बढ़ते प्रदूषण में खांस-खांस कर हो गया है बुरा हाल? इन 5 उपायों से मिलेगी तुरंत राहत

Home Remedies For Cough Due To Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते एयर पॉल्यूशन के कारण लोगों को खांसी की परेशानी हो रही है। इससे बचाव के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खें आजमा सकते हैं।

बढ़ते प्रदूषण में खांस-खांस कर हो गया है बुरा हाल? इन 5 उपायों से मिलेगी तुरंत राहत

Written by Ashu Kumar Das |Published : October 22, 2025 11:53 AM IST

Home Remedies For Pollution Cough: दिल्ली-एनसीआर में दिवाली में हुई आतिशबाजी के बाद हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। दिल्ली, नोएडा समेत आसपास के कई इलाकों में वायु प्रदूषण के कारण एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंच गया है। बढ़ते प्रदूषण का लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी, खांसी, गले में खराश और आंखों से जुड़ी परेशानी (Health issue due to Air Pollution) का सामना करना पड़ रहा है। देश की राजधानी में वायु प्रदूषण के कारण अधिकतर लोग खांसी की समस्या से परेशान हैं। खासतौर पर, रात में सोते समय सबसे ज्यादा खांसी आती है। कई लोगों का खांसी से इतना बुरा हाल है कि खांसने की वजह से उनकी पसलियों में दर्द होने लगा है।

वायु प्रदूषण के कारण होने वाली खांसी से राहत पाने के लिए कुछ लोग मार्केट में मिलने वाले सिरप और कैप्सूल का सहारा ले रहे हैं। लेकिन आप चाहें तो खांसी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू उपायों का सहारा ले सकते हैं। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों को होने वाली खांसी से राहत दिलाने के लिए हम आपको कुछ घरेलू नुस्खें बताने जा रहे हैं, जिनके पहले इस्तेमाल से ही आपको असर दिखने (Khasi se Chutkara Paane ke Upaye) लगेगा।

वायु प्रदूषण के कारण खांसी क्यों होती है- Why does air pollution cause cough

वायु प्रदूषण में मौजूद धूल, धुआं, गैसें और रासायनिक कण हमारे श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर सीधा असर डालते हैं। जब हम सांस लेते हैं, तो ये हानिकारक कण नाक, गले और फेफड़ों में चले जाते हैं। ये धूल के कण शरीर में जाकर एलर्जिक रिएक्शन देते हैं, जिससे खांसी की परेशानी होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कई लोगों को धूल या परागकणों (Pollen) से एलर्जी होती है, जिससे लगातार खांसी हो सकती है। आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में, जिसके इस्तेमाल से आपको खांसी से राहत मिल सकती है।

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1. अदरक-शहद का मिश्रण

प्रदूषण के कारण होने वाली खांसी से राहत दिलाने में अदरक और शहद का मिश्रण फायदेमंद होता है। अदरक में मौजूद जिंजरोल (Gingerol) तत्व गले की सूजन और संक्रमण को कम करता है, जबकि शहद एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है। दिन में 2 बार अदरक- शहद का मिश्रण खाने से खांसी के साथ-साथ गले की खराश की परेशानी भी दूर होती है। इसके लिए 1 टुकड़ा अदरक का लेकर उसमें शहद को लपेट लें। इसे चबा-चबाकर खाएं।

2. तुलसी और काली मिर्च की चाय

तुलसी और काली मिर्च की चाय शरीर को डिटॉक्स करने का काम करती है। तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं। वहीं, काली मिर्च प्रदूषण के कारण होने वाले कफ को ढीला करके, उसे मल के रास्ते बाहर निकालती है। तुलसी और काली मिर्च की चाय बनाने के लिए 5 तुलसी की पत्तियां और 3 काली मिर्च को एक साथ आधा गिलास पानी में उबालें। इसमें थोड़ा शहद मिलाएं और गरमागरम पिएं।

3. गुड़ और अदरक का टुकड़ा

अदरक के एंटी-बैक्टीरियल गुण कफ को पिघलाकर खांसी से राहत दिलाते हैं। वहीं,गुड़ फेफड़ों से धूल के कण निकालने में मदद करता है और खांसी को शांत करता है। छोटे अदरक के टुकड़े पर गुड़ लपेटकर दिन में 2–3 बार चूसें।

4. भाप लेना

भाप लेने से फेफड़ों के वायुमार्ग खुलते हैं और गले में फंसे प्रदूषित कण बाहर निकल जाते हैं। प्रदूषण के कारण होने वाली खांसी को रोकने में भाप लेना बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गर्म पानी में थोड़ा नीलगिरी का तेल (Eucalyptus Oil) डालें। सिर पर तौलिया रखकर 10 मिनट तक भाप लें।

5. हल्दी वाला दूध

खांसी से राहत दिलाने में हल्दी वाला दूध भी फायदेमंद होता है। हल्दी में कर्क्यूमिन (Curcumin) तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट दोनों पाए जाते हैं। ये गले को आराम पहुंचाकर खांसी की परेशानी से राहत दिलाते हैं। रात को सोने से पहले हल्का गुनगुना हल्दी वाला दूध पिया जाए तो इससे खांसी और गले के संक्रमण से राहत मिलती है। इसके लिए गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और रात को सोने से पहले पिएं।

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Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।