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Ayurvedic Remedies For Diaper Rashes: शिशुओं की स्किन काफी कोमल और सेंसिटिव होती है। इसीलिए बच्चों को हमेशा सॉफ्ट कपड़े पहनाए जाते हैं। इसी तरह बच्चे की स्किन पर किसी भी तरह की क्रीम, साबुन या लोशन का इस्तेमाल करने से पहले भी इस बात की तसल्ली की जाती है कि वह प्रॉडक्ट पूरी तरह से सुरक्षित हो और बच्चे की कोमल स्किन पर लगाने के लिए पूरी तरह केमिकल-फ्री है। हालांकि, कई बार देखा जाता है कि लम्बे समय तक डायपर में रहने से शिशुओं की स्किन को भी नुकसान (ways diapers damages skin) होता है। गीले डायपर में रहने से अक्सर बच्चों की स्किन छिल जाती है। नमी, पसीने और डायपर में इस्तेमाल होने वाले फाइबर या प्लास्टिक के सम्पर्क में आने से बच्चे की स्किन कट जाती और वहां घाव हो जाते हैं।( side effects of wearing diapers for long time)
इन रैशेज को डायपर रैश (Diaper Rashes) कहा जाता है और बच्चों को इनसे काफी अधिक तकलीफ होती है। डायपर रैशेज की वजह से बच्चे अक्सर बहुत अधिक रोते हैं और इरिटेट हो जाते हैं। डायपर रैशेज की वजह से होने वाली समस्याओं से आराम पाने के लिए आप कुछ घरेलू चीजों (home remedies to get relief from diaper rashes) का इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां हम लिख रहे हैं कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्खों के बारे में।(Easy Ayurvedic Remedies For Diaper Rashes In Hindi)
त्वचा की जलन, सूजन और घाव को कम करने के लिए एलोवेरा जेल (Aloe Vera Gel) का इस्तेमाल किया जा सकता है। नेचुरल होने के साथ-साथ यह बच्चे की स्किन पर काफी सॉफ्ट इफेक्ट्स डालता है और सौम्यता से स्किन को हील होने में मदद करते हैं। डायपर रैशेज होने पर बच्चे की स्किन पर एलोवेरा का जेल लगाएं। इससे जलन से ठंडक मिलती है और रैशेज की वजह बनने वाले बैक्टेरिया भी कम होते हैं। (How to use Aloe Vera gel on babies skin)
नेचुरल औषधियों में नारियल के तेल(Coconut Oil) का इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। नारियल के तेल में कई प्रकार के एंटीफंगल (anti fungal), एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व स्किन से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाते हैं। डायपर रैशेज होने के बाद भी नारियल का तेल रैशेज वाली जगह पर लगाएं। उसके बाद बच्चे को कॉटन के कपड़े पहनाएं। दिन में 2-3 बार ऐसा करें। इससे बच्चे को आराम मिलता है।