
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr Partap Chauhan
stomach- flu ayurveda (AI generated image)
बारिश के मौसम में कई बार उन लोगों का भी कुछ चटपटा या बाहर का मसालेदार खाने का मन कर जाता है और अगर कोई अपनी डाइट को लेकर स्ट्रिक्ट भी रहता है तो कई बार बारिश के मौसम में खाने की स्वच्छता भी एक दिक्कत बन जाती है। जाने-माने आयुर्वेदाचार्य और लेखक डॉ. प्रताप चौहान के अनुसार मौसम बदलते ही सबसे पहले असर हमारे पाचन तंत्र पर दिखाई देता है। खासकर बारिश के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। दूषित पानी, अस्वच्छ भोजन और वातावरण में बढ़ी नमी संक्रमण फैलने की संभावना को बढ़ा देती है। इसी कारण दस्त, उल्टी, पेट दर्द, अपच और गैस जैसी परेशानियां इस मौसम में अक्सर देखने को मिलती हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद केवल रोग का उपचार करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर को भीतर से मजबूत बनाकर संक्रमण के खतरे को कम करने पर भी विशेष ध्यान देता है।
आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर हो जाती है। यदि इस समय खान-पान में लापरवाही बरती जाए, तो छोटी-सी गलती भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए इस मौसम में ताजा, हल्का और घर का बना भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है। बहुत अधिक तला-भुना, मसालेदार, बासी या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन पाचन पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। भोजन हमेशा समय पर और आवश्यकता के अनुसार ही करना चाहिए, क्योंकि संतुलित भोजन स्वस्थ शरीर की पहली आवश्यकता है।
हमारी रसोई में मौजूद कई प्राकृतिक चीजें पाचन को बेहतर बनाए रखने में सहायक मानी जाती हैं। हल्दी, अदरक, जीरा, अजवाइन और धनिया का संतुलित मात्रा में उपयोग भोजन को सुपाच्य बनाने में मदद करता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ या गुनगुना पानी पीना भी लाभदायक माना जाता है। यदि किसी आयुर्वेदिक औषधि की आवश्यकता महसूस हो, तो उसका सेवन केवल योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
पेट के संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता की अनदेखी नहीं की जा सकती। भोजन बनाने और खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोना, फल और सब्जियों को साफ पानी से धोकर उपयोग करना तथा बाहर का खुला या अस्वच्छ भोजन खाने से बचना जरूरी है। बारिश के मौसम में पानी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि कई संक्रमण दूषित पानी के माध्यम से फैलते हैं।
संतुलित दिनचर्या भी अच्छे स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार है। पर्याप्त नींद, नियमित योग, प्राणायाम और हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। यदि वर्षा ऋतु में खान-पान, स्वच्छता और आयुर्वेद के इन सरल उपायों को अपनाया जाए, तो मौसमी पेट के संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिर भी यदि परेशानी लगातार बनी रहे या लक्षण गंभीर हो जाएं, तो बिना देर किए चिकित्सक से परामर्श लेना सबसे उचित कदम है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल मानसून में होने वाले पेट में इन्फेक्शन से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।