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Non-Communicable Disease : भारत में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, फैटी लिवर की बीमारी और हार्ट से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ये सारी बीमारियां लाइफस्टाइल से जुड़ी हैं। अगर आप लाइफस्टाइल को बेहतर करते हैं, तो काफी हद तक आपकी समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसके अलावा एलोपैथी दवाओं के साथ-साथ अन्य पद्धति द्वारा तैयार होने वाली दवाओं के इस्तेमाल से भी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इन विषयों पर चर्चा के लिए मॉडर्न मेडिसिन के साथ-साथ सभी पांच आयुष सिस्टम आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर एक आयुष कन्वेंशन हुआ, जिसे हेल्थ और वेलनेस कंपनी हमदर्द लैबोरेटरीज आयोजित किया था। इस कन्वेशन में डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCDs) पर चर्चा हुई।
कन्वेंशन में हमदर्द लैबोरेटरीज के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी, मिस्टर अब्दुल मजीद ने कहा, “जैसे-जैसे NCDs भारत में एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चिंता बनती जा रही हैं, अनुमान के मुताबिक इनसे हर साल लगभग 5.8 मिलियन मौतें हो रही हैं, जो आज के समय में काफी चिंता बना हुआ है। इसलिए आयुष सेक्टर को इन बीमारियों के लिए सस्ते और सही इलाज के लिए आगे कुछ अहम कदम उठाने की जरूरत है। इसके अलावा कन्वेशन में मौजूद एक्सपर्ट्स द्वारा नॉन कम्युनिकेबल डिजीज पर चर्चाएं हुईं। आइए जानते हैं कुछ समस्याओं के इलाज के लिए कुछ जरूरी हर्ब्स के बारे में, जिससे काफी हद तक नॉन कम्युनिकेबल परेशानियों को कम किया जा सकता है-
डायबिटीज की परेशानी आज के समय में काफी ज्यादा बढ़ रही है। अगर आप आयुष में इसका इलाज ढूंढ रहे हैं, तो आप कुछ हर्ब्स का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें गुड़मार, अश्वगंधा, लहसुन जैसे हर्ब्स का प्रयोग कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी जड़ी-बूटी के प्रयोग से पहले अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें।
खराब लाइफस्टाइल के चलते लोगों को हाइपरटेंशन की परेशानी काफी ज्यादा हो रही है। इससे निजात पाने के लिए आप आयुष का सहारा ले सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपको खानपान में बदलाव की जरूरत है। साथ ही आपको कुछ समय योग का सहारा लेना चाहिए। वहीं, अश्वगंधा, शहद और कैमोमाइल जैसे हर्ब्स के प्रयोग से आप हाइपरटेंशन को कम कर सकते हैं।
फैटी लिवर आज के समय में काफी कॉमन हो चुका है। इस परेशानी से न सिर्फ बुजुर्ग बल्कि बच्चे भी जूझ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप सही लाइफस्टाइल चुनते हैं, तो आप काफी हद तक फैटी लिवर की परेशानी को दूर कर सकते हैं। वहीं, सना, हलेला, जर्द जैसी जड़ी-बूटियों के प्रयोग से फैटी लिवर की दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। इसका कितनी मात्रा में और कब सेवन करना चाहिए, इसके लिए आपको हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लेने की जरूरत होती है।
कन्वेशन में मौजूद एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज से बचाव करना चाहते हैं, तो अपने खानपान को सही करें। वहीं, बच्चों के खानपान में भी सुधार करें। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप घर में तैयार रागी, बाजरा, हरी सब्जियां इत्यादि खाते हैं, तो आपके और आपके बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी कभी नहीं होगी। वहीं, अगर बाहर की चीजों का सेवन अधिक करते हैं, तो आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। ऐसे में कई तरह की बीमारियां दावत देती हैं, जिसमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं शामिल हैं।
इसके अलावा आप योग का सहारा लें। साथ ही अच्छी और गहरी नींद लें। वहीं, एक्सपर्ट्स की सलाह पर कुछ जड़ी-बूटियों के प्रयोग से भी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज को होने से बचाया जा सकता है।