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जब पेरिअनल क्षेत्र में गांठदार सूजन आने लगती है तो इस स्थिति को एनल फिस्टुला कहा जाता है। इस सूजन में से थोड़ा बहुत डिस्चार्ज भी देखने को मिलता रहता है। जब यह मवाद एक साथ इकठ्ठा हो जाता है तब दर्द होना शुरू हो जाता है। जब यह मवाद निकल जाता है तब दर्द भी कम हो जाता है। इस स्थिति के मैनेज करने के लिए अक्सर सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह एक अच्छी चॉइस नहीं मानी जाती है क्योंकि इस प्रक्रिया के बाद दुबारा से फिस्टुला होने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं। लेकिन, विशेषज्ञों की मानें तो फिस्टुला को क्षारसूत्र थेरेपी से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। आइए जान लेते हैं फिस्टुला थेरेपी क्या है और इसे क्यों सर्जरी (Kshar Sutra Vs Laser Treatment For Fistula) से बेहतर माना गया है।
यह आयुर्वेदिक सर्जरी की एक स्पेशलाइज्ड प्रक्रिया है। सबसे पहले आयुर्वेदिक सर्जन एनल क्षारसूत्र को क्लिनिकल एग्जामिनेशन के माध्यम से इवेलुएट करते हैं। उसके बाद (एमआरआई) की जाती है। इस प्रक्रिया में एक स्पेशलाइज्ड मेडिकेटेड धागे का प्रयोग किया जाता है जो क्षारसूत्र ट्रैक्ट में रखा जाता है। इससे निकलने वाली दवाई क्षारसूत्र ट्रैक्ट के डेड टिश्यू को निकाल देती है और फिर आराम होना शुरू हो जाता है। यह दवाई 5 से 7 दिन तक काम करती है। इसलिए एक हफ्ते या 10 दिन में पुराने क्षारसूत्र को नए से बदलना पड़ता है। ऐसा जब तक किया जाता है जब तक क्षारसूत्र पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता।
1- सर्जरी में अधिकतर केसों में फिस्टुला दुबारा से हो जाता है लेकिन क्षारसूत्र थेरेपी में ऐसा होने के चांस न के बराबर हैं।
2- सर्जरी करते समय मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है और इससे जुड़े साइड इफेक्ट्स भी मरीज को भुगतने पड़ते हैं जैसे सिर दर्द होना, कमर दर्द होना आदि। क्षारसूत्र लोकल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है जो पूरी तरह से सुरक्षित होता है।
3- सर्जरी में बार-बार स्टूल पास करने के लिए बाथरूम जाना होता है, हालांकि क्षारसूत्र में ऐसा कुछ नहीं देखा गया है।
4- सर्जरी होने के बाद कुछ समस्याएं जैसे दर्द होना, ब्लीडिंग होना या फिर इन्फेक्शन आदि ज्यादा देखने को मिलता है, लेकिन आयुर्वेदिक थेरेपी में इस तरह की परेशानियां नहीं देखने को मिलती हैं।
5- सर्जरी में अस्पताल में मरीज को भर्ती करना जरूरी होता है जबकि क्षारसूत्र एक ओपीडी प्रक्रिया है जिसमें अस्पताल में भर्ती करवाने की जरूरत नहीं होती है।
6- सर्जरी के मुकाबले क्षारसूत्र बजट में भी आता है और काफी आसान प्रक्रिया भी होती है।
निष्कर्ष: अगर आप को भी इस तरह की शारीरिक स्थिति है तो आप को पहले किसी डॉक्टर से राय ले लेनी चाहिए। वही आपको अच्छे से गाइड करेंगे कि आप के लिए सर्जरी बेहतर रहने वाली है या फिर क्षारसूत्र।