
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
ayurveda pregnancy success (AI generated Image)
समय पर सही और सुरक्षित प्रेगनेंसी हर महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। कई बार शरीर में छोटी-मोटी समस्या भी बड़ी बन जाती है और गर्भधारण में अड़चन बन जाती है। ऐसी ही एक कहानी है प्रियंका की, जिसका न केवल AMH Test रिजल्ट कम था बल्कि बाइलेटरल बीड्स ट्यूब एग्लूटिनेशन और अंडों की गुणवत्ता भी सही नहीं थी। लेकिन उसकी कहानी का संघर्ष सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता बल्कि जब वह अपनी हेल्थ प्रॉब्लम्स से लड़ रही थी तब उसने अपनी पति की रिपोर्ट देखी तो पता चला कि उनके पति को भी एस्थेजोस्पर्मिया (Asthenozoospermia) है, जो ऐसी कंडीशन होती है जिसमें शुक्राणुओं की गतिशीलता कम (Low Motility) होती है। लेकिन इतना सब कुछ होते हुए भी प्रियंका ने हार नहीं मानी आगे जानेंगे कैसे आयुर्वेद ने उसका साथ दिया।
सिर्फ खुद की हेल्थ कंडीशन नहीं अब प्रियंका के सामने उनके पति की हेल्थ कंडीशन भी थी, क्योंकि प्रेग्नेंट होने के लिए शुक्राणुओं की गतिशीलता होना बहुत जरूरी है और वह 32% से कम नहीं होनी चाहिए। जब स्पर्म मोटिलिटी उससे नीचे आ जाती है, तो ऐसे में मेल इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि मोटिलिटी कम होने के कारण शुक्राणु के लिए अंडे तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
प्रियंका बहुत से अस्पतालों में जांच और इलाज कराया, कई अलग-अलग अस्पतालों में जाकर बात की लेकिन कहीं से भी सफलता हाथ नहीं लग रही थी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टर्स ने आईवीएफ की सलाह दी और कहा कि अब गर्भधारण करने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। प्रियंका ने आईवीएफ कराने का मन भी बना लिया था, लेकिन पैसे की कमी भी उसके लिए एक चुनौती बनती जा रही थी।
प्रियंका का विश्वास डगमगा रहा था लेकिन फिर उनके एक दोस्त ने आयुर्वेद में ट्राई करने की सलाह दी। शुरू में प्रियंका को भी भरोसा नहीं था लेकिन वह पहले भी अस्पतालों से बहुत दवाएं खा चुकी थी, तो उसने आयुर्वेद से इलाज कराने का सोचा। इंटरनेट पर ऑनलाइन सर्च करते हुए उन्हें आशा आयुर्वेदा के बारे में पता चला और उनसे संपर्क किया।
दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और फर्टिलिटी डॉ. चंचल शर्मा ने प्रियंका के स्वास्थ्य की अच्छे से जांच उसके अनुसार ट्रीटमेंट शुरू किया जो इस प्रकार था -
baby image (This image was edited with the AI)
आयुर्वेद द्वारा सही उपचार के बाद प्रियंका गर्भधारण कर पाई और वर्षों के संघर्ष के बाद 33 साल की उम्र होते हुए भी उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जब उन्हें खुद पर विश्वास नहीं था, तो आयुर्वेद ने उसे सहारा दिया। वह अपने मन में संदेह लेकर आई थी, और अब वह कहती है कि यह उसके जीवन का सबसे अच्छा निर्णय था।
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