
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 6, 2026 6:42 PM IST
Medically Verified By: Dr. Himanshu Singh
ayurveda and mental health (This image is generated by chatgpt)
क्या आपको पता है कि आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं के पीछे का कारण आपके खराब पाचन तंत्र से जोड़ता है। जिसका मतलब है कि अगर आपको डिप्रेशन, चिंता या अन्य कोई मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हो रही है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि कहीं न कहीं आपको पाचन क्रिया से जुड़ी कोई समस्या हो। आयुर्वेद व पंचकर्म विशेषज्ञ डॉक्टर हिमांशु सिंह ने बताया कि आज की तनावपूर्ण और अनियमित जीवनशैली में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आयुर्वेद इन समस्याओं को केवल मानसिक रोग नहीं मानता, बल्कि शरीर, मन और पाचन तंत्र के गहरे असंतुलन से जुड़ी स्थिति मानता है। ऐसे में सवाल आता है कि क्या आयुर्वेद की मदद से डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार जब अनियमित जीवनशैली और अनियमित आहार से डाइजेस्टिव फायर (पाचन अग्नि) डिस्टर्ब होता है जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म खराब होता है। अगर आपका मेटाबॉलिज्म ठीक से काम नहीं कर पा रहा है, तो जिससे ग्रहणी दूषित होता है। आहार का ठीक से पाचन न होने के कारण और इन सभी समस्याओं के कारण शरीर का पहला धातु, जो कि रस धातु है वह दूषित होने लगता है और उसका क्षय होने लगता है।
gut health and mental health connection (This image is generated by chatgpt)
शरीर की ये सभी प्रक्रियाएं प्रभावित होना और रस धातु दूषित होने के कारण, मन और शरीर दोनों कमजोर होने लगते हैं। रस धातु शरीर को पोषण देने के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में जब रस धातु दूषित या क्षय होती है तो उसके कारण निम्न समस्याएं देखी जा सकती हैं जैसे -
इसी प्रकार ग्रहणी दोष अर्थात पाचन तंत्र की कमजोरी भी मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालती है। आयुर्वेद में “अग्नि” को स्वास्थ्य का मूल माना गया है। जब अग्नि मंद हो जाती है, भोजन ठीक से पच नहीं पाता और “आम” बनने लगता है, तब इसका प्रभाव केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन पर भी पड़ता है। लंबे समय तक ग्रहणी विकार रहने पर व्यक्ति में चिंता, मानसिक थकान, नकारात्मक विचार, बेचैनी और डिप्रेशन जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं।
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आयुर्वेद में इसलिए मानसिक रोगों के उपचार में केवल मन को शांत करने वाली औषधियां ही नहीं, बल्कि अग्नि सुधारने, रस धातु को पोषण देने और वात दोष को संतुलित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामांसी जैसी औषधियों मानसिक शांति देने में सहायक मानी गई हैं और पंचकर्म में शिरोधारा, शिरोबस्ती, नस्य किया जा सकता है , वहीं उचित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, प्राणायाम और ध्यान भी उपचार का महत्वपूर्ण भाग हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य आयुर्वेद औऱ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देना है और इसमें दी गई जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी का इलाज करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।