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महिला और पुरुष दोनों में थी दिक्कत फिर भी आयुर्वेद की मदद से दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म

सही और सुरक्षित गर्भधारण के लिए सालों तक संघर्ष करने और अनेकों अस्पतालों में ट्राई करने के बाद जब सफलता हासिल नहीं हुई तो प्रियंका ने आयुर्वेद का सहारा लिया और 33 साल की उम्र में स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 7, 2026 7:09 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma

समय पर सही और सुरक्षित प्रेगनेंसी हर महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। कई बार शरीर में छोटी-मोटी समस्या भी बड़ी बन जाती है और गर्भधारण में अड़चन बन जाती है। ऐसी ही एक कहानी है प्रियंका की, जिसका न केवल AMH Test रिजल्ट कम था बल्कि बाइलेटरल बीड्स ट्यूब एग्लूटिनेशन और अंडों की गुणवत्ता भी सही नहीं थी। लेकिन उसकी कहानी का संघर्ष सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता बल्कि जब वह अपनी हेल्थ प्रॉब्लम्स से लड़ रही थी तब उसने अपनी पति की रिपोर्ट देखी तो पता चला कि उनके पति को भी एस्थेजोस्पर्मिया (Asthenozoospermia) है, जो ऐसी कंडीशन होती है जिसमें शुक्राणुओं की गतिशीलता कम (Low Motility) होती है। लेकिन इतना सब कुछ होते हुए भी प्रियंका ने हार नहीं मानी आगे जानेंगे कैसे आयुर्वेद ने उसका साथ दिया।

एक साथ दो लड़ाईयां लड़ रही थी प्रियंका

सिर्फ खुद की हेल्थ कंडीशन नहीं अब प्रियंका के सामने उनके पति की हेल्थ कंडीशन भी थी, क्योंकि प्रेग्नेंट होने के लिए शुक्राणुओं की गतिशीलता होना बहुत जरूरी है और वह 32% से कम नहीं होनी चाहिए। जब स्पर्म मोटिलिटी उससे नीचे आ जाती है, तो ऐसे में मेल इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि मोटिलिटी कम होने के कारण शुक्राणु के लिए अंडे तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

आईवीएफ ही दिख रहा था आखिरी विकल्प

प्रियंका बहुत से अस्पतालों में जांच और इलाज कराया, कई अलग-अलग अस्पतालों में जाकर बात की लेकिन कहीं से भी सफलता हाथ नहीं लग रही थी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टर्स ने आईवीएफ की सलाह दी और कहा कि अब गर्भधारण करने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। प्रियंका ने आईवीएफ कराने का मन भी बना लिया था, लेकिन पैसे की कमी भी उसके लिए एक चुनौती बनती जा रही थी।

आखिरी रास्ता आयुर्वेद

प्रियंका का विश्वास डगमगा रहा था लेकिन फिर उनके एक दोस्त ने आयुर्वेद में ट्राई करने की सलाह दी। शुरू में प्रियंका को भी भरोसा नहीं था लेकिन वह पहले भी अस्पतालों से बहुत दवाएं खा चुकी थी, तो उसने आयुर्वेद से इलाज कराने का सोचा। इंटरनेट पर ऑनलाइन सर्च करते हुए उन्हें आशा आयुर्वेदा के बारे में पता चला और उनसे संपर्क किया।

आयुर्वेद से मिला सफल इलाज

दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और फर्टिलिटी डॉ. चंचल शर्मा ने प्रियंका के स्वास्थ्य की अच्छे से जांच उसके अनुसार ट्रीटमेंट शुरू किया जो इस प्रकार था -

  • उत्तर बस्ती चिकित्सा - ट्यूबल ब्लॉकेज और लो एएमएच का ट्रीटमेंट करने के लिए इसमें एक औषधीय तेल या घी (जैसे सुकुमारा घृता या यवक्षर तैला) को योनि के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है। ट्यूबल ब्लॉकेज हटाने के लिए इसे सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक चिकित्सा माना जाता है।
  • पंचकर्म चिकित्सा - यह एक गहन आयुर्वेदिक विषहरण और पुनरुद्धार प्रक्रिया है, जिसमें शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है और वात, पित्त व कफ दोषों के संतुलन को सही किया जाता है। यह पुरानी थकान, तनाव और दर्द से निपटने के लिए बहुत कुशल है। विरचन बस्ती (एनीमा) चिकित्सा प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया जिनकी मदद से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकाले जाते हैं।
  • एस्थेनोजोस्पर्मिया के लिए - आयुर्वेद में, यह स्थिति शीना शुक्र या शुक्र दृष्टि से संबंधित है। नैदानिक दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से शुक्राणु की गति में सुधार करने और प्रगतिशील गति को आगे बढ़ाने के लिए वात और पित्त दोषों को संतुलित करने पर केंद्रित है।

baby image baby image (This image was edited with the AI)

स्वस्थ बच्चे को दिया जन्म

आयुर्वेद द्वारा सही उपचार के बाद प्रियंका गर्भधारण कर पाई और वर्षों के संघर्ष के बाद 33 साल की उम्र होते हुए भी उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जब उन्हें खुद पर विश्वास नहीं था, तो आयुर्वेद ने उसे सहारा दिया। वह अपने मन में संदेह लेकर आई थी, और अब वह कहती है कि यह उसके जीवन का सबसे अच्छा निर्णय था।

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी संबंधित व्यक्ति की सहमति से साझा की गई है और साथ ही इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का उद्देश्य किसी भी स्वास्थ्य समस्या का इलाज करने के लिए नहीं है। उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।