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Written By: Atul Modi | Published : November 12, 2020 4:37 PM IST
बिना ऑपरेशन के भी ठीक हो सकती है खूनी और बादी बवासीर, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से जानिए उपचार की प्रक्रिया
बवासीर एक ऐसी बीमारी है जो कि बहुत ही कष्टकारी और पीड़ादायक होती है। वर्तमान समय में इस बीमारी से ज्यादातर लोग परेशान हैं। इसकी परेशानी की मुख्य वजह हमारी जीवन शैली में बदलाव एवं खानपान को माना गया है। बवासीर को आम बोलचाल की भाषा में पाइल्स या भगंदर इत्यादि नामों से जाना जाता है। बवासीर की बीमारी उन बीमारियों में से है जिनके बारे में लोग बात करने में शर्म महसूस करते हैं। आयुर्वेद में बवासीर का उपचार संभव है लेकिन समय पर उपचार न होने पर यह अत्यंत भयंकर रोग धारण कर लेती है।
आशा आयुर्वेदा क्लिीनिक, दिल्ली की डॉक्टर चंचल शर्मा कहती हैं, आयुर्वेद के माध्यम से बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है। बवासीर की समस्या जब बढ़ जाती है तो ऐसी स्थिति में इस रोग का उपचार करना काफी कठिन हो जाता है। हालांक, आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति में आज भी ऐसे प्राचीन उपचार उपलब्ध है जोकि बवासीर जैसे गंभीर बीमारियों के उपचार में पूरी तरह से सक्षम है।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर चंचल शर्मा का कहना है कि, मेडिकल साइंस में एलोपैथी के द्वारा बवासीर जैसी बीमारी को ठीक करने के लिए पूरे प्रयास किए गए, मगर इस बीमारी को एलोपैथी के द्वारा पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाया है। ऐसे में एक मात्र आयुर्वेद अंतिम विकल्प बचता है जोकि बवासीर को जड़ से खत्म करने में पूरी तरह से मदद करता है।
बवासीर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
खूनी बवासीर एक ऐसा बवासीर होता है जिसमें बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को अत्यधिक परेशानी नहीं होती है परंतु इसमें गुदाद्वार से खून का प्रवाह होता है। यह खून मल त्यागने के पहले या मल त्यागने के बाद या फिर मल त्याग के साथ-साथ भी हो सकता है। अधिकांश लोगों में तो ऐसी धारणा बन जाती है कि उनका पेट खराब है या फिर हाजमा ठीक नहीं है जिसके कारण उन्हें ऐसी परेशानी हो रही है परंतु यह ऐसा नहीं है यह एक बीमारी है जो कि बहुत ही कष्टकारी होती है इसका समय से पूर्व इलाज करा लेना ही एक बेहतर निर्णय होता है।
बादी बवासीर खूनी बवासीर के बिल्कुल विपरीत होता है। बादी बवासीर में मरीज के गुदाद्वार में मस्से बन जाते हैं। जिसके कारण मल त्याग का द्वार बहुत छोटा हो जाता है। इसलिए बवासीर वाले रोगी को मल त्याग के समय जलन दर्द एवं खुजली जैसी समस्याएं महसूस होती है। जिसके कारण बवासीर वाले मरीज के पूरे शरीर में बेचैनी बनी रहती है एवं किसी भी काम को करने में उसका पूरी तरीके से मन भी नहीं लगता और चित अशांत रहता है।
यदि किसी को मल त्यागने से पूर्व या फिर मल त्याग के समय हल्का फुल्का ब्लड आता है या फिर छोटे-छोटे मस्से बनना शुरू हो जाते हैं जो यह लक्षण आपके शुरुआती बवासीर के यदि समय रहते आपने इस बीमारी को पहचान कर इसका उपचार कर लिया तो आप भगंदर जैसी बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं।
जब यूट्रस का प्रेशर रेक्टम के ऊपर पड़ता है जिसके कारण गुदाद्वार में स्वेलिंग आ जाती है और धीरे धीरे कब्ज की शिकायत होने लगती है। बवासीर का एक और अन्य कारण है जिसका नाम है अनुवांशिकता अर्थात यदि आपके माता-पिता में से किसी एक को बवासीर के रोग की समस्या है तो यह बच्चों में होने की काफी संभावना हो जाती है। इन सभी कारणों के साथ-साथ इंसान की बढ़ती उम्र भी बवासीर का एक कारण है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत कम हो जाता है जिसकी वजह से इंसान की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। खाना ठीक से हजम नहीं होता जिसके कारण आगे चलकर बवासीर बनता है। इसके अलावा जो लोग वेटलिफ्टिंग या फिर हैवी जिम करते हैं उन्हें भी बवासीर जैसी गंभीर बीमारी से गुजरना पड़ सकता है।
आयुर्वेद के द्वारा बवासीर को जड़ से खत्म किया जा सकता है। पुरानी से पुरानी कब्ज एवं बवासीर को जड़ से ठीक किया जा सकता है। जिन्हें बवासीर की समस्या है उन्हें प्रतिदिन सुबह उठकर नियमित रूप से कम से कम 5 अंजीर का सेवन करना चाहिए। ऐसा आपको लगातार 40 से 45 दिन तक करना है। इसके अलावा फाइबर युक्त भोजन (फल और सब्जियां) का सेवन करने की सलाह दी जाती है। साथ ऑयली फूड, शराब, सिगरेट इत्यादि से बचना चाहिए। इन सब के अलावा, आयुर्वेद में ऐसे बहुत सारे घरेलू नुस्खे एवं आयुर्वेद के प्राचीन उपाय हैं जिनके माध्यम से बवासीर जैसे गंभीर रोग की समस्या का समाधान किया जा सकता है।