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Disease caused by vata dosha according to ayurveda : आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर तीन दोषों-वात, पित्त और कफ से मिलकर बना है। इनमें से वात दोष को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह शरीर में हर प्रकार की गतिविधि (मूवमेंट) को नियंत्रित करता है। सांस लेना, पलक झपकाना, चलना, बोलना, सोच पाना, यहां तक कि मल-मूत्र त्याग की प्रक्रिया भी वात दोष द्वारा ही नियंत्रित की जाती है।
दिल्ली की आशा आयुर्वेदा की आयुर्वेदाचार्य डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि जब वात दोष संतुलित रहता है, तो शरीर चुस्त, दिमाग सक्रिय और पाचन सही रहता है। लेकिन यदि यह असंतुलित हो जाए, तो कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक बीमारियां शरीर में जन्म लेने लगती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष वायु (Air) और आकाश (Space) तत्व से मिलकर बना है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:
जब शरीर में ये गुण अत्यधिक बढ़ जाते हैं, तो वात असंतुलित हो जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार, किसी व्यक्ति के शरीर में वात दोषबढ़ने के पीछे कोई 1 नहीं, बल्कि कई वजहें होती हैं। इसमें शामिल हैः

आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष को मैनेज करने के लिए आप नीचे बताए गए उपायों को अपना सकते हैं।
| S.NO | क्या करें | क्या फायदा मिलेगा |
| 1 | नियमित लाइफस्टाइल | वात को संतुलित रखने के लिए नियमित लाइफस्टाइल बहुत जरूरी है। इसके लिए समय पर खाना खाएं और जागे। रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। |
| 2 | ताजा खाना ही खाएं | वात दोष को शांत रखने के लिए हमेशा गर्म, ताजा और हल्का पका हुआ खाना खाए। खाने में घी और तिल का तेल सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। |
| 3 | ज्यादा सूखे खाने से दूरी रखें | वात दोष को कम करने के लिए ठंडा खाना खाने से बचें। ज्यादा सूखा भोजन (पापड़, चिप्स), अत्यधिक कैफीन का सेवन करने से बचें। |
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।