क्यों बनती है?

बवासीर में क्या खाएं?

  • दलिया, ओट्स, हरी सब्जियां
  • पपीता, केला, अंजीर
  • साबुत अनाज
  • पर्याप्त पानी
  • छाछ और दही

बवासीर में क्या नहीं खाना चाहिए?

  • मसालेदार भोजन
  • तला-भुना भोजन
  • फास्ट फूड
  • शराब और धूम्रपान
  • अत्यधिक चाय-कॉफी

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार बवासीर का उपचार केवल लक्षणों को दबाने के बजाय उसकी जड़ यानी कब्ज और पाचन समस्या को ठीक करने पर आधारित है। त्रिफला, इसबगोल, गोंद कतीरा, एलोवेरा, छाछ और संतुलित आहार अपनाकर बवासीर में प्राकृतिक राहत पाई जा सकती है। साथ ही, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। लेकिन ध्यान रहे कि आपको लंबे समय से बवासीर की परेशानी है, तो इसका इलाज कराना बहुत जरूरी है। बवासीर का इलाज अगर समय पर न किया जाए तो इससे समस्या आगे चलकर और बढ़ सकती है, जिससे आपको ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।