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दही कब और कैसे खाना चाहिए, आयुर्वेद के अनुसार जानिए दही खाने का सही तरीका

हम कुछ भी खाएं, उस चीज से कुछ न कुछ अफवाहें जरूर जुड़ी होती है, जिस कारण बहुत से लोग दही जैसी लाभदायक चीजों को खाने से भी परहेज करने लगते हैं।

Written by Atul Modi |Published : October 15, 2022 9:44 PM IST

अगर दही खाना आपको पसंद है तो यह अच्छी बात है क्योंकि इसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है, लेकिन इससे जुड़ी कुछ अफवाहों के बारे में आपने भी जरूर सुना होगा जिसके कारण इसे खाएं या फिर न खाएं, यह संदेह की स्थिति बनने लगती है। बहुत से लोग दही को गलत ढंग से खाते हैं और इस प्रकार उन्हें लाभ की बजाए नुकसान पहुंचने लगता है। बहुत से लोग यह मानते हैं कि दही प्रकृति में ठंडी होती है और इसलिए इसे गर्मियों में ही खाना चाहिए, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। आइए जानते हैं आयुर्वेद का इस बारे में क्या कहना है।

दरअसल, आयुर्वेद के मुताबिक दही की प्रकृति गर्म होती है, यह वजन बढ़ाने में मदद करती है और इसे रोजाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसे पचाने में काफी मेहनत लगती है और यह काफी हैवी होती है।

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीक्षा भावसार के अनुसार, दही में फैट की मात्रा ज्यादा होती है और यह वजन बढ़ाने में मदद करती है। यह शरीर को मजबूत करने में भी लाभदायक है। यह कफ और पित्त को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। अग्नि को बढ़ाने में भी यह लाभदायक है।

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दही से जुड़े कुछ आयुर्वेदिक फैक्ट

  • दही को गर्म करके नहीं खाना चाहिए क्योंकि गर्म करने से इसमें मौजूद गुण खत्म हो जाते हैं।
  • जिन लोगो को मोटापा, काफा डिसऑर्डर, ब्लीडिंग डिसऑर्डर और इन्फ्लेमेटरी स्थितियां हैं उनको दही का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • दही को कभी भी रात में नहीं खाना चाहिए।
  • दही को रोजाना न खाएं। इसकी बजाए छाछ का सेवन जिसमें, नमक, जीरे जैसे कई तरह के मसाले मिले होते हैं, को इसमें शामिल करके पी सकते हैं।
  • दही को फलों के साथ मिक्स करके न खाएं नहीं तो मेटाबोलिक समस्याएं और एलर्जी जैसी समस्या देखने को मिल सकती है।।
  • मछली और मीट के साथ भी दही को न खाएं।

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