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Written By: Pallavi | Published : August 26, 2022 1:08 PM IST
Kachi Haldi vs Haldi: हमारे घरों में अक्सर हम हल्दी पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। पर क्या कभी आपने सोचा है कि क्या ये हल्दी आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद है या नहीं? नहीं आपको इस बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए। दरअसल, बाजार से खरीदे हुए हल्दी पाउडर में मिलावट हो सकती है। ऐसा हम नहीं बल्कि आयुष आयुर्वेदा क्लीनिक के आयुर्वेदिक एक्सपर्ट बी.पी शास्त्री का कहना है। ये बताते हैं कि पुराने जमाने में लोग कच्ची हल्दी को सिल बट्टे पर पीस कर इस्तेमाल किया करते हैं। ऐसे में बायोएक्टिव तत्व करक्यूमिन (curcumin) शरीर को आसानी से मिल जाता था। करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और शरीर के लिए यही प्रभावी ढंग से काम करते हैं। जबकि, ये बात आप हल्दी पाउडर को लेकर नहीं कह सकते। तो, आइए सबसे पहले जानते हैं कच्ची और पाउडर वाली हल्दी के बीच का अंतर, फिर जानेंगे क्या है बेहतर और क्यों।
कच्ची हल्दी का स्वाद नेचुरल और असली होता है। साथ ही इसमें बायोएक्टिव तत्व करक्यूमिन (curcumin) भी ज्यादा मात्रा में होता है। इसके अलावा इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। साथ ही पेट की समस्याओं, इम्यूनिटी बूस्ट करने और घाव की हीलिंग में भी कच्ची हल्दी बहुत ही काम की चीज है। इसलिए अगर आपको किसी समस्या के इलाज के लिए हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हल्दी पाउडर बनाने से पहले हल्दी की काफी प्रोसेसिंग होती है। इसके लिए हल्दी को छीलकर, उबालकर और सुखाकर रखा जाता है। फिर इसे गर्म किया जाता है और फिर तब पीसा जाता है। ये हल्दी पाउडर जितना पुराना होता जाता है उतना ही उसका स्वाद और असर कम हो जाता है। साथ ही कई बार इसमें मिलावट भी हो सकती है जो कि आपके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है।
कच्ची हल्दी मेंकरक्यूमिन होता है जो पित्त के उत्पादन को ट्रिगर करने में मदद करता है, जिसे पाचन तंत्र में मदद करने के लिए माना जाता है। कच्ची हल्दी का सेवन अपच और एसिडिटी की समस्या नहीं होगी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, अगर आप कच्ची हल्दी का सेवन करते हैं तो आपको ब्लॉटिंग और अल्सर जैसी समस्याएं नहीं होंगी।
कच्ची हल्दी की खास बात यह है कि ये चोट और दर्द में काम आ सकती है। दरअसल, इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है जो कि दर्द को दूर करता है। इस कारण से, इसका उपयोग अक्सर पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया के उपचार के भाग के रूप में किया जाता है। इसके अलावा घाव पर इसे लगाने से ये तेजी से रिकवरी में मदद कर सकता है।
कच्ची हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों की गतिविधि को रोकने में मदद कर सकते हैं, जो कि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। साथ ही ये एंटीबैक्टीरियल और एंटी-वायरल भी है जिसकी वजह से आप संक्रामक बीमारियों से बच सकते हैं। इसके अलावा सर्दी-जुकाम में भी यह कारगर तरीके से काम करता है और फेफड़ों को साफ करने में मदद करता है।
कच्ची हल्दी किसी भी प्रकार के कट या चोट के लिए एक मलहम की तरह काम कर सकती है। करक्यूमिन, हल्दी का चिकित्सीय घटक एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुणों से भरा होता है जो उपचार को बढ़ावा देता है। इसके अलावा शरीर में सूजन होने पर ये सूजन दूर करने में भी आपकी मदद कर सकता है।