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Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma
thyroid problems (AI generated image)
थायराइड की समस्या भारत में काफी आम होती जा रही है, लेकिन दुर्भाग्य से आज के समय में भी एक बड़ी संख्या में लोग थायराइड ग्रंथि और थायराइड से जुड़ी समस्याओं के बारे में नहीं जानते हैं। थायराइड दरअसल किसी बीमारी का नाम नहीं बल्कि थायराइड हमारे गर्दन में मौजूद एक तितली के आकार की छोटे आकार की ग्रंथि है, जो जरूरी हार्मोन बनाती है। थायराइड में जब किसी कारण से कोई समस्या पैदा होती है और उसके कारण थायराइड कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो उससे थायराइड की बीमारी होती है जिन्हें हाइपोथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म की समस्याएं होने लगती है। लेकिन थायराइड से जुड़ी समस्याओं के बारे में आयुर्वेद का क्या मानना है, क्या आयुर्वेद की मदद से थायराइड की समस्या का इलाज किया जा सकता है। इस लेख में आशा आयुर्वेदा की विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने कई इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
महर्षि सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता में गले की सूजन का वर्णन करते हुए लिखा है जब शरीर में कफ, वात और वसा ऊतक दूषित होकर गले में जमा होने लग जाते हैं, तो वे गले में अंडकोष जैसी सूजन की गांठ बन देते हैं, जिसे गलगण्ड कहा जाता है। आयुर्वेद में सिर्फ थायराइड ग्रंथि में होने वाली समस्याओं के बारे में ही नहीं बल्कि उसके उपायों के बारे में भी काफी जानकारी दी है।
जब आपकी थायराइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर पाती है, तो शरीर का चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म सिस्टम प्रभावित हो जाता है और ठीक से काम नहीं कर पाता है। थायराइड में दिक्कत होने पर या तो यह ग्रंथि कम हार्मोन बनाने लग जाती है या फिर ज्यादा और इसलिए थायराइड से जुड़ी प्रमुख बीमारियों के दो नाम है, जो इस प्रकार हैं -
हाइपोथायरायडिज्म - जिसमें ग्लैंड पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती है, जिससे वजन बढ़ना, थकान और ठंड लगना जैसी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में निम्न भी शामिल हो सकते हैं -
हाइपरथायरायडिज्म - जिसमें ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है, जिससे वजन कम होना, एंग्जायटी और दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल होते हैं:
थायराइड ग्रंथि में होने वाले रोग आमतौर पर जेनेटिक होते हैं, यानी माता या पिता की जीन्स से मिलते हैं। हालांकि, इसके अलावा भी थायराइड से जुड़ी बीमारियां होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते है, जो इस प्रकार हैं -
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में थायराइड से जुड़ी बीमारियां ऐसी श्रेणी में आती है जिनका इलाज किया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति सही खान-पान और सही दिनचर्या का पालन कर रहा है, तो उससे थायराइड से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही थायराइड है तो इसके ठीक होने की संभावनाएं कम हो सकती हैं। आयुर्वेद में कुछ थेरेपी हैं, जिनकी मदद से थायराइड का इलाज किया जा सकता है -
इलाज के लिए पेट साफ करना (विरेचन) और नाक के जरिए दवा देना (नस्य) जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं।
कोई भी आयुर्वेदिक दवा या इलाज शुरू करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से जरूर सलाह लें, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट अलग-अलग होती है। अपनी मौजूदा एलोपैथिक दवाएं अचानक बंद न करें।