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हर्षवर्धन ने की आयुष उपचारों की वकालत, कहा- कोरोनावायरस के बचाव के लिए करें अश्वगंधा, गुडुची, पिप्पली का सेवन।
Corona and Ayurvedic Treatment in Hindi: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को कोविड-19 बीमारी की रोकथाम और उपचार (Covid-19 prevention & Treatment) में आयुर्वेद आधारित उपचारों का बचाव करते हुए, इम्यूनिटी बढ़ाने में इसके प्रभाव की सराहना की। यह पूछे जाने पर कि आयुर्वेद (Ayurvedic treatment of COVID-19) दवाओं के इम्यूनिटी बूस्टर (Ayurveda to boost immunity) के तौर पर प्रामाणिकता अभी साबित नहीं हुई है, इसके बाद भी इन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पर हर्षवर्धन ने कहा, "आयुर्वेद में रोग प्रबंधन को लेकर एक समग्र दृष्टिकोण है, जिसमें सलुटोजेनेसिस नाम की एक प्रमुख एप्रोच है, जो रोग की स्थिति और इसके रोकथाम के उपचार के लिए काम करती है।"
उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक उपचारों को गहराई (Ayurvedic treatment of COVID-19) से किए गए अध्ययनों और प्रायोगिक अध्ययनों के बाद कोविड-19 के इलाज (Covid-19 treatment with ayurveda) या रोकथाम में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी (Coronavirus pandemic) के दौरान लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए परीक्षित प्राकृतिक आयुष उपचारों (Ayush Treatment) के उपयोग के बारे में सार्वजनिक तौर पर बढ़ावा दिया है।
गुडुची, अश्वगंधा, गुडुची और पिप्पली कॉम्बिनेशन और आयुष 64 को लेकर पर्याप्त संख्या में अध्ययन किए गए हैं, जो उनके इम्युनो-मॉड्यूलेटरी, एंटी-वायरल, एंटीपीयरेटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों को साबित करते हैं। इन उपचारों ने सिलिको स्टडीज में कोविड-19 वायरस (Covid-19 Virus) को लेकर अच्छा असर दिखाया है।"
हर्षवर्धन का बयान तब आया है, जब हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने आयुष आधारित नेशनल क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जारी करने को लेकर कड़ी आलोचना की थी। इस प्रोटोकॉल में आयुर्वेद और योग के जरिए हल्के से मध्यम कोविड-19 मामलों की रोकथाम और उपचार करने की सलाह दी गई थी। आईएमए ने सबूत-आधारित दवाओं की बजाय 'प्रायोगिक दवाओं' को बढ़ावा देने के लिए मंत्री की कड़ी आलोचना की थी।
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