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हल्दी के फायदे, साइड इफेक्ट्स और सही मात्रा: एक्सपर्ट से जानिए

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं।

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Written By: Ashu Kumar Das | Updated : July 29, 2026 12:28 PM IST

हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि सदियों से आयुर्वेद में इस्तेमाल की जाने वाली एक औषधीय जड़ी-बूटी है। इसका वैज्ञानिक नाम करकुमा लोंगा है। हल्दी की कई किस्में पाई जाती हैं और हर प्रकार में सक्रिय तत्वों की मात्रा अलग हो सकती है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी भी खाद्य पदार्थ या जड़ी-बूटी को हर बीमारी की दवा नहीं कहा जा सकता; इसके फायदे, सीमाएं और सही उपयोग को वैज्ञानिक संदर्भ में समझना आवश्यक है।

क्या हल्दी सच में इम्यूनिटी बढ़ाती है? किन लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए? दूध में हल्दी मिलाकर पीने के क्या फायदे हैं? क्या रात में हल्दी वाला दूध पीना बेहतर माना जाता है? एक दिन में कितनी हल्दी लेना सुरक्षित है, और क्या ज्यादा मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है? इस लेख में हम इन सभी सवालों के जवाब आयुर्वेदिक दृष्टिकोण, आधुनिक चिकित्सा और उपलब्ध वैज्ञानिक रिसर्च के आधार पर समझेंगे, ताकि आप हल्दी के बारे में तथ्य और मिथक के बीच का फर्क स्पष्ट रूप से जान सकें।

क्या होती है हल्दी?

PubMed Central पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, हल्दी एक प्रकार की जड़ है। भारत में इसका इस्तेमाल सदियों से मसाले, प्राकृतिक रंग और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, खासकर आयुर्वेद, में किया जाता रहा है। हल्दी की सबसे खास बात इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन नाम का प्रमुख बायोएक्टिव यौगिक है। यही यौगिक हल्दी को उसका पीला रंग देता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में करक्यूमिन के एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों पर व्यापक शोध किए गए हैं, जिनकी वजह से हल्दी स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी चर्चा में रहती है।

हल्दी कितने प्रकार की होती है?

दिल्ली स्थित आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा का कहना है कि हल्दी मुख्य रूप से 4 प्रकार की होती है। गुण, रंग और पोषण के आधार पर हल्दी को मुख्य रूप से बांटा गया है।

हल्दी का इस्तेमाल कई तरीके से किया जाता है। हल्दी का इस्तेमाल कई तरीके से किया जाता है।

1. कस्तूरी हल्दी

कस्तूरी हल्दी मुख्य रूप से जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। इसका रंग सामान्य हल्दी की तुलना में हल्का होता है, जबकि इसकी सुगंध कस्तूरी जैसी तेज और मनमोहक होती है। सामान्य हल्दी के विपरीत, कस्तूरी हल्दी का उपयोग आमतौर पर भोजन बनाने में नहीं किया जाता। डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, कस्तूरी हल्दी का इस्तेमाल मुख्य रूप से त्वचा की देखभाल के लिए उबटन और फेस पैक में किया जाता है। इसे मुंहासों, दाग-धब्बों और त्वचा की रंगत निखारने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है। कुछ अध्ययनों में इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए गए हैं, जो त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि, त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए इसका उपयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

2. फिंगर हल्दी/ ताजा हल्दी

फिंगर हल्दी भारतीय घरों में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी है। इसका रंग गहरा पीला से नारंगी होता है और इसकी गांठ उंगली जैसी लंबी होती है, इसलिए इसे फिंगर हल्दी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से मसाले के रूप में भोजन में उपयोग की जाती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, फिंगर हल्दी में करक्यूमिन अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसी कारण इस पर सूजन, इम्यूनिटी, एंटीऑक्सीडेंट गुण और पाचन स्वास्थ्य से जुड़े लाभों को लेकर कई वैज्ञानिक शोध किए गए हैं। हालांकि इसे हल्दी का किस व्यक्ति को कितना मिलेगा ये उसकी स्वास्थ्य स्थिति और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है। इसलिए इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

काली हल्दी भारत के कुछ ही हिस्सों में पाई जाती है। काली हल्दी भारत के कुछ ही हिस्सों में पाई जाती है।

