मामूली समझकर काकोंदुबर के फलों को नहीं लगाता कोई हाथ,लेकिन एनिमिया से लेकर डायरिया का है ये आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद, यूनानी और पारम्परिक चीनी चिकित्सा पद्धतियों में इसे बहुत गुणकारी बताया जाता है। पढ़ें जंगली गूलर के सभी फायदे यहां।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 18, 2022 3:27 PM IST

आयुर्वेद में पेड़ों से प्राप्त होनेवाली वस्तुएं  जैसे फल, फूल, पत्तियां और पत्तियों के अलावा छाल से भी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जाता है। ऐसा ही एक पेड़ है काकोंदुबर (Kokodumbar )या जंगली अंजीर। इसे आम भाषा में जंगली गूलर, बेडू, दादुरी, कठगूलर और पगवारा के नाम से जाना जाता है। यह गूलर का एक प्रकार है। वहीं, अंग्रेजी में वाइल्ड फिग (Wild fig) या फाइकस हिस्पिडा कहा जाता है।

आमतौर पर यह नदियों और नहरों के किनारे खुद-ब-खुद उगती है और लोगों द्वारा इसकी खेती या देखभाल नहीं की जाती है। जंगली पेड़ होने के कारण इसे मामूली या बेकार समझा जाता है लेकिन, आयुर्वेद, यूनानी और पारम्परिक चीनी चिकित्सा पद्धतियों में इसे बहुत गुणकारी बताया जाता है। इसके फल देखने में अंजीर की तरह होते हैं और पकने के बाद उनका स्वाद हल्का कसैला,थोड़ा मीठा और कम रसीला या सूखा होता है। इस लेख में आज इसी काकोंदुबर गूलर के  स्वास्थ्य लाभों के बारे में।

काकोंदुबर गूलर के स्वास्थ्य लाभ

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसमें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। विटामिंस, मिनरल्स के अलावा आयरन, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे अतिआवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन न्यूट्रिएंट्स की प्रचुर मात्रा के कारण काकोंदुबर का सेवन एनिमिया (Anemia), स्लीपिंग डिसॉर्डर (Sleeping disorder) और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओंमें भी लाभकारी माना जाता है। वहीं, काकोंदुबर के कुछ स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार भी हैं-

स्किन प्रॉब्लम्स

कठगूलर के फल का इस्तेमाल स्किन प्रॉब्लम्स से राहत पाने के लिए किया जा सकता है। काकोंदुबर के पत्तों को तोड़ने से उसमें सफेद रंग का दूधिया लिक्विड निकलता है। इसी दूध को स्किन प्रॉब्लम वाली जगह पर लगाने से धीरे-धीरे समस्या कम होने लगती है। यह स्किन इंफेक्शन्स(skin infections) को भी कम करता है।

नेचुरल पेनकिलर

जंगली गूलर या काकोंदुबर में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं तो दर्द से आराम दिलाते हैं। इसीलिए, बदन दर्द, मसल्स पेन और अन्य तकलीफों से आराम दिलाने वाले नुस्खों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

सर्दी-खांसी को करती है दूर

खांसी किसी भी मौसम में लोगों को हो सकती है। मौसम बदलने के साथ ही लोगों को सर्दी-खांसी की समस्या हो सकती है। काकोदुंबर या गूलर के सेवन से सर्दी-खांसी जैसी मौसमी समस्याओं से आराम मिल सकता है। इसके कोमल और छोटे पत्तों को पीस कर इसमें दूध के साथ पकाया जाता है और उसके बाद पिप्पली के पाउडर के साथ मिलाकर इसका सेवन किया जाता है। इस नुस्खे को सर्दी-खांसी और सांस फूलने जैसी समस्याओं से आराम दिलाने वाला तरीका माना जाता है।

डायरिया

काकोंदुबर के दूध को बताशे या मिश्री के साथ खाने से दस्त या डायरिया की समस्या में सेवन करने का नुस्खा तैयार किया जाता है। लेकिन, अगर आप इस नुस्खे को आजमाना चाहते हैं तो इससे पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।