
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : June 7, 2026 2:15 PM IST
Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
hormonal imbalance Ayurveda treatment (Image Credit: chatgpt)
आज के समय में भी भारत में हार्मोन से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जो कि एक बड़ी संख्या बन चुकी है। महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी समस्याएं होने के पीछे की वजह ज्यादातर मामलों में खराब जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान है। यही हार्मोनल समस्या जब बढ़ जाती है तो आपके पीरियड्स को अनियमित कर देती है। कई छोटी-छोटी आदतें व समस्याएं हैं जिनके कारण ये दिक्कतें होने लगती हैं जैसे दिनभर तनाव रहना, बाहर खाने लगना और एक्सरसाइज न करना आदि। हार्मोन से जुड़ी समस्याओं के कारण आने वाले समय में इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह सब वात और पित्त दोष के असंतुलन के कारण होता है। दोषों को संतुलित बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में कई तरीके बताए गए हैं।
आशा आयुर्वेद की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा ने कहा कि अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो पीरियड्स अनियमित होने का मुख्य कारण महिलाओं में अग्नि (पाचन शक्ति) का कमजोर होना और आर्तव धातु का दूषित होना है। जहां अन्य चिकित्सा पद्धति में केवल लक्षणों को दबाया जाता है वहीं आयुर्वेद में इसे जड़ से समाप्त करने के लिए उपचार किया जाता है। इसके जरिए आपके शरीर के अंदर दोषों को संतुलित करने की कोशिश की जाती है।
पीरियड्स को नियमित बनाए रखने के आयुर्वेद में किसी दवा से ज्यादा मरीज की जीवनशैली को सुधारने पर जोर दिया जाता है। आपको अपने खानपान में पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए। ऐसे भोजन करने की कोशिश करें जिसको आसानी से पचाया जा सकता है। अपने आहार में ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। जितना हो सके तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज करें। आयुर्वेद के अनुसार मरीज को ज्यादा जंक फूड, मैदा या चीनी न खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसके सेवन से शरीर में पित्त और वात बढ़ जाते हैं।
इर्रेगुलर पीरियड्स का सबसे बड़ा कारण हार्मोन असंतुलन को माना जाता है और इसलिए हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में कई ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जो हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में बेहद प्रभावी है। अगर इन जड़ी-बूटियों का सही से इस्तेमाल किया जाए तो आप हार्मोनल संतुलन बनाए रख सकते हैं। इर्रेगुलर पीरियड्स के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधियों में इस्तेमाल की जाने वाली औषधियों में निम्न शामिल है -
आयुर्वेद के अनुसार इन औषधियों का सेवन अगर सही तरीके से किया जा सके तो इससे महिलाओं की प्रजनन शक्ति बढ़ती है और गर्भाशय भी मजबूत होता है।
इर्रेगुलर पीरियड्स को ठीक करने के लिए खानपान के साथ-साथ आपको नियमित रूप से योग और प्राणायाम करना भी जरूरी है। ऐसा करने से इर्रेगुलर पीरियड्स को ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार भुजंगासन, बद्धकोणासन और अनुलोम-विलोम प्राणायाम आदि ऐसे योगासन है, जिनकी जो रक्त संचार में सुधार करते हैं और साथ ही साथ इनसे तनाव भी कम होता है। अगर हार्मोन संतुलित होंगे तो आपका पीरियड्स भी नियमित रहेगा।
ज्यादातर लोग यही भूल करते हैं कि वे शारीरिक स्वास्थ्य का ही ध्यान रखते हैं और अपने मानसिक स्वास्थ्य को भूल जाते हैं। लेकिन ज्यादा तनाव भी हार्मोनल असंतुलन का एक मुख्य कारण ही इसलिए इसे कम करने के लिए भरपूर नींद लें, ध्यान करें और जरूरत पड़ने पर आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल आयुर्वेद के अनुसार इर्रेगुलर पीरियड्स और हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां देना है। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।