3. काली हल्दी

काली हल्दी बाहर से मटमैले/भूरे रंग की और अंदर से गहरे नीले-काले या बैंगनी रंग की होती है। भारत में यह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। सामान्य हल्दी की तुलना में इसकी रासायनिक संरचना अलग होती है और इसमें करक्यूमिन की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। हालांकि, इसमें पाए जाने वाले अन्य बायोएक्टिव यौगिकों पर वैज्ञानिक शोध जारी हैं। डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में काली हल्दी का उपयोग कई औषधीय जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल जोड़ों के दर्द, सूजन और श्वसन संबंधी कुछ समस्याओं में किया जाता रहा है। हालांकि, इन उपयोगों की पुष्टि के लिए अभी और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

4. सफेद हल्दी

सफेद हल्दी को अम्बा हल्दी भी कहा जाता है। इसका रंग हल्का सफेद या पीला होता है और इसे काटने पर कच्चे आम जैसी हल्की खुशबू आती है, इसलिए इसे अम्बा हल्दी के नाम से जाना जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में भी पाई जाती है। आयुर्वेद में सफेद हल्दी को गर्म तासीर वाला माना जाता है। यही वजह है कि इसका सेवन आमतौर पर सीमित मात्रा में किया जाता है। कई लोग इसे अचार, चटनी, सलाद या पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इसके औषधीय गुणों और स्वास्थ्य लाभों पर अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

हल्दी में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं?

हल्दी में कई गुण मौजूद होते हैं, जो अलग-अलग तरीकों से शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

गुणक्या काम करती हैकैसे फायदा देती है
एंटी-वायरलवायरस से लड़ने में मददगार हैसर्दी, जुकाम, फ्लू में इम्यूनिटी बूस्ट करती है।
एंटी-इंफ्लेमेटरीसूजन कम करने में मददगार हैजोड़ों का दर्द, गठिया, सूजन वाली बीमारियों में राहत दिलाती है।
एंटी-फंगलफंगस खत्म कर सकती हैदाद, खाज, स्किन इंफेक्शन में असरदार होती है।
हेपेटोप्रोटेक्टिवलिवर की रक्षा कर सकती हैलिवर और लिवर के आसपास की गंदगी को हटाने में मददगार है।
एंटी-बैक्टीरियलबैक्टीरिया की संख्या को घटाती हैघाव भरना, पिंपल्स, इंफेक्शन में मदद होती है।
व्रण रोपणघाव को भरने की क्षमता रखती हैकोलेजन का निर्माण करती है। त्वचा लंबे समय तक जवां दिखती है।
ब्लड प्यूरीफायरखून साफ करने में मददगार होती हैपिंपल्स, एक्जिमा, स्किन एलर्जी में फायदा पहुंचाती है।
इम्यूनो-मॉड्यूलेटरइम्यूनिटी को मजबूत कर सकती हैइम्यून सिस्टम बैलेंस करे, सर्दी-जुकाम से बचाव करे।
एंटीऑक्सीडेंटफ्री रेडिकल्स से बचाव कर सकती हैबुढ़ापा धीमा करे, सेल डैमेज रोकने में मदद करती है।

हल्दी के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद?

दिल्ली स्थित ब्लूम क्लिनिक की आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अंजना कालिया बताती हैं कि आयुर्वेद में हल्दी को 'हरिद्रा' कहा गया है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे त्वचा के स्वास्थ्य, घाव भरने और शरीर के संतुलन को बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी माना गया है। हल्दी का उपयोग सदियों से कई आयुर्वेदिक दवाओं में अलग अलग तरह से होता रहा है।

हल्दी का खून को साफ करती है। हल्दी का खून को साफ करती है।

1. रक्त शोधन

आयुर्वेद के अनुसार, हल्दी में रक्तशोधक गुण होते हैं। माना जाता है कि यह शरीर में रक्त को शुद्ध करने और त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होती है।

2. कफ-वात का संतुलन

आयुर्वेद में हल्दी की तासीर गर्म मानी गई है। इसलिए इसे कफ और वात दोष को संतुलित करने में उपयोगी माना जाता है। यही कारण है कि पारंपरिक रूप से सर्दी, खांसी, जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में हल्दी का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और अन्य सक्रिय तत्व इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि, इम्यूनिटी पर इसका कितना असर होगा यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करता है।

4.घाव भरने में सहायक

आयुर्वेद में हल्दी को 'व्रण रोपण' यानी घाव भरने में सहायक औषधि माना गया है। पारंपरिक रूप से इसका उपयोग छोटे घावों और त्वचा संबंधी समस्याओं में किया जाता रहा है। आधुनिक शोधों में भी हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों पर अध्ययन किए गए हैं, हालांकि इसे किसी भी घाव के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

हल्दी में पाए जाने वाले पोषक तत्व

हल्दी खाने के फायदे, तरीका और नुकसान

हल्दी पर रिसर्च क्या कहती है?

