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Diabetes management rules in Ayurveda: डायबिटीज एक ऐसी हेल्थ प्रॉब्लम है जो पीड़ित व्यक्ति को पूरे जीवन रहती है। यह बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है और बुजुर्गों ही नहीं बल्कि कम उम्र के लोगों में भी डायबिटीज की बीमारी देखी जा रही है। डायबिटीज की बीमारी का खतरा भारत में लोगों को बहुत अधिक बताया जाता है और उसकी वजह लोगों को लगातार बदल रही लाइफस्टाइल है।
डायबिटीज की बीमारी में हाई ब्लड शुगर लेवल की स्थिति कॉम्प्लिकेशन्स (complications related to diabetes) बढ़ाने का काम करती है इसीलिए, डायबिटीज मरीजों को अपनी स्थिति को कंट्रोल करने के लिए ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने की सलाह दी जाती है। डायबिटीज को मैनेज करने के लिए आपको जहां अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए। वहीं, इसके साथ ही उन नेचुरल चीजों का सेवन भी किया जा सकता है जो एंटी-डायबिटीक गुणों (Anti-diabetic properties) से भरपूर होते हैं।
मधुमेह या डायबिटीज की बीमारी को कंट्रोल करने के लिए आयुर्वेद में कुछ नियम (rules in ayurveda for diabetes management) बताए गए हैं। इन नियमों की मदद से आप डायबिटीज को मैनेज कर सकते हैं-
तापमान बदलने और मौसम बदलने के साथ ही स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखायी देने लगता है। इसीलिए, आयुर्वेद में सलाह दी जाती है कि मौसम बदलने के साथ लोग अपने दिनचर्या और डाइटरी हैबिट्स में बदलाव करें। खाने-पीने की आदतों में बदलाव करने से आपको बदलते मौसम के साथ तालमेल बिठाने में मदद होगी और शरीर भी बीमारियों से बचा रह सकेगा।
मौसम बदलने के बाद अपना डाइट प्लान जरूर बदलें और उसमें सीजनल फल और सब्जियों से बनी डिशेज को जगह देँ। इससे आपको सभी पोषक तत्व प्राप्त होगें और आपकी मेडिकल कंडीशन को मैनेज करने में भी मदद होगी।
डायबिटीज के मरीजों के लिए कुछ जड़ी-बूटियों का सेवन बहुत लाभकारी बताया जाता है। इन्हें आप रोजमर्रा की डाइट में अलग-अलग तरीकों से शामिल कर सकते हैं। ऐसी ही कुछ हर्ब्स हैं-
आंवला और सूखे आंवलों का पाउडर
जामुन का फल और उसकी गुठली का पाउडर
तुलसी की पत्तियां
गिलोय
धनिया के बीजों का चूर्ण
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।