क्या थायराइड की समस्या को आयुर्वेद से दूर किया जा सकता है? एक्सपर्ट से जानें

आयुर्वेद थायराइड की समस्या को जड़ से संतुलित करने में कैसे मदद करता है और वात, पित्त और कफ दोषों के संतुलन पर आधारित यह प्राचीन पद्धति कैसे थायराइड फंक्शन में सुधार सकती है इस लेख में जानें।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 12, 2026 8:41 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Chanchal Sharma

थायराइड की समस्या भारत में काफी आम होती जा रही है, लेकिन दुर्भाग्य से आज के समय में भी एक बड़ी संख्या में लोग थायराइड ग्रंथि और थायराइड से जुड़ी समस्याओं के बारे में नहीं जानते हैं। थायराइड दरअसल किसी बीमारी का नाम नहीं बल्कि थायराइड हमारे गर्दन में मौजूद एक तितली के आकार की छोटे आकार की ग्रंथि है, जो जरूरी हार्मोन बनाती है। थायराइड में जब किसी कारण से कोई समस्या पैदा होती है और उसके कारण थायराइड कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो उससे थायराइड की बीमारी होती है जिन्हें हाइपोथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म की समस्याएं होने लगती है। लेकिन थायराइड से जुड़ी समस्याओं के बारे में आयुर्वेद का क्या मानना है, क्या आयुर्वेद की मदद से थायराइड की समस्या का इलाज किया जा सकता है। इस लेख में आशा आयुर्वेदा की विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने कई इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।

आयुर्वेद से समझिए थायराइड के बारे में

महर्षि सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता में गले की सूजन का वर्णन करते हुए लिखा है जब शरीर में कफ, वात और वसा ऊतक दूषित होकर गले में जमा होने लग जाते हैं, तो वे गले में अंडकोष जैसी सूजन की गांठ बन देते हैं, जिसे गलगण्ड कहा जाता है। आयुर्वेद में सिर्फ थायराइड ग्रंथि में होने वाली समस्याओं के बारे में ही नहीं बल्कि उसके उपायों के बारे में भी काफी जानकारी दी है।

थायराइड से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानें

जब आपकी थायराइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर पाती है, तो शरीर का चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म सिस्टम प्रभावित हो जाता है और ठीक से काम नहीं कर पाता है। थायराइड में दिक्कत होने पर या तो यह ग्रंथि कम हार्मोन बनाने लग जाती है या फिर ज्यादा और इसलिए थायराइड से जुड़ी प्रमुख बीमारियों के दो नाम है, जो इस प्रकार हैं -

हाइपोथायरायडिज्म - जिसमें ग्लैंड पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती है, जिससे वजन बढ़ना, थकान और ठंड लगना जैसी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में निम्न भी शामिल हो सकते हैं -

  • दिल की धड़कन का सामान्य से धीमा होना।
  • थकान महसूस होना।
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के वज़न बढ़ना।
  • ठंड के प्रति संवेदनशील महसूस करना।
  • त्वचा का रूखा होना और बालों का रूखा व बेजान होना।
  • उदासी या डिप्रेशन महसूस होना।
  • पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना

हाइपरथायरायडिज्म - जिसमें ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है, जिससे वजन कम होना, एंग्जायटी और दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल होते हैं:

  • दिल की धड़कन का सामान्य से तेज होना
  • सोने में परेशानी
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना
  • गर्मी के प्रति संवेदनशीलता महसूस होना
  • त्वचा का चिपचिपा या पसीने से तर होना
  • बेचैनी, चिड़चिड़ापन या घबराहट महसूस होना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना या पीरियड न आना

थायराइड रोग होने के प्रमुख कारण

थायराइड ग्रंथि में होने वाले रोग आमतौर पर जेनेटिक होते हैं, यानी माता या पिता की जीन्स से मिलते हैं। हालांकि, इसके अलावा भी थायराइड से जुड़ी बीमारियां होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते है, जो इस प्रकार हैं -

  • अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से तनाव हो रहा है, तो इसका असर थायराइड हार्मोन पर भी पड़ने लग सकता है
  • आहार में आयोडीन का स्तर बहुत कम या बहुत ज्यादा होने से थायराइड ग्रंथियां खास तौर पर प्रभावित होती हैं।
  • यह समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है; अगर परिवार के अन्य सदस्यों को यह समस्या रही है, तो परिवार के दूसरे लोगों को भी यह हो सकती है।
  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले कई हार्मोनल बदलावों के कारण महिलाओं में थायराइड हार्मोन का असंतुलन देखा जाता है।
  • इसके अलावा आहार में अगर बहुत ज्यादा सेवन सोया प्रोडक्ट्स का सेवन कर रहे हैं, तो उससे भी कई बार थायराइड प्रभावित हो सकती है।

आयुर्वेद में थायराइड का इलाज

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में थायराइड से जुड़ी बीमारियां ऐसी श्रेणी में आती है जिनका इलाज किया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति सही खान-पान और सही दिनचर्या का पालन कर रहा है, तो उससे थायराइड से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही थायराइड है तो इसके ठीक होने की संभावनाएं कम हो सकती हैं। आयुर्वेद में कुछ थेरेपी हैं, जिनकी मदद से थायराइड का इलाज किया जा सकता है -

  • पंचकर्म - शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने के लिए इलाज के लिए उल्टी करवाना (वमन),

    इलाज के लिए पेट साफ करना (विरेचन) और नाक के जरिए दवा देना (नस्य) जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं।

  • अभ्यंग - इस खास चिकित्सा थेरेपी में तिल के तेल जैसे औषधीय तेलों से मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और तनाव कम होता है।
  • खान-पान में बदलाव - आशा आयुर्वेदा के अनुसार, हाइपोथायरायडिज्म के मामले में आयोडीन, जिंक और सेलेनियम से भरपूर चीजें खाएं, और कच्ची पत्ता गोभी, ब्रोकली और बहुत ज्यादा ठंडी चीजों से परहेज करें।
  • योग और प्राणायाम - सर्वांगासन, मत्स्यासन और उज्जायी प्राणायाम थायरॉयड ग्रंथि को सक्रिय करने और तनाव कम करने में मदद करते हैं।

कोई भी आयुर्वेदिक दवा या इलाज शुरू करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से जरूर सलाह लें, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट अलग-अलग होती है। अपनी मौजूदा एलोपैथिक दवाएं अचानक बंद न करें।