नाड़ी परीक्षण से तुरंत पता चल जाता है शरीर में छिपी बीमारियों का राज, बड़ी-बड़ी जांचे भी इस चिकित्सा के आगे हैं फेल

Nadi Pariksha Or Pulse Diagnosis In Hindi: अगर आप नाड़ी को देखकर बीमारी की पहचान करने वाले तरीकों में भरोसा रखते हैं तो जरूर जानिए यह पुरानी चिकित्सा पद्धति।

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Written By: Atul Modi | Published : March 10, 2023 8:15 PM IST

आयुर्वेद एक पुरानी चिकित्सा पद्धति है। हजारों वर्षों से इसका प्रयोग मनुष्य के रोगों का इलाज करने के लिए किया जा रहा है। आयुर्वेद का अर्थ है जीवन का ज्ञान। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य के शरीर में तीन प्रकार के तत्व होते हैं- वात, पित्त और कफ। शरीर में इनमें से किसी एक का भी संतुलन बिगड़ने से व्यक्ति बीमार हो जाता है। आयुर्वेदिक में ही नाड़ी चिकित्सा का भी जिक्र है। नाड़ी परीक्षण (Nadi Parikshan) के माध्यम से शरीर में छिपे रोगों का पता लगाया जा सकता है।

नाड़ी परीक्षण क्या है - Nadi Parikshan In Hindi

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में हो रहे सभी बदलाव का प्रभाव हमारे दिल की गति पर पड़ता है। यदि हमारी हार्ट बीट की गति में किसी प्रकार का बदलाव आता है तो इसका पूरा प्रभाव हमारी धमनियों की धड़कन पर पड़ता है। इस तरह से नाड़ी चिकित्सा के माध्यम से शरीर में बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

नाड़ी परीक्षण करने का सही समय - Nadi Parikshan Time In Hindi

नाड़ी के टेस्ट के लिए सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट होता है। क्योंकि खाना खाने के बाद या फिर तेल की मालिश करने के बाद नाड़ी की गति असामान्य हो जाती है जिसके कारण नाड़ी की गति का ठीक से पता नहीं चल पता है। इसी तरह अगर रोगी भूखा-प्यासा हो तब भी नाड़ी टेस्ट से रोग का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

नाड़ी परीक्षण की प्रक्रिया - Nadi Parikshan Process In Hindi

नाड़ी टेस्ट करने के लिए पुरुषों के दाएं हाथ की और स्त्रियों के बाएं हाथ की नाड़ी की गति को देखा जाता है। लेकिन, कभी कभी रोग की पूरी पूरी जानकारी पता करने के लिए दोनों हाथों की नाड़ी भी देखी जाती है। नाड़ी टेस्ट के समय हाथ की पहली तीन उंगलियों का प्रयोग किया जाता है। नाड़ी टेस्ट में हथेली से लगभग आधा इंच नीचे उँगलियों के माध्यम से नाड़ी की गति का अध्ययन किया जाता है। वैध नाड़ी की गति से वात, पित्त व कफ के लेवल को देखते हुए रोग का पता लगाता है। यदि नाड़ी की गति 68 -74 के बीच हो तो इसे सामान्य माना जाता है। इससे कम या ज़्यादा गति होने पर व्यक्ति बीमार माना जाता है।

नाड़ी देखकर रोग कैसे जानें - Nadi Pariksha Or Pulse Diagnosis In Hindi

नाड़ी टेस्ट से सर्दी-बुखार से लेकर हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, स्किन के रोग, जोड़ों के दर्द जैसे कई खतरनाक रोगों के बारे में पता लगाया जा सकता है। इसके अलग नाड़ी टेस्ट से ना सिर्फ शारीरिक बल्कि स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसे मानसिक रोगों के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। कुछ अच्छे और कुशल वैद्य रोगी की नाड़ी टेस्ट से ही गंभीर और लाइलाज बीमारियों का भी पता लगा लेते हैं। अगर रोगी की नाड़ी ज्यादा धीमी गति से चल रही हो या रुक-रुक के चल रही हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

(Inputs By: Ayurveda Expert Dr. Dikshak Bhatt, BAMS)

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