Advertisement

त्योहारों में मिठाई-नमकीन खाकर नहीं पड़ना है बीमार तो मान लें एक्सपर्ट की ये 3 टिप्स, पेट रहेगा टनाटन

त्योहारों के दौरान खाना-पीना जश्न का हिस्सा होता है। लेकिन, गलत तरीके के खान-पान के कारण लोगों की तबियत भी बिगड़ सकती हैं। डाइजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचने के लिए आप आयुर्वेद के ये उपाय अपना सकते हैं।  

Written By Sadhna Tiwari
Updated : August 25, 2025 9:52 PM IST

How to manage doshas-त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है और जल्द ही नवरात्री और दिवाली जैसे बढ़े त्योहारों की तैयारियां भी हर घर में शुरु हो जाएंगी। त्योहारों पर शॉपिंग और घर की सजावट के साथ-साथ जिस चीज पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है वह है खाना-पीना। त्योहारों में लोग जमकर मिठाइयां, पकवान और नमकीन जैसी चीजें खाते हैं। तरह-तरह की चीजों को खाने के कारण लोगों के शरीर में वात, पित्त और कफ जैसे प्रकृति दोषों का संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। त्योहारों के इस सीजन में बीमार पड़ने से बचने और शरीर में त्रिदोषों को बैलेंस करने के लिए आपको क्या करना चाहिए, उसी से जुड़ीं कुछ टिप्स दे रही हैं आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ.चंचल शर्मा। आइए जानते हैं क्या सलाह देती हैं एक्सपर्ट।

क्यों बिगड़ता है शरीर का प्रकृति दोष?

डॉ चंचल शर्मा बताती हैं कि त्योहारों में खाए जाने वाले इन पकवानों का नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे दिखना शुरू हो जाता है। त्योहारों में खाए जाने वाले मेवे, मिठाइयां और लस्सी आदि के कारण शरीर में वात दोष का स्तर बढ़ सकता है। मालपुआ, कचौड़ियां,  मसालेदार पकवान वगैरह खाने से शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है। जब भी किसी व्यक्ति के शरीर में इन दो दोषों का संतुलन बिगड़ता है तो शरीर में सुस्ती, कब्ज, एसिडिटी, पेट दर्द जैसी समस्या बनी रहती है।

Advertisement

वात-दोष को बढ़ने से कैसे रोकें?

आप जितना अधिक मसालेदार और तला हुआ भोजन करेंगे आपके शरीर में वात दोष का स्तर उतना ज्यादा बढ़ जायेगा। त्योहारों के समय सबके घर में इसी तरह के पकवान बनते हैं, ऐसे समय में आपको एक निश्चित मात्रा में ही उसका सेवन करना चाहिए। अगर अपनी भूख के हिसाब से नहीं बल्कि सेहत को ध्यान में रखते हुए इसका सेवन करें, इससे आप पेट में होने वाली समस्या से अपना बचाव कर सकते हैं।

FAQ'S

1. प्रकृति दोष कितने प्रकार के होते हैं?

शरीर में 3 तरह के प्रकृति दोष होते हैं- वात दोष, पित्त दोष और कफ दो।  

2. पित्त दोष बढ़ने के लक्षण क्या हैं?

शरीर में पित्त दोष बढ़ने से एसिडिटी, पेट में गैस, कॉन्स्टिपेशन और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

जब भी आप कुछ तला हुआ खाते हैं तो वह आपके पाचन क्रिया के साथ आपकी त्वचा को भी नाकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों को कम से कम खाएं और खाने के बाद पानी जरूर पिएं यह कफ दोष को नियंत्रित रखता है।

Advertisement

इन चीजों के साथ आप छाछ, लस्सी, हर्बल ड्रिंक्स और दही खा सकते हैं। ये सभी डाइजेशन भी बढ़ाते हैं औरशरीर में वात और पित्त दोषों को संतुलित रखने में मददकरते हैं।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।