पित्त दोष बढ़ने से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं, आयुर्वेदाचार्य ने कहा- इन लक्षणों को इग्नोर करना होता है खतरनाक
Diseases caused by pitta dosha in ayurveda: आयुर्वेदिक डॉक्टर का कहना है कि किसी व्यक्ति के शरीर में पित्त बढ़ रहा है, तो इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण होते हैं। इसमें शामिल हैः ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना- खाने में बहुत अधिक तीखा, खट्टा और नमकीन शामिल किया जाए, तो इसके कारण पित्त बढ़ने की समस्या होती है।
Written by Ashu Kumar Das|Published : February 16, 2026 8:58 AM IST
Diseases caused by pitta dosha in ayurveda: आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ से मिलकर बना है। इनमें से पित्त दोष शरीर में पाचन, मेटाबॉलिज्म, तापमान और ऊर्जा को नियंत्रित करता है। जब पित्त संतुलित रहता है तो शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन जब पित्त बढ़ जाता है (Pitta Imbalance), तो कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. चचंल शर्मा का कहना है कि पित्त अग्नि और जल तत्व से बना माना जाता है। यह शरीर में पाचन क्रिया, हार्मोन संतुलन, त्वचा की चमक, बुद्धि और शरीर के तापमान को नियंत्रित करता (Pitaa Kya Kaam Karta hai) है। जब शरीर में अत्यधिक गर्मी, अम्लता या चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, तो इसे पित्त में बढ़ोतरी का संकेत माना जाता है।
पित्त बढ़ने के मुख्य कारण
आयुर्वेदिक डॉक्टर का कहना है कि किसी व्यक्ति के शरीर में पित्त बढ़ रहा है, तो इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण होते हैं। इसमें शामिल हैः
ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना- खाने में बहुत अधिक तीखा, खट्टा और नमकीन शामिल किया जाए, तो इसके कारण पित्त बढ़ने की समस्या होती है।
अत्यधिक धूप और गर्मी- डॉ. चंचल शर्मा का कहना है कि जो लोग फील्ड वर्क करते हैं। यानि की लंबे समय तक धूप में रहते हैं, तो इससे उनके शरीर के अंदर की गर्मी बढ़ती है। शरीर के अंदर गर्मी सामान्य से ज्यादा हो जाए, तो ये पित्त को बढ़ा सकती है।
ज्यादा तनाव और गुस्सा- आजकल युवाओं में स्क्रीन टाइम, काम का प्रेशर ज्यादा होने के कारण मानसिक तनाव और गुस्सा बढ़ रहा है। ये दोनों कारक भी पित्त को बढ़ावा देते हैं।
चाय-कॉफी और जंक फूड- कैफीन और प्रोसेस्ड फूड पाचन तंत्र को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इससे पित्त बढ़ने की समस्या होती है।
पित्त बढ़ने के लक्षण
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पित्त बढ़ने से होने वाली बीमारियां
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस- पित्त का सीधा कनेक्शन हमारी पाचन अग्नि से है। आयुर्वेदिक डॉक्टर बताती हैं कि पित्त बढ़ने से पेट में अम्लता बढ़ जाती है, जिससे सीने में जलन और गैस की समस्या होती है।
त्वचा से जुड़ी परेशानी- पित्त बढ़ने की परेशानी का सामना करने वाले लोगों में त्वचा से जुड़ी बीमारी भी देखी जाती हैं। पित्त असंतुलन से मुंहासे, एलर्जी, रैशेज और फोड़े-फुंसी हो सकते हैं।
लिवर से जुड़ी बीमारी- अत्यधिक पित्त लिवर पर असर डाल सकता है, जिससे पीलिया जैसी समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में फैटी लिवर की समस्या भी पित्त असंतुलन का संकेत होता है।
बालों की समस्या- जैसा कि हमने ऊपर बात की पित्त बढ़ने पर शरीर का तामपान ज्यादा हो जाता है। शरीर के तामपान ज्यादा होने का असर बालों पर भी देखा जाता है। शरीर में गर्मी बढ़ने से बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।
माइग्रेन- कई लोगों में पित्त बढ़ने पर तेज सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या हो सकती है।
पित्त को कैसे मैनेज करें?- How to Manage Pitta Naturally
खाने में ठंडी तासीर वाली चीजों को शामिल करें। खीरा, नारियल पानी, तरबूज, धनिया और सौंफ को शामिल करें।
खाने में बहुत तीखा, तला-भुना और खट्टा खाना कम से कम लें। लाल मिर्च और गरम मसालों से दूरी बनाए रखें।
दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी पिएं। आप सौंफ या धनिया उबालकर ठंडा करके भी पी सकते हैं।
मानसिक तनाव को कम करने के लिए अनुलोम-विलोम, शीतली प्राणायाम और मेडिटेशन जरूर करें। रोजाना सुबह 15 मिनट योगासन जरूर करें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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