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Cataract Treatment In Ayurveda: मोतियाबिंद एक आम नेत्र विकार है, जिसमें आंखों के लेंस पर धुंधलापन आ जाता है। इसके कारण दृष्टि पर असर पड़ता है। अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह अंधेपन का कारण बन सकता है। आमतौर पर, मोतियाबिंद की समस्या बढ़ती उम्र के साथ देखने को मिलती है। लेकिन आजकल के गलत खानपान और खराब जीवनशैली के कारण कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। जबकि सर्जरी मोतियाबिंद के लिए एक सामान्य उपचार है, आयुर्वेदिक उपाय इस समस्या को रोकने के लिए और इसके प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। आइए, डॉ बासु आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ मनदीप सिंह बासु से जानते हैं मोतियाबिंद के लिए आयुर्वेदिक इलाज के बारे में विस्तार से -
त्रिफला, तीन फलों - आंवला, हरीतकी और बिभीतकी से बना एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन है, जो अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध है। त्रिफला आंखों की सेहत को बनाए रखने में सहायक होता है और मोतियाबिंद के विकास को धीमा करने में मदद कर सकता है। इसके लिए आप रोजाना रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन एक गिलास गुनगुने पानी के साथ करें। इसके अलावा, आप चाहें तो रात भर त्रिफला चूर्ण को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर इससे आंखों को धोएं। इससे आंखों को साफ करने और उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बेल पत्र मोतियाबिंद के उपचार में उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेद में बेल के पत्तों का उपयोग आंखों की बीमारियों के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है। बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर आंखों पर लगाने या इसका सेवन करने से मोतियाबिंद को रोकने में मदद मिल सकती है।
नेत्र तर्पण एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें आंखों के चारों ओर शुद्ध गौघृत लगाया जाता है। यह आंखों को पोषण और ठंडक प्रदान करता है और दृष्टि में सुधार करने में मदद करता है। यह प्रक्रिया रात को सोने से पहले या सुबह के समय की जा सकती है।
चौलाई के पत्तों का रस भी मोतियाबिंद को रोकने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आप रोजाना चौलाई के पत्तों का रस निकालकर पिएं। 2 से 3 महीने तक लगातार ऐसा करने से मोतियाबिंद की समस्या खत्म हो सकती है और आंखों की रोशनी वापस लाने में मदद मिलती है।