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Ashwagandha for Fistula : फिस्टुला एक ऐसी परेशानी है, जिसमें गुदा की ग्रंथियों में संक्रमण उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में गुदा में फोड़ा हो जाता है, जिससे मवाद या फिर पस निकलने लगता है। इस परेशानी का इलाज अधिकतर लोग सर्जरी के द्वारा करवाते हैं। वहीं, इस बीमारी के होने का कारण मोटापा और लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठने की वजह से हो सकता है। फिस्टुला का इलाज एंटीबायोटिक्स दवाओं के जरिए भी किया जाता है। वहीं, आयुर्वेद में भी फिस्टुला का इलाज छिपा है। मुख्य रूप से अश्वगंधा की मदद से आप फिस्टुला का इलाज कर सकते हैं। आज हम इस लेख में फिस्टुला का अश्वगंधा में कैसे करें इलाज के बारे में विस्तार से बताएंगे। आइए जानते हैं ( ashwagandha ka sevan kaise karen ) इसके बारे में विस्तार से -
गाजियबाद स्वर्ण जयंती के आयुर्वेदाचार्य डॉ. राहुल चतुर्वेदी का कहना है कि अश्वगंधा में कई औषधीय गुण होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इफ्लेमेटरी गुण भरपूर रूप से होते हैं, जो सूजन को कम कर सकता है। सुबह-शाम अश्वगंधा का सेवन दूध के साथ करने से आप फिस्टुला की परेशानी को कम कर सकते हैं। साथ ही यह फल द्वार को फटने से रोक सकता है। इतना ही नहीं, यह संक्रमण को फैलने से भी रोक सकता है।
आयुर्वेद एक्सपर्ट का कहना है कि अश्वगंधा के सेवन से सेल्स को बढ़ने से रोकने में मदद मिलकी है। नियमित रूप से अगर आप अश्वगंधा का सेवन करते हैं, तो इससे नए सेल्स का निर्माण नहीं होता है, जो फिस्टुला को बढ़ने से रोक सकता है।
अश्वगंधा में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। मुख्य रूप से यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो आपकी इम्यून पावर को बूस्ट कर सकता है। इससे संक्रमण से लड़ने में मदद मिल सकती है। ऐसे में यह आपके फिस्टुला संक्रमण को बढ़ने से रोक सकता है।
फिस्टुला के घाव को कम करने में अश्वगंधा काफी प्रभावी हो सकता है। नियमित रूप से अगर आप इसका सेवन करते हैं, तो इससे घाव जल्द से जल्द भर सकते हैं।
फिस्टुला की समस्या होने पर आप आयुर्वेद एक्सपर्ट की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं। इसका सेवन करने के कई तरीके हैं, जैसे-
फिस्टुला की परेशानी को दूर करने के लिए आप अश्वगंधा का सेवन कई तरीकों से कर सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि अगर आपकी परेशानी काफी ज्यादा बढ़ रही है तो इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर ही अश्वगंधा का सेवन करें।