हल्दी पर लंबे समय से वैज्ञानिक रिसर्च हो रही है। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन इसका प्रमुख सक्रिय तत्व माना जाता है। पिछले कुछ दशकों में करक्यूमिन पर 10,000 से अधिक वैज्ञानिक शोध और अध्ययन प्रकाशित हो चुके हैं। इन अध्ययनों में इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर चर्चा की गई है। हालांकि, कई मामलों में अभी और बड़े तथा उच्च गुणवत्ता वाले मानव अध्ययनों की आवश्यकता है।

1. शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी है

हार्वर्ड हेल्थकी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी बताती है कि करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इसी वजह से ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी कुछ स्थितियों में इसके संभावित लाभों पर रिसर्च की गई है। हालांकि, डायबिटीज या अन्य बीमारियों के इलाज के रूप में इसे स्थापित नहीं माना जाता।हल्दी एक शक्तिशाली एंटी- इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर चीज है। हल्दी का करक्यूमिन शरीर में मौजूद NF-kB नाम के अणु को ब्लॉक करने में मदद करता है। इसलिए हल्दी को जोड़ों के दर्द और डायबिटीज में फायदेमंद माना गया है।

2. एंटीऑक्सीडेंट का खजाना

Oxidative Medicine and Cellular Longevity में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ शरीर के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों की गतिविधि को भी बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, यह कहना कि हल्दी खाने से सर्दी, खांसी या जुकाम पूरी तरह से ठीक हो जाता है, वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों से सिद्ध नहीं है।

3. दिमाग को पहुंचाती है फायदा

कुछ शोध बताते हैं कि करक्यूमिन रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत के कार्य में सुधार करने में मदद कर सकता है। इससे हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना कि हल्दी ब्लड प्रेशर नियंत्रित करती है, धमनियों में जमा फैट को कम करती है या हार्ट अटैक और ब्लॉकेज को रोकती है, इसके लिए अभी पर्याप्त मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

हल्दी में एंटी- इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। हल्दी में एंटी- इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

4. हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद

साल 2014 में Journal of Psychopharmacology पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, हल्दी का करक्यूमिन हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है। करक्यूमिन ब्लड वेसल्स के एंडोथीलियम फंक्शन को बेहतर करता है। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है और खून की धमनियों में जमने वाला फैट भी कम होता है। जिससे हार्ट अटैक और हार्ट के आसपास बनने वाली ब्लॉकेज को घटाने में मदद मिलती है।

5. कैंसर से करता है बचाव

लैब और जानवरों पर किए गए अध्ययनों में करक्यूमिन ने कुछ प्रकार की कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करने और उन्हें नष्ट करने की क्षमता दिखाई है। हालांकि, इंसानों में हुए अध्ययनों के आधार पर यह साबित नहीं हुआ है कि हल्दी कैंसर का इलाज कर सकती है या कैंसर होने से पूरी तरह बचा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के इलाज में करक्यूमिन की भूमिका पर अभी भी रिसर्च जारी है। इसलिए इसे कभी भी कीमोथेरेपी या डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। दिल्ली के आर्ट ऑफ हेल्थ कैंसर सेंटर के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मंदीप सिंह मल्होत्रा भी इस बात को मानते हैं कि कैंसर के इलाज में हल्दी फायदेमंद होती है। हालांकि यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि हल्दी से कैंसर का इलाज हो सकता है या हल्दी पूरी तरह से कैंसर को रोक सकती है। कीमो के साथ सपोर्ट के तौर पर हल्दी के बारे में रिसर्च चल रही है।

हल्दी खाने के सेहत को मिलने वाले फायदे

आयुर्वेदिक डॉ. अंजना कालिया का कहना है कि हल्दी खाने से शरीर को एक नहीं बल्कि कई प्रकार के फायदे मिलते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

1. शरीर की सूजन को कम करें

एक्सपर्ट बताते हैं कि हल्दी का सबसे बड़ा पावर इसका एंटी-इन्फ्लेमेटरी होना है। इसके अंदर पाया जाने वाला करक्यूमिन शरीर में चल रही अंदरूनी सूजन को शांत करता है। आजकल की लाइफस्टाइल में तनाव, गलत खान-पान और प्रदूषण की वजह से शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है। यही सूजन धीरे-धीरे हार्ट की बीमारियों, टाइप-2 डायबिटीज, गठिया और कुछ तरह के कैंसर का रास्ता बन जाती है। हल्दी को डाइट में शामिल करने से शरीर की अंदरूनी सूजन कम होती है।

