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Written By: Pallavi | Published : August 23, 2022 3:10 PM IST
चिरायता एक लोकप्रिय आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका स्वाद कड़वा होता है। आयुर्वेद में इसे ज्वरनाशक कहा जाता है यानी कि जो बुखार कम कर देता है। इसके अलावा इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट, हेपेटोप्रोटेक्टिव, लैक्सटेसिव, हाइपोग्लाइकेमिक और एंटाएसिडिक गुण होता है। ये तमाम गुण शरीर की अलग-अलग स्थितियों और बीमारियों में निपटने में मदद करते हैं। वो कैसे, तो आइए हम आपको बताते हैं कि चिरायता कौन कौन सी बीमारी में काम आता है और इसके फायदे क्या हैं।
चिरायता हाइपोग्लाइकेमिक है जो कि ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। चिरायता इंसुलिन के प्रोडक्शन को तेज करता है और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। यह स्टार्च के ग्लूकोज में टूटने को कम करने में मदद करता है जो बदले में डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद करता है। इस तरह ये डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है।
चिरायता पाचन गुण इसे सभी पाचन समस्याओं के लिए एक अचूक समाधान बनाते हैं। ये एलिमेंटरी कैनाल में गैस के निर्माण को कम करता है, इस प्रकार पेट फूलना, कब्ज और सूजन में कमी लाता है। ये जड़ी बूटी एंटासिड की तरह भी काम करता है और पेट में अत्यधिक एसिड के गठन को रोकता है जिससे अपचन, अल्सर, गैस्ट्र्रिटिस का इलाज होता है और शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण को बढ़ावा मिलता है।
बुखार में चिरायता के पत्ते बड़ा कारगर तरीके से काम करता है। ये रिंग स्टेज पर मलेरियल पैरासाइट के विकास में बाधा डालते हैं और इसलिए संक्रमण को बढ़ने से रोकते हैं। मलेरिया के अलावा, चिरता विभिन्न प्रकार के बुखार के इलाज में मदद करते हैं। यह शरीर के दर्द, सिरदर्द और बुखार के अन्य अंतर्निहित लक्षणों को भी कम करता है।
चिरायता के कीड़े होने पर कारगर तरीके से काम करता है। यह पेट में कीड़ों की गतिविधि को दबा देता है और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। आयुर्वेद में कीड़े को क्रिमी कहा जाता है। वे आंत में बढ़ते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में चिरायता को कृमि-रोधी माना जाता है जिससे इंफेक्शन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। पेट में कीड़ा होने पर चिरायता के पत्ते को पीस लें और इसमें गुड़ मिला कर लें।
एनीमिया होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है। ऐसे में एनीमिया के लक्षण जैसे कमजोरी और सिर दर्द में यह कारगर तरीके से काम करता है। ऐसे में चिरायता के पत्ते को पीस लें और इसमें मिश्री मिला कर इसका जूस बना लें। अब इसका सेवन करें। ये शरीर में खून को बढ़ाता है और एनीमिया के लक्षणों को कम करने में मददगार है।
नीम के पत्तों की तरह, चिरायता में भी शक्तिशाली हेपेटोप्रोटेक्टिव और हेपेटोस्टिमुलेटिव गुण होते हैं जो इसे पीलिया के दौरान एक जादुई उपाय बताता है, ये लिवर से ज्यादातर प्रभावित करता है। ये शक्तिशाली जड़ी बूटी पित्त को स्रावित करके लिवर के कामकाज को सहायता प्रदान करती है जो बदले में लिवर एंजाइमों को सामान्य स्तर तक नीचे आने में मदद करता है। यह लिवर को साफ और डिटॉक्सीफाई भी करता है और इसके काम काज को बेहतर बनाता है।