आयुर्वेद के अनुसार इस समय एक्सरसाइज करने से मिलता है दोगुना लाभ, जानिए व्यायाम का आपके वात-पित्त और कफ दोष से क्या है सम्बन्ध

आयुर्वेद के अनुसार एक्सरसाइज करने का सही समय क्या है? अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है. जिसका जवाब हम यहां आपको विस्तार से बता रहे हैं.

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Written By: Atul Modi | Updated : July 2, 2021 5:16 PM IST

एक्सरसाइज (Exercise) करना स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद होता है यह हम सभी अच्छी तरह जानते हैं। मगर यह बहुत कम ही लोग जानते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए जितना महत्व एक्सरसाइज करने का है उतना ही महत्व एक्सरसाइज करने के समय का भी है। आयुर्वेद की मानें तो जहां सही समय पर एक्सरसाइज करना आपके लिए फायदेमंद होता है वहीं गलत समय पर एक्सरसाइज करना आपको परेशानी में डाल सकता है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि आखिर एक्सरसाइज करने का सही समय क्या है? चिंता न करें, इसमें हम आपकी मदद करेंगे। हम यहां आपके लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञों से कुछ सुझाव लेकर आये हैं कि किस समय एक्सरसाइज करना आपके लिए सबसे अच्छा है। आइए तो जानते हैं आयुर्वेद के अनुसार एक्सरसाइज करने का सही समय क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार एक्सरसाइज करने का सही समय - Right Time To Exercise According to Ayurveda

1. पहला सबसे अच्छा समय - सुबह 6 से 10 बजे के बीच

आयुर्वेदिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर दीक्षा भावसार के अनुसार, व्यायाम करने का सबसे अच्छा समय सुबह के कफ चरण (Kapha Phase) के दौरान होता है जो सुबह 6 बजे शुरू होता है और सुबह 10 बजे समाप्त होता है। आयुर्वेद में पूरे दिन को दोषों (Doshas) के आधार पर अलग-अलग चरणों में विभाजित किया जाता है: पहला चरण कफ चरण होता है, उसके बाद पित्त चरण (Pitta Phase) और फिर वात चरण (Vata Phase) होता है। सुबह और शाम के समय 6 से 10 बजे कफ प्रबल होते हैं, 10 से 2 बजे पित्त प्रबल होते हैं और 2 से 6 वात प्रधान होता है।

सटीक होने के लिए, सुबह 6 बजे से 8 बजे तक का समय, व्यायाम करने का सबसे अच्छा समय है। अगर आप सुबह 7 बजे तक उठते हैं तो कोशिश करें कि सुबह 9 बजे तक एक्सरसाइज खत्म कर लें। क्योंकि इसे सुबह 10 बजे से पहले करना सबसे अच्छा है।

ऐसा क्यों है?

क्योंकि सुबह सबसे पहले व्यायाम के साथ दिन की शुरुआत करने से हम पूरे दिन ऊर्जावान, सकारात्मक और उत्साही (शारीरिक और मानसिक रूप से) महसूस करते हैं। साथ ही जब सुबह 6 से 10 बजे के बीच किया जाता है, जब कफ प्रबल होता है- यह हमारे वात और पित्त को बढ़ाकर शरीर और दिमाग में संतुलन लाने में मदद करता है, इसलिए अतिरिक्त कफ संतुलित हो जाता है। जैसा कि हम जानते हैं कि व्यायाम से वात बढ़ता है और जब हम चलते, दौड़ते, कार्डियो या जिम आदि करते हैं तो हमें पसीना भी आता है।

2. दूसरा सबसे अच्छा समय- शाम 6 से 10 बजे के बीच

डॉक्टर दीक्षा भावसार (Dr. Dixa Bhavsar) की मानें तो व्यायाम करने का दूसरा सबसे अच्छा समय शाम 6 से 10 बजे के बीच है। लेकिन जैसा कि हम जानते हैं कि हमें रात 10 बजे तक सो जाना चाहिए, ऐसे में शाम के समय हल्का व्यायाम करना जैसे चलना या सिर्फ सांस लेने का काम करने का प्रयास करना सबसे अच्छा है न कि किसी तरह का भारी व्यायाम करना।

ऐसा क्यों है?

क्योंकि व्यायाम वात को बढ़ाता है और हमें ऊर्जावान महसूस कराता है। लेकिन रात में हमें ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है, हम अच्छी नींद के लिए शांत रहना और शांति वातावरण चाहते हैं। इसलिए शाम के समय (सोने के समय से 3 घंटे पहले) जिम जाने या भारी व्यायाम करने से बचें, खासकर अगर आपको जल्दी सोने में परेशानी होती है। शाम के समय भारी व्यायाम से रात में अधिक सोचने (Overthinking) की समस्या हो सकती है, जो अनिद्रा (अतिरिक्त वात के कारण) की ओर ले जाती है, इसलिए सोने से पहले मन को शांत करने वाले व्यायाम या अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे अभ्यास करना सबसे अच्छा है।

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