हल्दी पाचन तंत्रिका को सुधारती है। हल्दी पाचन तंत्रिका को सुधारती है।

2. पाचन की परेशानी कम करें

कुछ अध्ययनों और आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, हल्दी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है। यह पित्त के स्राव को बढ़ावा देने और पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। सीमित शोध यह भी बताते हैं कि यह आंतों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, गैस, अपच या अन्य पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के रूप में इसे स्थापित नहीं माना जाता।

3. लिवर को डिटॉक्स करती है

कुछ प्रीक्लिनिकल और सीमित अध्ययनों में करक्यूमिन के हेपेटोप्रोटेक्टिव (लिवर की सुरक्षा करने वाले) गुण देखे गए हैं। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करके लिवर कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हल्दी लिवर को डिटॉक्स करती है, क्योंकि शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन मुख्य रूप से लिवर और किडनी खुद स्वयं करते हैं।

4. दिल और दिमाग दोनों के लिए अच्छी

कुछ शोध बताते हैं कि करक्यूमिन रक्त वाहिकाओं के कार्य और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। वहीं, मस्तिष्क की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य में इसकी संभावित भूमिका पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हुआ है कि हल्दी हार्ट अटैक, स्ट्रोक या अल्जाइमर जैसी बीमारियों को रोकती है।

5. त्वचा के लिए फायदेमंद

हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण त्वचा के लिए भी फायदेमंद होते हैं। हल्दी त्वचा की चमक को बनाए रखने में मदद करती है। त्वचा पर रोजाना हल्दी लगाने से चेहरे पर मौजूद गंदे बैक्टीरिया धीरे- धीरे कम होने लगते हैं। हल्दी के एंटी- इंफ्लेमेटरी गुण मुंहासों से जुड़ी लालिमा, सूजन और खुजली कम करते हैं।

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6. डायबिटीज में लाभकारी

हल्दी के पोषक तत्व शरीर का ब्लड शुगर को मैनेज करने में भी मददगार होते हैं। रोजाना हल्दी खाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार आता है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि डायबिटीज में रोजाना सिर्फ हल्दी ही खाई जाए और हल्दी को इलाज मानकर दवा बंद कर देनी चाहिए। जो डायबिटीज के मरीज ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए दवा खा रहे हैं, उन्हें इसका सेवन करते रहना चाहिए।

7. लिवर के लिए उपयोगी

लिवर शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।

1 दिन में कितनी हल्दी खानी चाहिए?

जयपुर स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की डाइटिशियन प्रांजल कुमत कहती हैं- हल्दी रसोई की रानी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि जितनी मर्जी डाल लो। ज्यादा हल्दी फायदा नहीं, नुकसान कर सकती है। 1 दिन में किसी भी प्रकार से 1/2 से 1 छोटी चम्मच यानी 2 से 3 ग्राम हल्दी काफी है। खाने में 1 चुटकी से 1/2 चम्मच तक डालना तो एकदम सही है। अगर आप हल्दी वाला दूध या काढ़ा पीते हैं तो भी 1/4 से 1/2 चम्मच हल्दी एक कप के लिए से ज्यादा न करें। मात्रा में बात करें तो एक दिन में 4 ग्राम तक हल्दी पाउडर का सेवन करना फायदेमंद होता है।

हल्दी से जुड़े सवाल-जवाब

हल्दी के बारे में लोगों के दिमाग में कई तरह के सवाल आते हैं। आइए जानते हैं यह सवाल और उनके जवाब।

सवाल 1: हल्दी खाने का सबसे सही समय कौन सा है?

जवाब: हल्दी को आप दिन में कभी भी ले सकते हैं, लेकिन रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ लेना सबसे बढ़िया माना जाता है। गर्म दूध और हल्दी का कॉम्बो नींद अच्छी लाता है और इम्यूनिटी को बूस्ट करता है। खाने में तो आप इसे दोपहर और रात दोनों वक्त इस्तेमाल कर सकते हैं। खाली पेट काढ़े के रूप में लेने से सूजन और इन्फेक्शन में जल्दी राहत मिलती है।

सवाल 2: कच्ची हल्दी और पाउडर वाली हल्दी में कौन सी बेहतर है?

जवाब: दोनों के फायदे लगभग एक जैसे हैं। कच्ची हल्दी में नमी ज्यादा होती है इसलिए इसका असर थोड़ा तेज लगता है, खासकर जूस या काढ़े में। लेकिन पाउडर वाली हल्दी साल भर मिलती है और खाने में इस्तेमाल करना आसान है। अगर मिल जाए तो सर्दियों में 2 से 3 इंच कच्ची हल्दी का टुकड़ा इस्तेमाल कर लें, बाकी समय बढ़िया क्वालिटी का हल्दी पाउडर काफी है।

सवाल 3: क्या हर कोई हल्दी खा सकता है?

जवाब: ज्यादातर लोगों के लिए सीमित मात्रा में हल्दी बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन अगर आपको पथरी की समस्या है, ब्लड थिनर की दवा चल रही है, या आप प्रेगनेंट हैं तो ज्यादा हल्दी लेने से पहले डॉक्टर से पूछ लें। ज्यादा मात्रा से पेट में जलन या एसिडिटी हो सकती है।

सवाल 4: हल्दी को शरीर में अच्छे से अब्सॉर्ब कैसे कराएं?

जवाब: आयुर्वेदिक डॉ. अंजना कालिया का कहना है कि अकेली हल्दी शरीर में पूरी तरह अब्सॉर्ब नहीं होती है। इसका सीक्रेट है काली मिर्च। हल्दी के साथ चुटकी भर काली मिर्च और थोड़ा घी या तेल मिला लें। काली मिर्च में पाया जाने वाला पाइपेरिन हल्दी के करक्यूमिन को 2000% तक बढ़ा देता है। तभी असली फायदा मिलेगा।

सवाल 5: क्या अस्थमा में हल्दी फायदा करती है?

हां, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में हल्दी काफी मददगार मानी जाती है। अस्थमा में अक्सर छाती में कफ जम जाता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। हल्दी इस जमें हुए कफ को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे सांस लेना थोड़ा आसान हो जाता है और अस्थमा के लक्षण भी कम लगते हैं।

हल्दी पित्त को बढ़ाती है। हल्दी पित्त को बढ़ाती है।

किन लोगों को हल्दी से सावधानी बरतनी चाहिए?

हल्दी बेशक गुणों से भरपूर हो, लेकिन फिर भी कुछ लोगों को इसका सेवन करने की मनाही होती है। आइए आगे जानते हैं किन लोगों को हल्दी का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

  1. पथरी के मरीज- दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिल के डॉ. प्रशांत कुमार का कहना है कि हल्दी में ऑक्सलेट की मात्रा काफी होती है। अगर आपको किडनी या पित्त की पथरी की समस्या है तो ज्यादा हल्दी खाने से पथरी बढ़ सकती है। जो लोग पथरी को गलाने के लिए किसी प्रकार की दवा का सेवन कर रहे हैं उन्हें हल्दी का खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  2. ब्लड थिनर लेने वाले लोग- हल्दी खून को पतला करने का काम करती है। जो लोग पहले से किसी प्रकार की खून को पतला करने वाली दवा का सेवन कर रहे हैं उन्हें हल्दी ज्यादा मात्रा में बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।
  3. प्रेगनेंट और ब्रेस्टफीडिंग महिलाएं- खाने में थोड़ी हल्दी बिल्कुल ठीक है, लेकिन सप्लीमेंट या बहुत ज्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है। ये गर्भाशय में सिकुड़न ला सकती है। इसलिए प्रेगनेंसी में हल्दी की हाई डोज से बचें और डॉक्टर की सलाह से ही लें।
  4. लो ब्लड शुगर या डायबिटीज के मरीज- हल्दी ब्लड शुगर को कम करती है। अगर आप डायबिटीज की दवा ले रहे हैं तो हल्दी के साथ शुगर बहुत ज्यादा गिर सकती है। ऐसे में शुगर लेवल चेक करते रहें और डोज को लेकर डॉक्टर से बात करें।
  5. आयरन की कमी वाले लोग- हल्दी शरीर में आयरन के अब्सॉर्प्शन को कम करती है। अगर आपको एनीमिया है तो हल्दी और आयरन की दवा या खाने के बीच 2-3 घंटे का गैप रखें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में हल्दी से जुड़े बताए गए फायदे आम जानकारी और उपलब्ध रिसर्च पर आधारित हैं। हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी बीमारी के इलाज के लिए सिर्फ हल्दी पर निर्भर न रहें और अगर आपको कोई बीमारी है, आप किसी खास प्रकार की दवा का सेवन कर रहे हैं या प्रेग्नेंट तो हल्दी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से बात करें।